इस्लामाबादः पाकिस्तान व अमेरिका के बीच एफ16 लड़ाकू विमान सौदे को लेकर खींचतान के बीच अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि पाकिस्तान के साथ संबंध खराब करने का अमेरिका का कोई इरादा नहीं है। विदेश विभाग के प्रवक्ता ने पाकिस्तान की उस टिप्पणी की आलोचना करने से इंकार कर दिया, जिसमें उसने कहा है कि अगर अमेरिका के साथ एफ-16 सौदा नाकाम होता है, तो वह सौदे के अन्य विकल्पों पर विचार करेगा।
'डान' की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रवक्ता जॉन किर्बी ने कहा, "कोई राष्ट्र अपनी जरूरतों के हिसाब से रक्षा जरूरतों पर फैसला करने के लिए स्वतंत्र है और यह पाकिस्तान पर निर्भर करता है कि वह किस प्रकार अपनी रक्षा जरूरतों को पूरा करता है।" किर्बी ने यह टिप्पणी उस सवाल के जवाब में की जिसमें पूछा गया कि अगर पाकिस्तान लड़ाकू विमान चीन से खरीदता है, तो क्या इससे पाकिस्तान के साथ अमेरिका के संबंधों में खटास पैदा होगी।
उन्होंने कहा, "जहां तक संबंधों की बात है, तो मैं कई बार कह चुका हूं, और यह महत्वपूर्ण है। और यह ऐसा संबंध है, जिसे खराब करने का हमारा इरादा कतई नहीं है।" किर्बी ने कहा, "लेकिन इस पर फैसला लेना पाकिस्तान की मर्जी है।" पाकिस्तान के एक मंत्री द्वारा अमेरिकी मदद को मूंगफली बताने पर किर्बी ने कहा, "मैं एक बार फिर यह बात कहना चाहूंगा कि यह संबंध महत्वपूर्ण है। हम इस संबंध को और मजबूत करने जा रहे हैं।"
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कांग्रेस की कुछ लॉबियों द्वारा पाकिस्तानी मदद का कड़ा विरोध करने के बावजूद किर्बी ने इसका बचाव किया। पिछले सप्ताह कांग्रेस ने पाकिस्तान के साथ हुए एफ16 सौदे में अमेरिकी सरकार द्वारा सब्सिडी देने से इनकार कर दिया था।
सौदे के तहत, पाकिस्तान को आठ विमानों के लिए 27 करोड़ डॉलर की रकम अदा करनी थी, जबकि अमेरिका विदेशी सेना वित्तीय सुविधा के तहत 43 करोड़ डॉलर की रकम का भुगतान करता। पाकिस्तान ने सारी रकम चुकाने में अपनी अक्षमता जताई थी।