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सूडान में हुए भूस्खलन ने ले ली 200 बच्चों की जान, सहायता समूह ने बताई दर्दनाक आंखों देखी

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Sep 06, 2025 11:29 am IST,  Updated : Sep 06, 2025 11:29 am IST

दारफुर में हुए इस भयावह भूस्खलन ने न केवल सूडान बल्कि पूरे विश्व को झकझोर कर रख दिया है। राहत एजेंसियां हर संभव प्रयास कर रही हैं, लेकिन इस त्रासदी से उबरने में क्षेत्र को लंबा समय लग सकता है।

सूडान में हुए भूस्खलन के बाद मौके पर मौजूद लोग। - India TV Hindi
सूडान में हुए भूस्खलन के बाद मौके पर मौजूद लोग। Image Source : AP

काहिराः पश्चिमी सूडान के दारफुर क्षेत्र में हाल ही में हुए भीषण भूस्खलन ने विनाशकारी प्रभाव डाला है। यह हादसा रविवार को मर्राह पर्वतों के तरासिन गांव में हुआ, जहां मिट्टी और चट्टानों के नीचे दबकर सैकड़ों लोगों की जान चली गई। शुक्रवार को मिली जानकारी के अनुसार इस त्रासदी में लगभग 200 बच्चे भी मारे गए हैं। इस हादसे में 1000 अधिक लोगों के मारे जाने की आशंका है।

राहत और बचाव कार्य जारी

एक प्रमुख सहायता संगठन ‘सेव द चिल्ड्रन’ ने बताया कि अब तक 150 लोगों को सुरक्षित बचाया गया है, जिनमें 40 बच्चे भी शामिल हैं। इन सभी का उपचार किया जा रहा है। राहत और बचाव कार्य अभी भी युद्धस्तर पर जारी है, लेकिन कठिन भू-प्राकृतिक परिस्थितियों और सीमित संसाधनों के कारण प्रयासों में बाधाएं आ रही हैं। भूस्खलन का प्रभाव इतना व्यापक है कि पूरे गांव को भारी नुकसान पहुंचा है। मकान मलबे में दब गए हैं और जीवित बचे लोग खुले में रहने को मजबूर हैं। पानी, दवा और भोजन की भारी किल्लत है। कई लोग अब भी लापता हैं और उनके जीवित बचने की संभावना क्षीण होती जा रही है।

सूडान आर्मी ने बताया बड़ी आपदा

‘सूडान लिबरेशन मूवमेंट आर्मी’ के प्रवक्ता मोहम्मद अब्देल-रहमान अल-नायर ने इस आपदा को भयानक बताया और पुष्टि की कि मृतकों की संख्या एक हजार से अधिक हो सकती है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल सहायता की अपील की है, ताकि राहत कार्यों को तेज किया जा सके और बचे हुए लोगों की जान बचाई जा सके।

मानवीय संकट और गहराने का खतरा

यह आपदा सूडान में पहले से मौजूद मानवीय संकट को और गहरा कर रही है, जहां पहले ही हिंसा, राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक तंगी जैसी समस्याएं चल रही हैं। बच्चों की बड़ी संख्या में मृत्यु ने इस त्रासदी को और भी दर्दनाक बना दिया है और यह दर्शाता है कि प्राकृतिक आपदाओं से सबसे अधिक प्रभावित अक्सर कमजोर और असहाय वर्ग ही होते हैं। (PTI)

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