इस्लामाबाद: पाकिस्तान में कबायलियों की फैसला लेने वाली उच्च संस्था, जिगरा ने खबर-पख्तूनख्वा प्रांत और गिलगित-बालतिस्तान सीमा क्षेत्र विवाद का निपटारा कर दिया। गुरुवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा गया कि सीमांकन का काम अगले हफ्ते शुरू होगा। खबर पख्तूनख्वा की हारबान जनजाति और गिलगित-बालतिस्तान की थोर जनजाति की जिगरा के दौरान कार्रवाई समिति के अध्यक्ष असदुल्ला कुरैशी ने इसकी घोषणा की। उन्होंने कहा, "विवादित क्षेत्र में हर कबीले के हिस्से के सीमांकन का कार्य 23 मई को किया जाएगा।"
मुद्दों का हल शांति से हो जाए, तो टकराव पैदा नहीं हो सकता
तीन दिनों के विचार-विमर्श के बाद समाप्त हुई जिगरा में दोनों जनजातियों के बीच तनाव का कारण रहे लगभग हर महत्वपूर्ण मुद्दे पर शांति एवं सद्भावना के लिए अंतिम नोट लिखा गया। कुरैशी ने कहा, "जिस तरह से यहां जिगरा में किया गया, यदि हम लोग इन मुद्दों को शांतिपूर्ण ढंग से निपटा सकें तब कोई भी भविष्य में हमारे बीच टकराव पैदा नहीं कर सकता।"
जनजातियों के सीमा विवाद की वजह से 2014 में गोलीबारी से मारे गए थे चार लोग
वर्ष 2014 में सीमा विवाद को लेकर प्रतिद्वंद्वी जनजातियों के बीच गोलीबारी में चार लोगों की मौत हो गई थी। थोर जनजाति का नेतृत्व करने वाले दिलबर जान ने भी इसी तरह की भावना जाहिर की। जान ने कहा, "हम लोग भविष्य में भी इसी राह को अपनाएंगे ताकि कोई भी हमारी जनजातियों के बीच मनमुटाव पैदा नहीं कर सके।" कोहिस्तान के उपायुक्त फजल-ए-खालिक ने इसे एक महत्वपूर्ण पहल करार दिया। उन्होंने कहा, हम लोग जिगरा के निर्णय को अपनी आधिकारिक समिति में रखेंगे। समिति में गिलगित एवं खबर के पांच-पांच अधिकारी रहेंगे।