लाहौर: पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने शनिवार को कहा कि भारत के पठानकोट शहर में हुए आतंकवादी हमले ने भारत और पाकिस्तान के बीच चल रही शांति प्रक्रिया पर असर डाला है। शरीफ ने कहा कि भारत और पाकिस्तान के बीच बातचीत सही दिशा में चल रही थी, लेकिन पठानकोट हमले ने बातचीत की प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया। रेडियो पाकिस्तान ने यह जानकारी दी है।
इस घटना के बाद भारत और पाकिस्तान की सरकार ने दोनों देशों के बीच होने वाली राजनयिक वार्ता को जनवरी के अंत तक टाल दिया है। पाकिस्तान के अब प्रतिबंधित किए गए संगठन जैश ए मुहम्मद के 6 आतंकवादियों ने पंजाब के पठानकोट में भारतीय वायु सेना अड्डे पर हमला कर 7 सुरक्षाकर्मियों की हत्या कर दी थी। बाद में सभी 6 आतंकवादियों को सुरक्षा बलों ने मार गिराया था।
इस घटना के बाद भारत ने पाकिस्तान से जैश ए मुहम्मद के चीफ और इस घटना के मुख्य षडयंत्रकारी मसूद अजहर के खिलाफ सबूत देते हुए कड़ी कार्रवाई की मांग की थी। उसके बाद पाकिस्तान से ऐसी खबरें आई कि अजहर को हिरासत में लिया गया है।
शरीफ ने उसके बाद सुरक्षा बलों के साथ एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाकर मामले की छानबीन करने को कहा था और भारत को कहा था कि पाकिस्तान इस मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है। साथ ही यह भी कहा था कि अगर इस मामले में किसी की संलिप्तता का सबूत मिलता है तो बेहिचक उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
भारत ने खुले दिल से पाकिस्तान के इस कदम का स्वागत किया था और कहा था कि वह पाकिस्तानी जांच दल की इस मामले में हर संभव मदद करेगा। लेकिन पाकिस्तान ने भारत के अजहर समेत अन्य संदिग्धों से संयुक्त पूछताछ की मांग को ठुकरा दिया।
पाकिस्तान के अखबार डेली टाइम्म ने अपने शनिवार के संपादकीय में लिखा था कि नरेंद्र मोदी सरकार द्वारा किए गए पहल के बाद जैसे ही दोनों देशों के बीच बातचीत होने वाली थी। पठानकोट हमले की घटना ने उस पर पानी फेर दिया है।
अखबार ने लिखा है कि 2008 में मुंबई में हुए आतंकवादी हमले जिसमें 166 लोग मारे गए थे और जिसमें कई विदेशी भी शामिल थे। उसके बाद जिस तरह से भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध बिगड़ गए थे। वैसे ही हालात पठानकोट हमले के बाद देखने को मिल रहा है।