वाशिंगटन: अमेरिका में सैकड़ों बच्चों और व्यस्कों का यौन शोषण करने का दोषी वाशिंगटन का पूर्व आर्चबिशप थियोडोर मैकैरिक की 94 वर्ष की आयु में मौत हो गई। वैटिकन के पूर्व पादरी पोप जॉन पाल द्वितीय द्वारा नियुक्त पूर्व कार्डिनल मैकैरिक उस वक्त चर्चा में आया जब वैटिकन की जांच में पाया गया कि उसने गिरजाघरों में शीर्ष एवं प्रभावशाली पदों पर रहते हुए बच्चों और व्यस्कों का यौन शोषण किया था। मैकैरिक 2000 से 2006 तक वाशिंगटन का आर्चबिशप था। इसकी मौत के बाद पीड़ितों ने सख्त रिएक्शन देते कहा है कि उसके द्वारा दिए गए घाव हमेशा जिंदा रहेंगे।
बता दें कि वाशिंगटन के आर्चबिशप रॉबर्ट मैकलेरॉय ने शुक्रवार को एक बयान जारी कर मैकैरिक की मौत की पुष्टि की लेकिन इस संबंध में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। उनका बयान उन लोगों पर केंद्रित था जिनका मैकैरिक ने शोषण किया था। मैकलेरॉय ने कहा, ‘‘इस समय मेरा ध्यान विशेष रूप से उन लोगों पर है जिन्हें मैकैरिक ने नुकसान पहुंचाया था। हम सभी उन लोगों के तथा यौन शोषण के शिकार सभी लोगों के लिए प्रार्थना करते हैं।’’ हाल में अदालती कार्यवाही में यह बताया गया था कि मैकैरिक को ‘डिमेंशिया’ है। वह मिसौरी में रह रहा था।
डिमेंशिया से पीड़ित था मैकलेरॉय
‘वैटिकन न्यूज’ ने बताया कि उसकी मौत वहीं हुई। ‘डिमेंशिया’ ऐसी दिमागी समस्या है जिसके कारण चीजों को याद रखने, सोचने और सीखने की क्षमता क्षीण हो जाती है। मैकैरिक द्वारा यौन उत्पीड़न किए जाने की खबर सामने आने के बाद गिरजाघरों की विश्वसनीयता पर सवाल उठने लगे थे क्योंकि ऐसे साक्ष्य थे कि वैटिकन और अमेरिकी गिरजाघरों के शीर्ष पादरियों को मैकैरिक के आचरण के बारे में पता था लेकिन मैकैरिक के प्रभाव को देखते हुए कभी किसी ने उनके खिलाफ मुंह नहीं खोला। जांच में यह बात भी सामने आई थी कि कई बिशप, कार्डिनल और पोप मैकैरिक के युवा पुरुषों के साथ दुर्व्यवहार की रिपोर्ट को कई दशकों तक खारिज करते रहे और उन्होंने इन्हें कोई महत्व नहीं दिया। जांचकर्ताओं ने जांच के दौरान पीड़ितों, पादरियों और अमेरिकी कैथोलिक बिशप के अधिकारियों समेत 90 लोगों से पूछताछ की थी। ’(एपी)