बीजिंग: चीन के एक अखबार ने शुक्रवार को लिखा है कि भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर मुद्दे को लेकर तनाव शंघाई सहयोग संगठन (SCO) और उसकी आतंकवाद-रोधी प्रणाली के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन सकता है। सरकारी स्वामित्व वाले ग्लोबल टाइम्स में प्रकाशित संपादकीय के अनुसार, ‘भारत और पाकिस्तान को शामिल करने से एससीओ में राजनीतिक आयाम जुड़ेगा जिससे इसके सदस्य देशों की मूल्य प्रणाली, राष्ट्रीय विकास और अहम विषयों के लक्षण और अधिक विविधतापूर्ण होंगे।’ 6 सदस्यीय SCO में भारत और पाकिस्तान शुक्रवार को पूर्णकालिक सदस्य के तौर पर शामिल हो गए।
इसी पृष्ठभूमि में अखबार ने लिखा कि भारत और पाकिस्तान को शामिल करने से इस बात को लेकर चिंता पैदा हो गई है कि क्या उनके बीच लंबे समय से बने हुए बैर का प्रभाव भी SCO पर पड़ेगा। अखबार के मुताबिक SCO दोनों देशों के बीच मतभेदों को दूर करने की बुनियाद रख सकता है, लेकिन यह आसान काम नहीं होगा। संगठन को विस्तार के दौर में इस तरह की परीक्षाओं का सामना करना होगा। अखबार ने लिखा, ‘SCO में भारत की भागीदारी से संगठन का आंतरिक नेतृत्व किस तरह प्रभावित होगा, इस पर बहुत चर्चा हो चुकी है। अधिकतर बातचीत परंपरागत सोच के साथ की गई है। SCO नेतृत्व की स्पर्धा का स्थान नहीं है। कुछ भारतीय मीडिया संस्थानों को इन पुरानी सोच वाले विचारों से खुद को अलग कर क्षेत्रीय सहयोग के नए तरीके अपनाने चाहिए।’
अखबार ने एक और लेख में कहा, ‘अगर भारत और पाकिस्तान अपने बीच कश्मीर के मुद्दे समेत अन्य विवादों पर आपसी समझ बनाने में नाकाम हैं तो दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका बनी रहती है।’ इसके अनुसार, इन परिस्थितियों में यह SCO के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाएगी और चीन तथा रूस को भारत-पाकिस्तान के संबंधों को सुधारने के लिए और अधिक कूटनीतिक प्रयास करने चाहिए। SCO में चीन, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान, रूस, ताजिकिस्तान और उज्बेकिस्तान पूर्णकालिक सदस्यों के तौर पर शामिल हैं।