इस्लामाबाद: पाकिस्तान ने मंगलवार को अफगानिस्तान में लंबे समय से चल रहे सैन्य संघर्ष के हल के लिए सैन्य कार्रवाई के विकल्प का विरोध करते हुए कहा कि इस नीति का बीते 14 वर्षो से कोई परिणाम नहीं मिला है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज की यह टिप्पणी अफगानिस्तान के राष्ट्रपति अशरफ गनी के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है जिसमें उन्होंने पाकिस्तान में रहने वाले अफगान तालिबान नेताओं के खिलाफ सैन्य कार्रवाई करने को कहा था।
बीती 25 अप्रैल को गनी ने संसद में कहा था कि अफगानिस्तान उम्मीद नहीं करता है कि पाकिस्तान, तालिबान को वार्ता की मेज पर लाएगा। अफगानिस्तान का ऐसा कहना उसकी पहले की नीति में बड़ा बदलाव है। अजीज ने इस्लामाबाद में कहा कि वार्ता अब भी व्यवहार्य विकल्प है। उन्होंने कहा, "अफगानिस्तान इस बात पर जोर दे रहा है कि अगर शांति वार्ता शुरू नहीं होती है तो अन्य विकल्प का इस्तेमाल करना चाहिए। लेकिन, उस विकल्प का विगत 14 वर्षो से इस्तेमाल हो रहा है और कोई परिणाम नहीं मिला है।"
अजीज ने संवाददाताओं से कहा, "परिणाम सप्ताहों में हासिल नहीं होते, इसमें समय लगता है। अफगानिस्तान में शांति लाने के लिए मैं कोई और विकल्प नहीं देखता हूं।" उन्होंने ये बातें 'परमाणु अप्रसार के लिए पाकिस्तान के प्रयास एवं रणनीतिक निर्यात नियंत्रण प्रणाली' पर आयोजित एक संगोष्ठी में कही। उन्होंने इस बात की पुष्टि की कि तालिबान के राजनीतिक वार्ताकारों ने पाकिस्तान का दौरा किया था। उन्होंने कहा कि शांति वार्ता के लिए चार देशों के समूह के सदस्य देश भी कतर में तालिबान कार्यालय के संपर्क में थे। अफगानिस्तान में शांति और समझौते के लिए अफगानिस्तान, पाकिस्तान, चीन और अमेरिका ने गत साल दिसंबर में सामूहिक प्रक्रिया शुरू की थी। तालिबान ने अफगानिस्तान सरकार से सीधी बातचीत करने मना किया हुआ है।