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चीन और रूस पहली बार करेंगे संयुक्त सैन्य अभ्यास

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 05, 2016 10:36 pm IST,  Updated : May 05, 2016 10:36 pm IST

मास्को/बीजिंग: चीन और रूस की सेनाएं पहली बार संयुक्त रूप से सैन्य अभ्यास करने जा रही हैं। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह के 'आकस्मिक या भड़काऊ मिसाइल हमले' से निपटने की तैयारी

Army exercise- India TV Hindi
Army exercise

मास्को/बीजिंग: चीन और रूस की सेनाएं पहली बार संयुक्त रूप से सैन्य अभ्यास करने जा रही हैं। इस अभ्यास का मुख्य उद्देश्य किसी भी तरह के 'आकस्मिक या भड़काऊ मिसाइल हमले' से निपटने की तैयारी करना है। अमेरिका और दक्षिण कोरिया द्वारा एशिया में अत्याधुनिक टीएचएएडी मिसाइल इंटरसेप्टर की तैनाती की चर्चा के बीच चीन और रूस की सेनाएं इस सैनिक अभ्यास की तैयारी कर रही हैं। समाचार चैनल आरटी की रिपोर्ट के अनुसार, रूस में माह के अंत होने वाले इस संयुक्त सैन्य अभ्यास में रूस और चीन के रक्षा अधिकारी मुख्य रूप से कम्प्यूटरीकृत मिसाइल हमले की स्थिति से निपटने की तैयारी करेंगे।

रूस और चीन ने कहा उनका सैन्य अभ्यास किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं

पिछले हफ्ते रूस के दौरे पर पहुंचे चीनी रक्षा मंत्री चांग वांकुआन ने रूसी रक्षा मंत्री सर्गेई शोएगू से मुलाकात की थी। इस मुलाकात के बाद संवाददाता सम्मेलन में दोनों ही देशों के रक्षा मंत्रियों ने इस बात पर जोर दिया कि ये अभ्यास किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं हैं। उन्होंने कहा कि उनके मंत्रालयों ने आधुनिक सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए वृहद एकता और संयुक्त प्रयास की जरूरत महसूस की है।

मिसाइलरोधी टीएचएडी प्रणाली की दक्षिण कोरिया में तैनाती से चीन खुश नहीं

चीन के सरकारी अंग्रेजी दैनिक चाइना डेली ने इस संयुक्त अभ्यास को दक्षिण कोरिया में मिसाइलरोधी टीएचएएडी को तैनात करने की अमेरिकी योजना से जोड़ा है। अखबार ने लिखा है कि अमेरिका और दक्षिण कोरिया, दोनों ही इस बात पर जोर दे रहे हैं कि उत्तरी कोरिया से मिसाइल हमले के खतरे को देखते हुए अमेरिका के सहयोगियों की सुरक्षा के लिए ये बहुत जरूरी है। लेकिन, अमेरिका और दक्षिण कोरिया की इस योजना की चीन और रूस दोनों ने ही तीखी आलोचना की है और कहा है कि इससे क्षेत्र में शक्ति संतुलन प्रभावित होगा। अमेरिका अगर दक्षिण कोरिया में टीएचएएडी की तैनाती करता है तो इसमें लगी लंबी दूरी की रडार प्रणाली के दायरे में चीन और रूस के दूर-दराज के हिस्से भी आ जाएंगे।

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