काबुल: अफगानिस्तान में तीन वर्ष के विलंब के बाद 20 अक्तूबर को विधायी चुनाव होंगे। अधिकारियों ने रविवार को यह जानकारी दी। विद्रोही तालिबान और राजनीतिक अस्थिरता से यह देश पिछले कुछ वर्षों से जूझ रहा है। यह चुनाव मूल रूप से 2014 में हुये राष्ट्रपति चुनावों के बाद 2015 में होने थे लेकिन कमजोर सरकार के दौरान सुरक्षा कारणों और साजोसामान से जुड़ी दूसरी मुश्किलों की वजह से इन्हें लगातार टाला जाता रहा। अगर चुनाव होंगे तो उम्मीदवार नेशनल असेंबली की 249 सीटों के लिये अपनी किस्मत आजमाएंगे। ये चुनाव पांच वर्षों के लिये होंगे। इसके साथ ही पूरे अफगानिस्तान में 400 जिलों में भी क्षेत्रीय चुनाव होंगे। खास बात यह कि इनमें से कुछ जिले काबुल के नियंत्रण से बाहर हैं। (वेनेजुएला अग्निकांड: घटना के लिए जिम्मेदार होने के संदेह में पांच पुलिस अधिकारी हिरासत में )
अफगानिस्तान निर्वाचन आयोग के प्रमुख अब्दुल बदी सैयद ने कहा, ‘‘ अफगानिस्तान में चुनाव कराना आसान काम नहीं है।’’ उम्मीदवारों के नाम की औपचारिक घोषणा से पहले मतदाता अप्रैल मध्य तक पंजीकरण कार्ड के लिये आवेदन कर सकते हैं। यह चुनाव अप्रैल 2019 में होने वाले राष्ट्रपति चुनावों से महज कुछ महीने पहले हो रहे हैं।
हालांकि देश भर में सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच विदेशी कूटनीतिज्ञों ने सरकार की सही तरह से चुनाव करा पाने की क्षमताओं पर संदेह व्यक्त किया है। चुनावों की घोषणा के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस कदम की सराहना की है लेकिन आह्वान किया कि इस प्रक्रिया में सभी अफगानों को शामिल किया जाना चाहिए।