ढाका: कट्टरपंथी जमात-ए-इस्लामी प्रमुख मोतीउर रहमान निजामी को फांसी के फंदे से लटकाया जाना अब काफी नज़दीक नज़र आ रहा है, क्योंकि उसे फांसी देने का एक कार्यकारी आदेश आज रात जारी कर दिया गया। इससे पहले उसने 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान किए युद्ध अपराधों को लेकर राष्ट्रपति से दया की गुहार लगाने से इन्कार कर दिया।
ढाका सेंट्रल जेल के चारो तरफ सुरक्षा बढ़ाई गई
गृह मंत्री असदुज्जमान खान ने संवाददाताओं से कहा, निजामी ने रहम की मांग नहीं की। फांसी दिए जाने का कार्यकारी आदेश जेल अधिकारियों को भेज दिया गया है। ढाका केंद्रीय कारागार के चारों ओर सुरक्षा बढ़ाने के लिए एलाट अपराध रोधी रैपिड एक्शन बटालियन के पुलिस के साथ काम पर जुटने के बीच उनकी टिप्पणी आई है। जेल प्रहरियों ने इसके अंदर सुरक्षा बढ़ा दी है।
जेल प्रशासन ने निजामी के परिवारवालों को उससे आखिरी बार मिलने को कहा
जेल के सामने मौजूद सड़क पर भी बैरीकेड लगा दिए गए हैं और वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। मीडिया की खबरों के मुताबिक 73 साल के निजामी की पत्नी, परिवार के सदस्य, दो बेटे और उनकी पत्नियां आज शाम उससे मिलने जेल गए। दरअसल, जेल अधिकारियों ने उनसे वहां आकर आखिरी बार निजामी से मुलाकात करने को कहा था।
बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट ने नियाजी की फांसी के खिलाफ अंतिम अपील की थी खारिज
एक विशेष न्यायाधिकरण ने 1971 में कुख्यात अल बद्र मिलीशिया बलों के प्रमुख के तौर पर उच्चतम जिम्मेदारियां निभाने को लेकर दोषी ठहराते हुए बांग्लादेश की सबसे बड़ी इस्लामी पार्टी के प्रमुख निजामी को अक्तूबर 2014 में फांसी की सजा सुनाई थी। निजामी अपने ही गांव में 450 से अधिक लोगों की हत्या करने को लेकर खास तौर पर दोषी पाया गया था। फांसी के खिलाफ उसकी आखिरी अपील पांच मई को शीर्ष न्यायालय ने खारिज कर दी थी।