1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा! इजरायल में संसदीय चुनावों के लिए वोटिंग जारी, गठबंधन की संभावनाओं पर टिकी सियासी निगाहें

नेतन्याहू की अग्निपरीक्षा! इजरायल में संसदीय चुनावों के लिए वोटिंग जारी, गठबंधन की संभावनाओं पर टिकी सियासी निगाहें

 Written By: Niraj Kumar
 Published : Oct 27, 2026 12:01 pm IST,  Updated : Oct 27, 2026 12:17 pm IST

इजरायल में प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य और गठबंधन के समीकरणों के बीच संसदीय चुनाव के लिए मतदान जारी है। इस चुनाव में सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि क्या नेतन्याहू सत्ता बरकरार रख पाएंगे या विपक्ष सरकार बनाने में सफल होगा।

Benjamin netanyahu- India TV Hindi
बेंजामिन नेतन्याहू Image Source : AP

यरुशलम: इजरायल में आज संसदीय चुनावों के लिए मतदान हो रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के राजनीतिक भविष्य और गठबंधन के समीकरणों को लेकर अनिश्चितता के बीच यह चुनाव हो रहा है। नेतन्याहू सात अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले से निपटने के उनकी सरकार के तरीके, उसके बाद शुरू हुए युद्धों और अपनी घरेलू एवं विदेश नीतियों को लेकर जारी बहस के बीच सत्ता बरकरार रखने की कोशिश कर रहे हैं। इस चुनाव को व्यापक तौर पर नेतन्याहू के नेतृत्व की अग्निपरीक्षा के तौर पर देखा जा रहा है। पूर्व सेना प्रमुख गादी ईसेनकोट और पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट सहित विपक्षी नेता उनके दक्षिणपंथी गठबंधन को चुनौती दे रहे हैं।

वोटिंग से पहले के सर्वे में किसी भी राजनीतिक गुट को स्पष्ट बहुमत मिलने के संकेत नहीं मिल रहे हैं। मतदान से पहले हुए सर्वेक्षणों में किसी भी राजनीतिक खेमे को सरकार बनाने के लिए आवश्यक बहुमत मिलने के स्पष्ट संकेत नहीं मिले हैं। भारत के पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम के लगभग बराबर क्षेत्रफल वाले इजराइल में पूरे देश को एक ही निर्वाचन क्षेत्र माना जाता है। 

इजरायल में कैसे होते हैं चुनाव?

यहां 120 सदस्यीय संसद 'नेसेट' के चुनाव के लिए आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली अपनाई जाती है। मतदाता सीधे किसी उम्मीदवार को नहीं, बल्कि अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को वोट देते हैं। संसद में प्रवेश के लिए किसी दल को कम से कम 3.25 प्रतिशत वोट हासिल करना अनिवार्य है। यही वजह है कि चुनाव से पहले दलों के बीच गठबंधन और विलय की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। इजराइल की संसद का कार्यकाल चार साल का होता है। हालांकि, संसद के समय से पहले भंग होने, बजट पारित नहीं होने या सरकार का गठन न हो पाने की स्थिति में निर्धारित समय से पहले भी चुनाव कराए जा सकते हैं। सबसे अधिक सीट जीतने वाली पार्टी अपने आप सरकार नहीं बना लेती। चुनाव के बाद राष्ट्रपति विभिन्न राजनीतिक दलों और गुटों से परामर्श करके सरकार बनाने के लिए किसी एक सांसद को नामित करते हैं। सरकार बनाने के लिए उसे कम से कम 61 सांसदों का समर्थन हासिल करना होता है। दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता नेतन्याहू 1996 के बाद से तीन अलग-अलग अवधियों में लगभग 19 साल तक प्रधानमंत्री रह चुके हैं। 

नेतन्याहू के सामने क्या है चुनौती?

दक्षिणपंथी लिकुड पार्टी के नेता बेंजामिन नेतन्याहू 1996 के बाद से अलग-अलग अवधियों में लगभग 19 साल तक इजराइल के प्रधानमंत्री रह चुके हैं। सात अक्टूबर, 2023 को हमास के हमले और उसके बाद शुरू हुए सैन्य अभियानों से निपटने के तरीके को लेकर उनकी सरकार की आलोचना होती रही है। इसके अलावा, नेतन्याहू धोखाधड़ी, विश्वासघात और रिश्वतखोरी के आरोपों का भी सामना कर रहे हैं। हालांकि, खुद नेतन्याहू इन आरोपों से इनकार करते रहे हैं। कथित युद्ध अपराधों और मानवता के खिलाफ अपराधों के मामले में अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) ने 2024 में उनके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट भी जारी किया था। 

इजरायल की सेना के पूर्व प्रमुख ईसेनकोट मध्यमार्गी 'याशर' पार्टी का नेतृत्व कर रहे हैं और नेतन्याहू के प्रमुख प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरे हैं। उन्होंने ''सरकार के पास युद्ध को लेकर स्पष्ट रणनीति नहीं होने'' की आलोचना करते हुए जून 2024 में युद्ध मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया था। सुरक्षा के मुद्दे पर कड़ा रुख रखते हुए उन्होंने खुद को शासन के मामले में एक विकल्प के रूप में पेश किया है। 

बेंजामिन नेतन्याहू का ट्रंप के साथ पोस्टर
Image Source : APबेंजामिन नेतन्याहू का ट्रंप के साथ पोस्टर

पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट 'बी-याचद' गठबंधन का नेतृत्व कर रहे हैं, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री याइर लापिड की 'येश अतिद' पार्टी भी शामिल है। बेनेट फलस्तीन की स्वतंत्रता के विरोधी हैं और कब्जे वाले पश्चिमी तट पर इजराइली बस्तियों के निर्माण का समर्थन करते हैं। हालांकि, उन्होंने भी सुरक्षा और शासन के मामलों में नेतन्याहू के कामकाज की आलोचना की है। 

61 सीट का बहुमत हासिल कर पाना आसान नहीं-सर्वे

मतदान से पहले हुए सर्वेक्षणों से संकेत मिलता है कि किसी भी राजनीतिक खेमे के लिए 61 सीट का बहुमत हासिल करना आसान नहीं होगा। ऐसे में चुनाव का अंतिम परिणाम काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगा कि छोटे दलों में से कौन 3.25 प्रतिशत मतों की अनिवार्य सीमा पार कर पाता है और मतदान के बाद किस तरह के नए गठबंधन बनते हैं।

इजरायल में आज हो रहे चुनाव पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं। हमास के नेतृत्व में 7 अक्टूबर 2023 को हुए हमलों के बाद देश में युद्ध और सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं। अब मतदाता तय करेंगे कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को एक और कार्यकाल दिया जाए या देश की राजनीति में बदलाव का रास्ता खोला जाए। चुनावी सर्वेक्षणों में नेतन्याहू की राष्ट्रवादी लिकुड पार्टी और उनके प्रमुख प्रतिद्वंद्वी गादी आइजेनकोट के नेतृत्व वाली मध्यमार्गी याशार! पार्टी के बीच कड़ी टक्कर के संकेत मिल रहे हैं।

ये भी पढ़ें:

PM मोदी और कैप्टन स्मित मच्छार को इजरायल से आया न्योता, नेतन्याहू ने स्वतंत्रता दिवस पर मशाल प्रज्वलित करने के लिए आमंत्रित किया

 

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश।