दुबई: एमनेस्टी इंटरनेशनल की ओर से सऊदी अरब को लेकर बड़ी जानकारी साझा की गई है। एमनेस्टी इंटरनेशनल ने सोमवार को कहा कि सऊदी अरब में पिछले साल मृत्युदंड के मामलों में रिकॉर्ड वृद्धि हुई है। इनमें से अधिकतर मामले मादक पदार्थों से संबंधित हैं। सऊदी अरब में पिछले साल 345 लोगों को मौत की सजा दी गई थी। एमनेस्टी के अनुसार तीन दशकों से ज्यादा समय में यह सबसे बड़ी संख्या है। समूह ने कहा कि इस साल के पहले छह महीनों में ही 180 लोगों को मौत की सजा दी जा चुकी गई है जिससे संकेत मिलता है कि यह रिकॉर्ड फिर से टूट सकता है।
मादक पदार्थ से जुड़े हैं मामले
कार्यकर्ता समूह रिप्रीव ने बताया कि इस साल जिन लोगों को फांसी दी गई, उनमें से करीब दो तिहाई को मादक पदार्थ से जुड़े मामलों में दोषी ठहराया गया था। एमनेस्टी ने भी मादक पदार्थ के मामलों में फांसी दिए जाने के बारे में इसी तरह की चिंता जताई है। सऊदी अरब ने इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है कि देश में मौत की सजा में क्यों बढ़ोतरी हो रही है।
सऊदी अधिकारियों ने नहीं दिया जवाब
सऊदी अधिकारियों ने फांसी की सजा और मादक पदार्थ के मामलों में मृत्युदंड का इस्तेमाल क्यों किया जा रहा है, इस बारे में ‘एसोसिएटेड प्रेस’ के विस्तृत सवालों का जवाब नहीं दिया। हालांकि, यह सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की टिप्पणियों के विपरीत है, जिन्होंने 2022 में इस बात को रेखांकित किया था कि उन्होंने इसका इस्तेमाल केवल हत्या के मामलों तक सीमित कर दिया है। सऊदी अरब मध्य पूर्व के उन देशों में से एक है, जहां मादक पदार्थ से संबंधित आरोपों पर मौत की सजा दी जा सकती है। इनमें ईरान, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात भी शामिल हैं। मृत्युदंड के मामले में चीन और ईरान के बाद सऊदी का स्थान है।

ना कानून की जानकारी, ना अधिकारों के बारे में पता
एमनेस्टी ने 25 विदेशी नागरिकों के मामलों का दस्तावेजीकरण किया है जो वर्तमान में मृत्युदंड का सामना कर रहे हैं, या जिन्हें हाल में मादक पदार्थ से संबंधित अपराधों के लिए फांसी दी गई थी। एमनेस्टी ने कहा कि उन मामलों में मृत्युदंड की सजा पर कैदियों को ना तो कानूनी प्रणाली की जानकारी थी और ना ही उनके अधिकारों की, और उनके पास कोई कानूनी प्रतिनिधित्व नहीं था। एमनेस्टी ने कहा कि निष्पक्ष सुनवाई सुनिश्चित करने की कोशिश करते समय विदेशी नागरिकों को अतिरिक्त चुनौतियों का सामना करना पड़ा।
आधे से ज्यादा है विदेशी नागरिकों की संख्या
रिप्रीव के अनुसार, इस साल देश में जिन लोगों को फांसी दी गई, उनमें से आधे से ज्यादा विदेशी नागरिक थे। ऐसे ही मामले में, मिस्र के एसाम अहमद, 2021 में सिनाई में मछली पकड़ने वाली नौका पर काम करते समय गायब हो गए थे। एक महीने बाद, अहमद के परिवार को खबर मिली कि उन्हें सऊदी अरब में हिरासत में लिया गया है और मादक पदार्थों की तस्करी के लिए मौत की सजा सुनाई गई है। अहमद का दावा है कि नौका के मालिक ने उन्हें बंदूक के बल पर उनके लिए एक पैकेज ले जाने को मजबूर किया था। (एपी)
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