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पाकिस्तानी धार्मिक संगठन ने महिलाओं के लिए अलग शैक्षणिक संस्थानों की मांग की

 Written By: Bhasha
 Published : Oct 21, 2015 06:00 pm IST,  Updated : Oct 21, 2015 06:00 pm IST

इस्लामाबाद: सह शिक्षा के इस्लामिक सिद्धांतों के अनुकूल ना होने की बात कहते हुए पाकिस्तान के एक धार्मिक संगठन ने सरकार से जल्द से जल्द पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग अलग शिक्षा तंत्र स्थापित

पाक में महिलाओं के लिए...- India TV Hindi
पाक में महिलाओं के लिए अलग शिक्षा संस्थानों की मांग

इस्लामाबाद: सह शिक्षा के इस्लामिक सिद्धांतों के अनुकूल ना होने की बात कहते हुए पाकिस्तान के एक धार्मिक संगठन ने सरकार से जल्द से जल्द पुरूषों एवं महिलाओं के लिए अलग अलग शिक्षा तंत्र स्थापित करने को कहा। देश में कानूनों का इस्लामीकरण करने में सरकार की मदद के लिए 1973 के संविधान के हिस्से के तौर पर गठित काउंसिल ऑफ इस्लामिक आईडिऑलजी (CII) की कल दो दिनों की बैठक समाप्त हुई। संगठन ने एक बयान में कहा कि सह शिक्षा ना तो समाज की जरूरत है और ना ही इस्लामिक सिद्धांतों के अनुकूल है। बयान में कहा गया, सरकार को निश्चित तौर पर पूर्व राष्ट्रपति जनरल जिया उल हक द्वारा घोषित दो महिला विश्वविद्यालयों की (इस्लामाबाद में) स्थापना करनी चाहिए। पूर्व सैन्य शासक जनरल जिया उल हक ने कई इस्लामी कानून बनाए थे और माना जाता है कि उन कानूनों ने देश में सांप्रदायिकता एवं चरमपंथ को बढ़ाया।

CII ने अपनी सिफारिश दोहराते हुए कहा कि महिलाओं को अपने चेहरे, हाथ और पांव ढंकने की जरूरत नहीं है। उसने सुप्रीम कोर्ट के हाल के एक फैसले का स्वागत किया जिसमें सरकार को उर्दू को आधिकारिक भाषा के तौर पर लागू करने का आदेश दिया गया था। संगठन ने कहा, उर्दू को राष्ट्रीय एवं आधिकारिक भाषा मानते हुए संघीय सरकार को प्रांतीय सरकारों को अपनी भाषाओं को आधिकारिक भाषा के तौर पर अपनाने की मंजूरी देनी चाहिए। CII ने साथ ही सिफारिश दी कि प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में शामिल होने वाले छात्रों को सवालों के उर्दू में जवाब देने की मंजूरी मिलनी चाहिए।

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