1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. सैलाब के बाद अब नेपाल में भूकंप से हिली धरती, रिक्टर स्केल पर कितनी रही तीव्रता?

सैलाब के बाद अब नेपाल में भूकंप से हिली धरती, रिक्टर स्केल पर कितनी रही तीव्रता?

 Written By: Subhash Kumar
 Published : Aug 27, 2026 11:23 pm IST,  Updated : Aug 27, 2026 11:50 pm IST

नेपाल में सैलाब से भारी तबाही मची है। सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। इस बीच अब नेपाल में भूकंप से भी धरती हिल उठी है। गुरुवार को नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं।

nepal earthquake after floods- India TV Hindi
नेपाल में तबाही। Image Source : PTI

नेपाल में विनाशकारी सैलाब के बाद तबाही का डरावना मंजर देखने को मिल रहा है। सामने आई जानकारी के अनुसार, नेपाल में तिब्बत की ओर से अचानक आई बाढ़ के कारण नेपाल में अब तक 350 से ज्यादा लोगों की मौत कंफर्म हो चुकी है। भोटेकोशी नदी में आए फ्लैश फ्लड ने नेपाल के 8 जिलों को पूरी तरह तबाह कर दिया है। अभी इस त्रासदी में 900 से ज्यादा लोग लापता बताए जा रहे हैं जिनमें 290 भारतीय हैं। इस तबाही के बीच गुरुवार को नेपाल में भूकंप के भी झटके महसूस किए गए हैं। इस भूकंप की तीव्रता 3.2 बताई जा रही है।

कितनी थी भूकंप की तीव्रता?

नेशनल सेंटर फोर सिस्मोलॉजी की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, गुरुवार की रात नेपाल में भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 3.2 मापी गई है। जानकारी के अनुसार, ये भूकंप गुरुवार 27 अगस्त 2026 को रात 9 बजकर 18 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र धरती से 10 किलोमीटर की गहराई में बताया गया है। आपको बता दें कि नेपाल में लगातार आपदाएं देखने को मिलती रहती हैं।

तिब्बत में भी भूकंप के झटके

नेपाल के अलावा गुरुवार को तिब्बत में भी भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। ये भूकंप और भी तेज तीव्रता का था। नेशनल सेंटर फोर सिस्मोलॉजी ने जानकारी दी है कि तिब्बत में 8 बजकर 15 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए हैं। ये भूकंप रात को 8 बजकर 15 मिनट पर आया। इस भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 4.9 मापी गई है। इस भूकंप का भी केंद्र धरती से 10 किलोमीटर की गहराई में था। 

नेपाल में कैसे आई तबाही?

दरअसल, नेपाल और तिब्बत में स्थित लैंगटांग लिरुंग माउंटेन रेंज में तिब्बत की तरफ करीब 5200 मीटर ऊंचाई पर ग्लेशियर का एक हिस्सा टूट गया। ग्लेशियर का निचला हिस्सा टूटकर लगभग 1200 मीटर नीचे घाटी में गिरा। ग्लेशियर के मलबे ने ल्हेंडे रीवर का रास्ता ब्लॉक कर दिया। नदी का रास्ता रुकने से वहां एक अस्थायी बांध बना। पानी बढ़ता गया, प्रेशर बनता गया। जब पानी का प्रेशर ज्यादा बन गया तो अस्थायी बांध टूट गया। बांध टूटने से कीचड़, चट्टानों और मलबे की विशाल लहर नीचे की ओर बहने लगे। ल्हेंडे तिब्बत से निकलने वाली एक सहायक नदी है, जो नेपाल-चीन सीमा के पास रसुवागढ़ी और तिमुरे के आसपास भोटेकोशी नदी में मिलती है। ग्लेशियर के ढहने से सारा मलबा भोटेकोशी नदी में गया। भोटेकोशी नदी तिब्बत से नेपाल में एंटर करती है, और रसुवा जिले से होकर बहती है। भोटेकोशी नदी आगे चलकर त्रिशूली नदी में मिल जाती है। इसलिए वही पानी, त्रिशूली में भी पहुंच गया और नुवाकोट और रसुवा जिलों में तबाही मचाता गया। त्रिशूली नदी में पानी का लेवल कुछ जगहों पर 30 मिनट में 7 से 9 मीटर तक बढ़ गया था। इसीलिए बर्बादी इतनी ज्यादा हुई।

ये भी पढ़ें- नेपाल बाढ़ में 359 मौतों से हाहाकार, 910 लापता; चीन ने दी एक और तबाही की चेतावनी

नेपाल के कई इलाकों में आज और कल भारी बारिश का अलर्ट, मौसम विभाग ने दी है चेतावनी

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश