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चीन ने भारत के लैंड बिल पर किसे ठहराया दोषी

 Written By: India TV News Desk
 Published : Apr 22, 2015 02:26 pm IST,  Updated : Apr 22, 2015 02:30 pm IST

नई दिल्ली: लैंड बिल पर चल रहे बवाल को लेकर सिर्फ देश के लोग ही नहीं विदेशी भी तंज कस रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के

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चीन ने भारत के लैंड बिल पर किसे ठहराया दोषी

नई दिल्ली: लैंड बिल पर चल रहे बवाल को लेकर सिर्फ देश के लोग ही नहीं विदेशी भी तंज कस रहे हैं। भारतीय जनता पार्टी की अगुवाई वाले सत्ता पक्ष और विपक्ष के सांसदों के बीच  संसद में जोरदार उठापटक हो रही है। चीन नें भारत में लैंड बिल पर हो रहे हंगामे के लिए इंडिया में लोकतंत्र के ऊंचे स्तर को जिम्मेदार बताया है। चीन का मानना है कि यह सब भारत में 'बहुत ज्यादा लोकतंत्र' होने की वजह से हो रहा है।

पिछले हफ्ते चीन के शांक्सी प्रोविंस में शियान की यात्रा में इकनॉमिक टाइम्स ने देखा कि कैसे चीन ने लैंड यूज राइट्स सिस्टम को डिवेलप किया है और तेज ग्रोथ को बरकरार रखने के लिए खासतौर पर किसानों से उनकी जमीन लेने जैसे मसलों को कैसे निपटाया है।

शियान हाईटेक इंडस्ट्रीज डिवेलपमेंट जोन (XHTZ) के फॉरन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (FIPB) के प्रॉजेक्ट मैनेजर वांग मेंगहाव ने एक समाचार पत्र को बताया, 'किसानों को एक डेडलाइन दी जाती है। अगर वे तब तक अपनी रजामंदी नहीं देते हैं, तो सरकार उनकी जमीन लेने की हकदार हो जाती है।'

वांग के हिसाब से भारत को ऐसी दिक्कत और भूमि अधिग्रहण बिल पास कराने में परेशानी इसलिए हो रही है क्योंकि वहां डेमोक्रेटिक सिस्टम है। चीन में दूसरे ऑफिसर्स और विषेशग्य का भी यही मानना है।

वांग ने कहा, 'स्वाभाविक है कि लोग अपनी जमीन खुशी-खुशी नहीं छोड़ना चाहेंगे। चीन में जमीन सरकार की होती है और उनको लेकर लोगों के पास एक सीमा से आगे जाने का ऑप्शन नहीं होता है। सरकार जब चाहे, अपनी जमीन वापस ले सकती है, लेकिन इंडिया में सिस्टम और प्रोसेस के चलते यह जटिल मामला हो जाता है।'

चीन सरकार जिन किसानों की जमीन लेती है, उनको वह वैकल्पिक प्लॉट ऑफर करती है। उन्होंने कहा, 'मुआवजे में पैसा और नौकरी दोनों शामिल होनी चाहिए।'

307 वर्ग किलोमीटर में फैले XHTZ को 1991 में नैशनल लेवल के शुरुआती चाइनीज साइंस पार्क के तौर पर बनाया गया था। देश के सबसे कामयाब 114 नैशनल हाईटेक जोन में एक जोन माने जाने वाले XHTZ में 2009 में एक इकनॉमिक जोन की स्विक्रति दी गई थी। यहां चीन बेंगलुरु जैसी एक सॉफ्टवेयर सिटी डिवेलप करना चाहता है।

XHTZ के ऑफिसर्स ने बताया कि जब लोगों से वह एरिया खाली करने के लिए कहा जाएगा, जहां वे वर्षों से रह रहे हैं तो विरोध प्रदर्शन होंगे ही।

आधिकारिक सूत्र ने बताया है कि, 'जब सरकार को जमीन की जरूरत होती है तो आमतौर पर गांव में घोषणा के तौर पर एक साइन लगाया जाता है। गांव वालों को अगर कोई दिक्कत है तो वह उसकी शिकायत दर्ज करा सकता है। उनकी तरफ से कोई शिकायत नहीं आने पर मान लिया जाता है कि वे जमीन सरकार को देने को राजी हैं।'

भारत की तरह चीन में किसान निवेशक से सीधे डील नहीं करते। सरकार पहले 'जनहित में' जमीन अधिग्रहित करती है और फिर उसको बनाने या निवेशकों के हाथों बेच दिया जाता है।

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