नेपीथा: अल नीनो के प्रभाव से म्यांमार में तापमान में तेजी से वृद्धि हुई है, जिसके कारण कुएं, तालाब और नदियां सूख गई हैं। नतीजा यह है कि देश के 10 क्षेत्रों में पानी की समस्या पैदा हो गई है। समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, मौसम और जल विज्ञान विभाग (डीएमएच) ने अनुमान जाहिर किया है कि म्यांमार और यंगून के बाहरी इलाकों में मार्च से मई तक दैनिक आधार पर तापमान 47.2 डिग्री सेल्सियस बना रहेगा। इससे फसलों को नुक्सान होने की आशंका है।
इस क्षेत्र में जीवकोपार्जन कार्यक्रम चला रहे युनाइटेड चर्च ऑफ क्राइस्ट (यूसीसी) के अनुसार, 54 हजार किलोमीटर क्षेत्र में फैले 'शुष्क जोन' में करीब एक हजार परिवारों को जनवरी महीने के मध्य से ही पानी के संकट से जूझना पड़ रहा है। इस शुष्क क्षेत्र में म्यांमार के मागवे, मंडालय और निचले सैगेइंग के इलाके शामिल हैं। अमेरिकी वेबसाइट ईपीए के यंगून स्थित पत्रकार के अनुसार, यंगून के बाहरी हिस्से में स्थित शहरों में रहने वाले लोग भी पानी संकट से जूझ रहे हैं और बाहर से पानी ले रहे हैं।
म्यांमार के स्थानीय समाचार पत्र के अनुसार, शुष्क क्षेत्र में करीब 5.8 करोड़ लोग रहते हैं, जो खेती पर निर्भर हैं। 2016 में वर्षा कम होने के कारण इनकी तिल, मटर और सेम की फसलें काफी प्रभावित हुई हैं। विज्ञान संगठन, क्लाइमेट सेंट्रल के अनुसार, गत साल एशिया-प्रशांत क्षेत्र में अल नीनो के प्रभाव के चलते तापमान में अत्यधिक वृद्धि हुई थी, जिससे 21 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था।