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मोदी का लाहौर रुकना कैसे बनी विदेश नीति की सबसे बड़ी पहल, जानिए

 Written By: IANS
 Published : Dec 29, 2015 07:59 pm IST,  Updated : Dec 29, 2015 07:59 pm IST

नई दिल्ली: क्रिसमस के दिन अफगानिस्तान से लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाहौर में रुकने और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मिलने को साल 2015 में भारतीय विदेश नीति की सबसे बड़ी पहल करार दिया जा

Lahore dominated Indian foreign policy in 2015- India TV Hindi
Lahore dominated Indian foreign policy in 2015

नई दिल्ली: क्रिसमस के दिन अफगानिस्तान से लौटते समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लाहौर में रुकने और पाकिस्तानी प्रधानमंत्री से मिलने को साल 2015 में भारतीय विदेश नीति की सबसे बड़ी पहल करार दिया जा सकता है। 25 दिसंबर 2015 का दिन भारतीय विदेश नीति के इतिहास में शायद हमेशा याद रखा जाएगा। काबुल में अफगानिस्तानी संसद के नए भवन का उद्घाटन करने के बाद मोदी ने ट्वीट किया, "पीएम नवाज शरीफ से बात की और उन्हें जन्मदिन की बधाई दी"

कुछ ही देर में एक अन्य ट्वीट में मोदी ने कहा, "आज लाहौर में पीएम नवाज शरीफ से मुलाकात करने जा रहा हूं जहां मैं दिल्ली जाने के दौरान रुकुंगा।" इस पर चर्चाएं स्वाभाविक हैं। क्या यह आनन-फानन में लिया गया फैसला था या फिर, आलोचकों के हिसाब से, क्या यह पूर्वनियोजित था? वजह जो भी हो, था यह कूटनीतिक 'मास्टरस्ट्रोक' जिसकी भारत और पाकिस्तान के नाजुक रिश्तों को देखते हुए कोई दूसरी मिसाल मिलनी मुश्किल है।

इस मुलाकात की भूमिका बन रही थी। 30 नवंबर को पेरिस में मोदी और शरीफ की एक ऐसी मुलाकात हुई जिसे पूर्वनियोजित तो नहीं बताया गया लेकिन जिसने भारत और पाकिस्तान के रिश्तों पर जमी बर्फ को पिघलाने का काम किया। इस मुलाकात के बाद 6 दिसंबर को दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों की बैंकाक में बैठक हुई। इसमें दोनों देशों के विदेश सचिव मौजूद थे।

दो दिन के बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज 'हार्ट आफ एशिया' सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए इस्लामाबाद पहुंचीं। 9 दिसंबर को उन्होंने कहा कि अगले साल दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेस) में हिस्सा लेने प्रधानमंत्री मोदी पाकिस्तान आएंगे। सुषमा ने नवाज शरीफ से मुलाकात की और फिर उनके विदेशी मामलों के सलाहकार सरताज अजीज से द्विपक्षीय मुलाकात की। सुषमा-अजीज की मुलाकात के बाद जारी बयान में पाकिस्तान ने भारत को आश्वस्त किया कि वह मुंबई के आतंकी हमले की न्यायिक प्रक्रिया को जल्द पूरा करने के लिए हर संभव कदम उठाएगा। इसमें कश्मीर मसले का भी जिक्र किया गया।

पाकिस्तान के अलावा भी भारत ने 'पड़ोसी पहले' की अपनी नीति पर कदम जमाए रखा। बांग्लादेश के साथ जमीन के आदान-प्रदान का ऐतिहासिक समझौता हुआ। श्रीलंका में नई सरकार के गठन के बाद संबंधों का विस्तार हुआ। नेपाल में नए संविधान के लागू होने के बाद से जरूर तनाव की स्थिति बनी। नए संविधान के खिलाफ मधेस समुदाय के आंदोलन के मामले में नेपाल ने भारत की तरफ उंगली उठाई। जबकि, भारत ने साफ कर दिया कि उसका इस मामले से कोई वास्ता नहीं है और यह नेपाल का अंदरूनी मसला है।

विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के मुताबिक चीन के साथ भारत का संबंध अधिक विश्वास पर आधारित है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विभिन्न देशों के दौरों ने भारतीय कूटनीति को नए आयाम दिए। कूटनीति के आर्थिक पहलू की तरफ एक बड़ा झुकाव देखा गया।

साल के अंत में सुषमा स्वराज ने कारोबारियों के एक सम्मेलन में कहा कि केंद्र सरकार के कई मुख्य कार्यक्रम अंतर्राष्ट्रीय सहयोग से और मजबूती हासिल कर सकेंगे। और, ऐसा होता दिखा भी। जर्मनी और सिंगापुर, भारत के कौशल विकास कार्यक्रम के सहभागी बने। अमेरिका की यात्रा के दौरान फेसबुक संस्थापक मार्क जुकरबर्ग समेत कई अन्य हस्तियों से मोदी की मुलाकातों ने 'डिजिटल इंडिया' को केंद्र में ला दिया।

यूरोपीय संघ ने गंगा की सफाई और अन्य जल परियोजनाओं में मदद देने की पेशकश की। अधिकांश महत्वपूर्ण देशों ने भारत की स्मार्ट सिटी परियोजना में रुचि दिखाई। एक साल में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में करीब 40 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। आस्ट्रेलिया, कनाडा और फ्रांस के साथ समझौतों के साथ भारत की परमाणु कूटनीति ने भी नए आयाम छुए। असैन्य परमाणु करार पर जापान से भी बात आगे बढ़ी। भारत की बात दुनिया में किस हद तक सुनी जा रही है, इसका सबूत मोदी द्वारा प्रस्तावित वैश्विक सौर ऊर्जा गठबंधन में 122 देशों के शामिल होने से समझा जा सकता है। यह सहमति पेरिस के पर्यावरण सम्मेलन के दौरान बनी।

साल के अंत में राजनयिक स्तर पर दो और उल्लेखनीय घटनाएं हुईं। जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने बीते साल के भारत में 35 अरब डालर के जापानी निवेश के वादे के तहत दिल्ली में बुलेट ट्रेन परियोजना के समझौते पर दस्तखत किए। मोदी की रूस यात्रा ने भारत की रक्षा और परमाणु क्षमता के लिए नए दरवाजे खोले।

अक्टूबर में भारत ने भारत-अफ्रीका शिखर सम्मेलन की मेजबानी की। इसमें सभी 54 अफ्रीकी देशों ने शिरकत की जोकि अपने आप में बड़ी बात है। हिंसा प्रभावित लीबिया, सीरिया और यमन से भारतीयों को निकालकर स्वदेश लाना भी साल की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रहा। विदेश नीति के मामले में साल की शुरुआत एक बड़ी घटना से हुई थी जब राष्ट्रपति बराक ओबामा भारत के गणतंत्र दिवस समारोह का मुख्य अतिथि बनने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने। साल का अंत भी एक बड़ी घटना से हुआ जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाहौर के पास पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के पैतृक आवास में उनके साथ कश्मीरी चाय का मजा उठाते हुए बात की।

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