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BRICS डिक्लेरेशन भारत की बड़ी कूटनीतिक जीत, अमेरिकी विश्लेषक कुगैलमैन का बड़ा बयान

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Sep 12, 2026 11:26 pm IST,  Updated : Sep 13, 2026 12:10 am IST

अमेरिका के दक्षिण एशिया मामलों के विश्लेषक माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में जारी न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक उपलब्धि है।

BRICS Summit- India TV Hindi
ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान पौधारोपण करते पुतिन, नरेंद्र मोदी और जिनपिंग Image Source : PTI

वॉशिंगटन: नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के पहले दिन साझा घोषणापत्र जारी कर भारत ने विश्व पटल पर एक बार फिर अपनी डिप्लोमैटिक कामयाबी का झंडा बुलंद कर दिया है। अमेरिका के विश्लेषक भी इसे भारत की बड़ी काटूनीतिक कामयाबी बता रहे हैं। अमेरिका के साउथ एशिया एनालिस्ट माइकल कुगेलमैन ने कहा कि ब्रिक्स समिट में जारी न्यू दिल्ली डिक्लेरेशन भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक सफलता है। उन्होंने कहा इस साल के शुरुआत में ब्रिक्स फॉरेन मिनिस्टर-लेवल की मीटिंग में जॉइंट स्टेटमेंट जारी करने में मुश्किल हुई थी। इसलिए ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान साझा घोषणापत्र जारी करने को लेकर संशय था। लेकिन भारत ने ब्रिक्स चेयरमैनशिप के दौरान कई चुनौतियों को पार करते हुए आखिरकार BRICS Declaration जारी कर सफलता प्राप्त की है।

यह सच में एक मुश्किल काम था

कुगेलमैन ने कहा, "यह भारत के लिए एक बड़ी डिप्लोमैटिक कामयाबी है, खासकर अगर हम याद करें कि इस साल की शुरुआत में फॉरेन मिनिस्टर-लेवल के ब्रिक्स समिट में जॉइंट स्टेटमेंट हासिल करना मुमकिन नहीं था। यह सच में एक मुश्किल काम था। इसलिए यह बात कि अब आपके पास एक है, और वह भी इन देशों के टॉप नेताओं के साथ, निश्चित रूप से एक बड़ी कामयाबी है।"

कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा

उन्होंने कहा कि भारत को ईरान में युद्ध और यूनाइटेड स्टेट्स की पॉलिसी सहित कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उन्होंने कहा, "मैंने इशारा किया था कि भारत को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। मुख्य चुनौतियां हैं कि ईरान में युद्ध के मुद्दे को कैसे संभाला जाए और US और उसकी नीतियों के मुद्दे को कैसे संभाला जाए।" कुगेलमैन ने कहा कि घोषणा के शुरुआती हिस्से में BRICS के मुख्य सिद्धांतों को काफी हद तक दोहराया गया था और इसलिए यह अनएक्सपेक्टेड नहीं था।

टैरिफ का जिक्र ट्रंप प्रशासन को नाखुश कर सकता है

उन्होंने कहा, "घोषणा का पहला हिस्सा सबसे कम हैरान करने वाला था। इसमें असल में BRICS के मुख्य सिद्धांतों को दोहराया गया था, जिसे ज़ाहिर तौर पर सभी सदस्यों का समर्थन हासिल है।" हालांकि, उन्होंने कहा कि घोषणा में ग्लोबल ट्रेड सिस्टम में रुकावटों, US टैरिफ और US प्रतिबंधों का ज़िक्र US एडमिनिस्ट्रेशन में कुछ नाखुशी पैदा कर सकता है। कुगेलमैन ने कहा, "मुझे लगता है कि ग्लोबल ट्रेड सिस्टम को लगे झटकों और खासकर अमेरिकी टैरिफ और प्रतिबंधों का ज़िक्र एडमिनिस्ट्रेशन में कुछ नाखुशी पैदा कर सकता है।"

बता दें कि ब्रिक्स के नेताओं ने शनिवार को सतत विकास के लिए 2030 एजेंडा और उसके दूरगामी, जन-केंद्रित लक्ष्यों एवं उद्देश्यों को संतुलित तरीके से लागू करने के लिए अथक प्रयास करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। घोषणापत्र में नेताओं ने कहा कि अत्यधिक गरीबी सहित सभी आयामों में गरीबी का उन्मूलन सबसे बड़ी वैश्विक चुनौती और सतत विकास के लिए एक अनिवार्य आवश्यकता है। घोषणापत्र में कहा गया, ''हम 2030 एजेंडा को नवोन्मेषी, समन्वित, पर्यावरण के अनुकूल, खुले और साझा तरीके से आगे बढ़ाने के महत्व को स्वीकार करते हैं।' (इनपुट-ANI)

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