न्यूयॉर्क: मानवाधिकार संगठन ह्यूमन राइट्स वाच ने मंगलवार को कहा कि अफगानिस्तान को फिलहाल दी जाने वाली फांसी को तुरंत रोक देना चाहिए। संगठन ने अफगानिस्तान से फांसी की सजा पर पाबंदी लगाने का आग्रह किया है। विगत 8 मई को छह तालिबान कैदियों को फांसी से लटका दिया गया था। 2014 में राष्ट्रपति अशरफ गनी के पद ग्रहण के बाद पहली बार मृत्युदंड को अंजाम तक पहुंचाया गया।
आलोचकों को जवाब देने के लिए छह लोगों को फांसी
ह्यूमन राइट्स वाच ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि छह लोगों को फांसी देना, आलोचकों को जवाब देने के राष्ट्रपति के प्रयासों का हिस्सा है, जिन्होंने तालिबान के खिलाफ कठोर नीति अपनाने की मांग की है। गत 19 अप्रैल को ट्रक बम विस्फोट में काबुल में 64 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद गनी ने निर्दोष लोगों और जवानों के खून बहाने वालों से ताकत से निपटने की शपथ ली थी और दंडित करने में कोई दया नहीं दिखाने की कसम खाई थी।
फांसी की सजा से खत्म नहीं होगा आंतक का खतरा
ह्यूमन राइट्स वाच ने कहा, "अफगान सरकार को मानना चाहिए कि मृत्युदंड न केवल अस्वीकार्य क्रूर दंड है, बल्कि आतंकी खतरे से निपटने में बेअसर और संभवत: उल्टे नतीजे देने वाला भी है।" संस्था ने कहा, "न्याय करने के लिए उच्चस्तरीय मानकों के अनुरूप चलने की जरूरत है न कि बदला लेने के लिए फांसी देने की।"