इरबिल: इराक के मोसुल में इस्लामिक स्टेट (IS) ने तमाम खौफनाक इबारतें लिखी हैं। अपने आखिरी गढ़ मोसुल को बचाने के लिए इस खूंखार आतंकी संगठन के लड़ाके इराकी सेना से भिड़े हैं, लेकिन इस खतरनाक जंग में आम नागरिकों को सबसे ज्यादा नुकसान उठाना पड़ रहा है। मोसुल से आ रही खबरों के मुताबिक, IS ने 20 लोगों को मोबाइल फोन रखने के 'जुर्म' में मारकर खंभों पर लटका दिया।
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ह्यूमन राइट्स ऑफिस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, आईएस ने बुधवार को 20 लोगों कि जान ले ली और बाकी नागरिकों में खौफ पैदा करने के लिए उनके शव को जगह-जगह खंभों पर लटका दिया। उत्तरी मोसुल में अपनी जान से हाथ धो बैठने वाले इन नागरिकों का कसूर सिर्फ इतना था कि उनके पास मोबाइल फोन था, और IS को शक था कि उनका इस्तेमाल इराकी सेना तक संदेश पहुंचाने के लिए किया जा रहा है। इस आतंकी संगठन के लड़ाकों ने लाशों के साथ एक नोट भी छोडा़ था जिसपर लिखा था, 'मोबाइल फोन का इस्तेमाल इराकी सेना तक खुफिया संदेश पहुंचाने के लिए किया जा रहा था, लिहाजा इन्हें फांसी दी जा रही है।'

इस्लामिक स्टेट। (फोटो: AP)
आईएस के अत्याचार की कहानी सिर्फ इतनी ही नहीं है। युनाइटेड नेशंस हाई कमिश्नर फॉर रिफ्यूजीज (UNHCR) की रिपोर्ट की मानें तो बीते मंगलवार को भी इस आतंकी संगठन ने इसाकी सेना से सांठगांठ का आरोप लगाकर मोसुल के 40 नागरिकों को गोली मार दी। मारने से पहले नागरिकों को नारंगी रंग के कपड़े पहनाए गए जिनपर लिखा था कि ये लोग इराकी सेना के एजेंट हैं। गौरतलब है कि मोसुल से आईएस को खदेड़ने के लिए इराक के प्रधानमंत्री हैदर अल अबादी ने लड़ाई की आधिकारिक घोषणा की थी। मोसुल पर आईएस का कब्जा पिछले दो साल से है।