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Earthquake: भूकंप के झटके से हिला भारत का पड़ोसी देश, इतनी रही तीव्रता

 Edited By: Malaika Imam @MalaikaImam1
 Published : May 25, 2025 08:40 am IST,  Updated : May 25, 2025 09:00 am IST

भारत के पड़ोसी देश अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भूकंप का केंद्र 36.26 उत्तरी अक्षांश और 69.74 पूर्वी देशांतर पर 135 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।

प्रतीकात्मक फोटो- India TV Hindi
प्रतीकात्मक फोटो Image Source : REPRESENTATIVE IMAGE

Earthquake News: अफगानिस्तान में भूकंप के झटके महसूस किए गए। भारतीय समयानुसार रविवार सुबह 06:33:39 बजे अफगानिस्तान में 4.2 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र 36.26 उत्तरी अक्षांश और 69.74 पूर्वी देशांतर पर, 135 किलोमीटर की गहराई में स्थित था।

नेपाल में भूकंप के दो झटके आए

इससे पहले पश्चिम नेपाल में गुरुवार देर रात कम तीव्रता के दो भूकंप आए। कंप निगरानी केंद्र के अनुसार, स्थानीय समयानुसार रात एक बज कर 48 मिनट पर 5.1 तीव्रता का भूकंप आया, जिसका केंद्र बैताडी जिले के खलंगा में था। भूकंप के बाद रात दो बजे (स्थानीय समयानुसार) 3.7 तीव्रता का दूसरा झटका आया। लगातार दो झटकों के बाद स्थानीय निवासी घबरा गए और अपने घरों से बाहर निकल आए। पड़ोसी दारचुला, बझांग और दादेलधुरा जिलों में भी झटके महसूस किए गए।

नेपाल में 4.7 तीव्रता का भूकंप

वहीं, पश्चिमी नेपाल के कास्की जिले में मंगलवार दोपहर को 4.7 तीव्रता का भूकंप महसूस किया गया। राष्ट्रीय भूकंप निगरानी एवं अनुसंधान केंद्र के अनुसार, भूकंप का केंद्र काठमांडू से करीब 250 किलोमीटर दूर कास्की जिले के सिनुवा क्षेत्र में था, जो अपराह्न 1.59 बजे दर्ज किया गया। भूकंप के झटके पड़ोसी जिलों तनहु, पर्वत और बागलुंग में भी महसूस किए गए। इससे पहले 14 मई को पूर्वी नेपाल के सोलुकुंभू जिले के छेस्कम क्षेत्र में 4.6 तीव्रता का भूकंप आया था।

कब आता है भूकंप?

भूकंप (Earthquake) आने की मुख्य वजह भूगर्भीय प्लेटों की गतिशीलता और आपसी टकराव होते हैं। धरती की बाहरी सतह सात बड़ी और कई छोटी टेक्टोनिक प्लेटों से बनी होती है। ये प्लेटें निरंतर गति में रहती हैं। जब ये प्लेटें आपस में टकराती हैं, खिसकती हैं या एक-दूसरे के नीचे चली जाती हैं, तो उस ऊर्जा का निकास भूकंप के रूप में होता है। प्लेटों के किनारे या फॉल्ट लाइनों में समय के साथ तनाव इकट्ठा होता है। जब यह तनाव एक सीमा से अधिक हो जाता है, तो चट्टानें टूटती हैं और अचानक ऊर्जा मुक्त होती है, जिससे भूकंप आता है।

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