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सर्वदलीय बैठक में शामिल नहीं हुए मधेशी आंदोलनकारी

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 24, 2016 10:02 pm IST,  Updated : May 24, 2016 10:02 pm IST

काठमांडू: नेपाल के मधेशी दलों ने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली द्वारा मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया है। ये दल पिछले एक साल से संसद में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर

All party meeting- India TV Hindi
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काठमांडू: नेपाल के मधेशी दलों ने प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली द्वारा मंगलवार को बुलाई गई सर्वदलीय बैठक का बहिष्कार किया है। ये दल पिछले एक साल से संसद में अधिक प्रतिनिधित्व की मांग को लेकर आन्दोलनरत हैं। समाचार एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार, प्रधानमंत्री के प्रेस सलाहकार प्रमोद दहाल के हवाले से बताया कि प्रधानमंत्री ने यह सर्वदलीय बैठक सभी समकालीन मुद्दों तथा सांविधानिक मुद्दों पर समझौते के लिए बुलाई थी।

सरकार को उम्मीद, मधेशी भाग बैठक में होंगे शामिल

दहाल ने बताया, "मधेशी पार्टियां आज की बैठक में शामिल नहीं हुईं, लेकिन सरकार को भरोसा है कि आन्दोलनकारी दल वार्ता के लिए राजी होंगे।" प्रधानमंत्री ने सोमवार को मधेशी दलों को छह सूत्री पत्र भी लिखा था, जिसमें उनसे बातचीत के लिए बुलावा भेजा गया था। सलाहकार ने कहा कि प्रधानमंत्री राजनीतिक रूप से शांतिपूर्ण तरीके से मधेशी दलों की जायज मांगें पूरी करने का हर संभव प्रयास कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ओली ने कहा, मधेशियों की चिंताएं की जाएंगी दूर

दहाल के मुताबिक, इस बैठक के दौरान प्रधानमंत्री ओली ने कहा कि वे मधेशी दलों की वास्तविक चिंताओं और देश में जारी राजनीतिक संकट के समाधान के प्रति गंभीर हैं। सरकार के प्रवक्ता और कानून मंत्री अग्नि खेरेल ने कहा, "सरकार मधेशी दलों की मांगों को लेकर लचीला और सकारात्मक है। प्रधानमंत्री ने मधेशी दलों को सोमवार को पत्र लिखकर नए दौर की बातचीत के लिए आमंत्रित किया। हमें उम्मीद है कि आन्दोलनकारी जल्द ही बातचीत में शामिल होंगे।"

मधेशी दल का दावा, नया संविधान उनके हितों की रक्षा नहीं करता

इस बैठक में विपक्षी दलों ने प्रधानमंत्री से मधेशी दलों द्वारा उठाए गए मुद्दों को सुलझाने के लिए अनुकूल माहौल बनाने को कहा। नेपाली कांग्रेस के नेता महेश आचार्य ने कहा, "आज की बैठक का कोई सकारात्मक परिणाम तो नहीं निकला, क्योंकि मधेशी दलों ने बैठक में भाग ही नहीं लिया। हमने सरकार से एक अनुकूल माहौल बनाने और आंदोलनकारी दलों को बातचीत के लिए बुलाने और मसलों को सुलझाने की गुजारिश की है।" आंदोलनकारी गठबंधन के नेता राजेंद्र महतो ने मंगलवार को स्थानीय मीडिया से कहा, "हमें प्रधानमंत्री द्वारा भेजा गया पत्र प्राप्त हुआ है और हमने इसे काफी सकारात्मक ढंग से लिया है।" मधेशी दल और कुछ जातीय समूहों का दावा है कि नेपाल का संविधान भेदभावपूर्ण है और उनके लिए राजनीतिक स्वायत्तता सुनिश्चित नहीं करता है।

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