पेशावर: पाकिस्तान के चरसद्दा में बाचा खान यूनिवर्सिटी पर बुधवार को हुए आतंकी हमले में एक प्रोफेसर की मौत हो गई। अपने छात्रों को बचाने के लिए प्रोफेसर ने गोलियों की परवाह तक नहीं की और आतंकियों से भिड़ गए। आज पूरी दुनिया इस प्रोफेसर की बहादुरी को सलाम कर रही है। बहादुरी की ये दास्तां है प्रोफेसर हामिद हुसैन की, जो आज पेशावर के पास आतंकियों से लड़ते-लड़ते शहीद हो गए। अपने छात्रों को बचाने के लिए प्रोफेसर ने गोलियों की परवाह तक नहीं की और आतंकियों से भिड़ गए। आज पूरी दुनिया इस प्रोफेसर की बहादुरी को सलाम कर रही है।
पाकिस्तान के प्रोफेसर को सलाम
खौफजदा आतंकी हमले में से एक प्रोफेसर की बहादुरी की ऐसी कहानी सामने आई है, जिस पर आज पूरी दुनिया को नाज है। ये कहानी है केमिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. सैय्यद हामिद हुसैन की। इनकी उम्र महज 32 साल थी और ओहदा असिस्टेंट प्रोफेसर का। आतंकी जब गोलियां बरसा रहे थे, छात्रों की जान ले रहे थे तब ये प्रोफेसर आतंकियों के सामने दीवार बनकर खड़े हो गए। प्रोफेसर हामिद ने अपनी छोटी सी पिस्टल के सहारे आतंकियों को रोकने की कोशिश की। उन पर फायर किया, बदकिस्मती से एक गोली खुद प्रोफेसर को लग गई। आतंकियों से लड़ते-लड़ते प्रोफेसर की जान चली गई लेकिन जब बाचा खान यूनिवर्सिटी के बच्चे क्लासरूम से जिंदा बाहर निकले तब इस प्रोफेसर की दिलेरी की पूरी कहानी सामने आई।
प्रोफेसर की पिस्टल, आतंकियों की AK-47
असल में आतंकी जब घुसे थे तब प्रोफेसर के सामने मौका था कि वो क्लासरूम छोड़कर भाग जाते या फिर दरवाजा बंद कर लेते लेकिन हामिद ने आतंकियों से लड़ने का फैसला किया। हामिद हुसैन ने सबसे पहले अपने स्टूडेंट से कहा कमरे से बाहर मत निकलो और अपनी पिस्टल निकाल ली। पिस्टल के सहारे ही एके-47 वाले आतंकियों से भिड़ गए और उन पर गोलियों की बौछार करने लगे। लेकिन प्रोफेसर की पिस्टल आतंकियों को रोक पाती उससे पहले ही एक गोली उनके बदन को भेदते हुए निकल गई। जियॉलजी के एक स्टूडेंट जहूर अहमद ने बाहर आकर पूरी कहानी बताई।
बच्चों को बचाने में हो गए शहीद
जहूर अहमद ने कहा, ‘यूनिवर्सिटी में ज्यों ही फायरिंग की आवाज सुनाई दी। केमिस्ट्री के असिस्टेंट प्रोफेसर ने हमें तुरंत सतर्क कर दिया और कहा कोई बिल्डिंग से बाहर न जाए। वो खुद पिस्टल निकालकर आतंकियों पर फायरिंग करने लगे तभी मैंने देखा उनको एक गोली लगी।’
आज पूरा पाकिस्तान प्रोफेसर की बहादुरी की मिसालें दे रहा है। बाचा खान यूनिवर्सिटी के छात्र अपने टीचर की बहादुरी के किस्से सुना रहे हैं। सिर्फ 3 दिन पहले हामिद ने अपने बेटे का बर्थ-डे मनाया था। हामिद अपने पीछे एक बेटा, एक बेटी, पत्नी और 2 भाइयों को छोड़ गए है। प्रो. हामिद हुसैन के घरवाले बताते हैं कि वो बचपन से ही पढ़ने में काफी तेज थे। पेशावर यूनिवर्सिटी से ऑर्गेनिक केमिस्ट्री में एमएससी की। इसके बाद ब्रिटेन की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्रिस्टल से पीएचडी की।
रोज 18 घंटे करते थे पढ़ाई
उनके दोस्त बताते हैं कि प्रोफेसर हामिद हर रोज 18 घंटे की पढ़ाई करते थे। ब्रिटेन से पीएचडी करने के बाद विदेश में नौकरी करने का मौका मिला था लेकिन ये कहकर बाचा खान यूनिवर्सिटी में पढ़ाने आ गए कि मुझे अपनी सरजमीं की सेवा करनी है और अपने मुल्क के बच्चों को पढ़ाना है।
हामिद की मौत के बाद घर में मातम पसरा है। उनक बड़े भाई का रो-रोकर बुरा हाल है। हामिद की पत्नी भी पेशावर के एक कॉलेज में लेक्चरर हैं और छोटा भाई सऊदी अरब में नौकरी करता है। आज हामिद की बहादुरी पर हर किसी को नाज है।
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