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पीएम मोदी के दोस्त को लग सकता है झटका, एग्जिट पोल का दावा-नहीं मिलेगा बहुमत

 Edited By: IndiaTV Hindi Desk
 Published : Sep 18, 2019 12:58 pm IST,  Updated : Sep 18, 2019 12:58 pm IST

इस चुनाव पर भारत में भी काफी दिलचस्पी ली जा रही थी। सरकार को भी उम्मीद होगी कि नेतन्याहू के साथ प्रधानमंत्री मोदी की जो केमिस्ट्री बनी है, वह आगे भी जारी रहे। दोनों नेताओं की दोस्ती काफी मशहूर है।

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पीएम मोदी के दोस्त को लग सकता है झटका, एग्जिट पोल का दावा-नहीं मिलेगा बहुमत

नई दिल्ली: इजरायल में बेंजामिन नेतन्याहू का रेकॉर्ड पांचवीं बार प्रधानमंत्री बनने का सपना चकनाचूर हो सकता है। एग्जिट पोल्स के नतीजों पर गौर करें तो देश के सबसे ज्यादा समय तक प्रधानमंत्री रहे नेतन्याहू को संसद में बहुमत नहीं मिलेगा। हालांकि चुनाव प्रचार में नेतन्याहू ने पूरी ताकत झोंक दी थी। बता दें कि इस चुनाव पर भारत में भी काफी दिलचस्पी ली जा रही थी। सरकार को भी उम्मीद होगी कि नेतन्याहू के साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जो केमिस्ट्री बनी है, वह आगे भी जारी रहे। दोनों नेताओं की दोस्ती काफी मशहूर है।

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ऐग्जिट पोल और नतीजों में अगर समानता रहती है तो किसी को भी बहुमत नहीं मिलेगी। 120 सदस्यीय इजरायली संसद में नेतन्याहू के नेतृत्व वाले दक्षिणपंथी गुट को 55-57 सीटें मिल सकती हैं। उधर, नेतन्याहू के मुख्य प्रतिद्वंद्वी बेनी गैंट्ज की ब्लू ऐंड वाइट पार्टी भी 61 के जादुई आंकड़े से पिछड़ती दिख रही है। ऐसे में संभावना इस बात की बन रही है कि देश में मिलीजुली सरकार बने।

गौरतलब है कि इजराइल के नागरिकों ने देश में पांच महीने में दूसरी बार हुए आम चुनाव में मंगलवार को वोट डाले। मंगलवार सुबह सात बजे मतदान शुरू हुआ। करीब 63 लाख योग्य मतदाताओं ने 22वीं इजराइली संसद को निर्वाचित करने के लिए रात 10 बजे तक वोट डाले। अप्रैल के चुनावों में 120 सदस्यीय संसद में 61 सदस्यों का गठबंधन बनाने में नेतन्याहू के नाकाम रहने के चलते मध्यावधि चुनाव की जरूरत पड़ी। 

इस चुनाव को नेतन्याहू के लिए सबसे कड़ी राजनीतिक चुनौती के तौर पर और उनके 10 साल के निर्बाध नेतृत्व के भविष्य में भी जारी रहने के लिए इसे एक जनमत संग्रह के तौर पर देखा जा रहा। इस चुनाव में दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता एवं इजराइल के सबसे लंबे कार्यकाल वाले प्रधानमंत्री नेतन्याहू का मुकाबला पूर्व सैन्य प्रमुख बेंजामिन ‘बेनी’ गांत्ज के साथ है, जो मध्यमार्गी ब्लू एंड व्हाइट पार्टी से हैं। पिछले कई बरसों में नेतन्याहू के वह सबसे मजबूत प्रतिद्वंद्वी हैं।

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