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ताइवान की नई राष्ट्रपति ने नहीं किया चीन सिद्धांत का जिक्र

 Written By: India TV News Desk
 Published : May 20, 2016 06:39 pm IST,  Updated : May 20, 2016 06:39 pm IST

साई इंग वेन ने ताइवान की नई राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की।

साई इंग वेन- India TV Hindi
साई इंग वेन

ताइपे: साई इंग वेन ने ताइवान की नई राष्ट्रपति के रूप में शपथ ग्रहण की। शपथ ग्रहण करने के बाद उन्होंने अपने भाषण में चीन के साथ संबंधों के पेचीदा मुद्दे पर सावधानीपूर्वक कदम रखने की बात कही। उन्होंने बीजिंग के लिए एक चीन का सिद्धांत मूलभूत होने का जिक्र किए बगैर दोनों देशों के बीच दो दशकों से बढ़ते संबंधों का जिक्र किया। साई ने अपने भाषण में कहा कि वह संयुक्त स्वीकारोक्ति और सहमति का सम्मान करती हैं जिस पर 1992 के ऐतिहासिक बैठक के दौरान दोनों के बीच सहमति बनी थी।

हालांकि, साई ने इस अवधारणा का स्पष्ट उल्लेख नहीं किया कि ताईवान चीन का हिस्सा है। बीजिंग इस स्वशासित द्वीप के अपना क्षेत्र होने का दावा करता है और कहता रहा है कि एक चीन के सिद्धांत से संबंध अस्थिर होंगे। बीजिंग में कैबिनेट के ताईवान मामलों के कार्यालय ने एक बयान जारी कर 1992 की बैठक का साई द्वारा हवाला दिए जाने का जिक्र किया लेकिन कहा कि उन्होंने दोनों पक्षों के बीच संबंधों की प्रकृति पर एक अस्पष्ट रूख अख्तियार किया है।

कार्यालय ने कहा कि एक चीन के सिद्धांत को स्पष्ट रूप से मंजूर करने में उनके नाकाम रहने ने सवाल का जवाब अनुत्तरित छोड़ा है। साई के भाषण के पांच घंटे बाद बयान जारी किया गया। इसमें ताईवान की औपचारिक स्वतंत्रता के प्रति चीन के अडि़यल विरोध की भी बात दोहराई गई है। इसमें कहा गया है कि वे निश्चित रूप से ताईवानी स्वतंत्रता की अलगाववादी गतिविधियों को रोकेंगे।

साई ने अपने भाषण में ताइपे और बीजिंग से इतिहास की बातों को पीछे छोड़ देने और सकारात्मक वार्ता करने की अपील की ताकि दोनों ओर के लोगों को फायदा हो सके। उन्होंने कहा कि उनका प्रशासन दोनों ओर शांति एवं स्थिरता कायम करने पर काम करेगा। हालांकि उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों की वार्ता में ताईवान की लोकतांत्रिक प्रणाली और 2. 3 करोड़ लोगों की इच्छा का सम्मान किया जाएगा।

साई की नेशनलिस्ट पार्टी सरकार के पूर्वाधिकारी मा यिंग जियू ने बार बार एक चीन सिद्धांत और 92 कंसेंसस का जिक्र किया है तथा कहा कि दोनों पक्षों के बीच कई सारे आर्थिक और असैन्य समझौते हुए हैं। चीन कहता रहा है कि ताईवान को अवश्य ही मुख्य भूमि से एकीकृत होना होगा, जरूरत पड़ी तो इसके लिए बल प्रयोग किया जाएगा। राष्ट्रवादी एकीकरण का समर्थन करते हैं जबकि साई की डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव पार्टी ताईवान को औपचारिक रूप से एक स्वतंत्र राष्ट्र के रूप में स्थापित करने की हिमायत करती है।

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