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ISRO चंद्रमा पर भेज रहा अंतरिक्ष यान, जानिए पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने अब तक क्या किया?

 Written By: Deepak Vyas @deepakvyas9826
 Published : Aug 21, 2023 05:53 pm IST,  Updated : Aug 21, 2023 06:32 pm IST

भारत की स्पेस एजेंसी के मुकाबले पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी कहां ठहरती है। पाक की स्पेस एजेंसी ने अब तक क्या क्या काम किया है? पढ़िए पूरी खबर।

ISRO चंद्रमा पर भेज रहा अंतरिक्ष यान, जानिए पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने अब तक क्या किया?- India TV Hindi
ISRO चंद्रमा पर भेज रहा अंतरिक्ष यान, जानिए पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी ने अब तक क्या किया? Image Source : SOCIAL MEDIA

ISRO and Pakistan: इंडियन स्पेस रिसर्च आर्गेनाइजेशन यानी इसरो का अंतरिक्ष यान भेजने का समृद्ध इतिहास रहा है, हाल ही में इसरो ने चंद्रमा के उस हिस्से पर चंद्रयान 3 भेजा है, जहां आज तक दुनिया का कोई अंतरिक्ष यान नहीं पहुंच सका है। चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर दो दिन बाद भारतीय चंद्रयान 3 की लैंडिंग है, जिस पर पूरी दुनिया की नजर है। सवाल यह उठता है कि हमारे पड़ोसी देश कंगाल पाकिस्तान में भी क्या कोई स्पेस एजेंसी है, यदि है तो उसने आज तक क्या क्या किया है? जानें खबर।

इसरो का चंद्रयान 3 चंद्रमा के साउथ पोल पर उतरने वाला है। ये चंद्रमा की ऐसी जगह है, जहां देश का कोई रोवर नहीं पहुंच पाया है। इसके आलावा भी भारत स्पेस के मामले में दुनिया के कुछ टॉप देशों में गिना जाता है। रूस का लुना 25 जरूर चंद्रमा के दक्षिण ध्रुव पर हमारे अंतरिक्ष यान से दो दिन पहले उतरने वाला था, पर अपनी तेजी और तकनीकी कारणों से चंद्रमा पर उतरने से पहले ही नष्ट हो गया। अब दुनिया की नजर हमारे अंतरिक्ष यान पर है। हालांकि इसरो ने इससे पहले भी कई बड़े बड़े अंतरिक्ष अभियान किए हैं, जिस कारण भारत की गिनती स्पेस रिसर्च के मामले में दुनिया के टॉप देशों में होती है। लेकिन पाकिस्तान भारत से इस मामले में कोसों पीछे है।

इसरो से 8 साल पहले शुरू हो गई थी पाकिस्तान की अंतरिक्ष एजेंसी

गौर करने वाली बात यह है कि कंगाल पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी हमसे 8 साल पहले यानी इसरो से भी 8 साल पहले शुरू हो गई थी। लेकिन राजनीतिक उथल पुथल, कमजोर इच्छाशक्ति, आतंक की फैक्टरी बनने की चाह में पाकिस्तान कंगाल होता चला गया और उसकी स्पेस एजेंसी भारत की इसरो से कोसों पीछे रह गई। 

कब बनी थी पाकिस्तान की स्पेस एजेंसी?

पाकिस्तान ने भारत से अलग होने के बाद कई ऐसी आधुनिक चीजें शुरू की जो भारत ने काफी वर्षों बाद शुरू की। हालांकि, इसके बाद भी आज पाकिस्तान आधुनिकता और स्पेस रिसर्च के मामले में भारत से बहुत दूर है। पाकिस्तान ने 16 सितंबर 1961 में 'स्पेस एंड अपर एटमॉसफेयर रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन' नाम से एक संस्था बनाई। यह इसरो से आठ साल पहले बनी थी, लेकिन अब स्पेस रिसर्च के मामले में कहीं नहीं टिकती। आज पाकिस्तान की हालत इतनी कंगाल है कि वह अंतरिक्ष यान भेजने के बारे में सोच भी नहीं सकता। अंतरिक्ष के क्षेत्र में जो भी थोड़ा बहुत काम किया है, उसमें पूरी तरह चीन का दखल रहा है।

पाकिस्तान ने अब तक कितने सैटेलाइट छोड़े?

  1. पाकिस्तान ने अब तक सिर्फ 5 सैटेलाइट ही छोड़े हैं। इनमें पहला 16 जुलाई 1990 को छोड़ा गया था। इसका नाम पाकिस्तान ने बद्र-1 रखा था। खास बात ये है कि यह एक आर्टिफिशियल डिजिटल उपग्रह था। हालांकि, ये सिर्फ 6 महीने ही चल सका था, इसके बाद इसने काम करना बंद कर दिया था।
  2. दूसरा सैटेलाइट पाकिस्तान ने बद्र-बी के नाम से 10 दिसंबर 2001 को छोड़ा था।
  3. तीसरे सैटेलाइट का नाम था, पाकात-1 जो पाकिस्तान ने 11 अगस्त 2011 को लॉन्च किया था। इस सैटेलाइट को लॉन्च करने के लिए पाकिस्तान ने चीन की मदद ली थी। साफ शब्दों में कहें तो इसे चीन ने ही बनाया था। 
  4. चौथे सैटेलाइट की बात करें तो उसे पाकिस्तान ने 21 नवंबर 2013 को लॉन्च किया था। इसका नाम ईक्यूब-1 था। पाकिस्तान की चौथी सैटेलाइट भी महज दो साल ही चली। 
  5. पांचवें सैटेलाइट की बात करें तो इसे भी पाकिस्तान ने चीन की मदद से अंतरिक्ष में भेजा था। ये 9 जुलाई 2018 को लॉन्च किया गया था। इसके बाद से पाकिस्तान ने कोई सैटेलाइट अंतरिक्ष में नहीं भेजा।

कंगाल हुआ देश, खाली है तिजोरी, पाक के लिए अंतरिक्ष कार्यक्रम सिर्फ कल्पना 

आज पाकिस्तान कंगाली की हालत में खड़ा है। पूरी दुनिया से कर्ज की भीख मांग रहा है। कभी कोई मुस्लिम देश उस पर तरस खाकर जरूर आर्थिक मदद कर देता है। लेकिन यह हकीकत है कि पाकिस्तान की तिजोरी खाली हो चुकी है। सरकारें कमजोर हैं, जो कड़े फैसले लेने में अक्षम हैं। आपस में लड़ने की पराकाष्ठा ऐसी कि अपदस्थ प्रधानमंत्री को जेल में डालने के लिए पूरा जोर शहबाज सरकार ने लगाया है। उधर, पाकिस्तान की आर्मी अपना वर्चस्व रखना चाहती है। ऐसे में पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व बंटा हुआ है। यही कारण है कि पाकिस्तान तरक्की की राह पर इतना पीछे चला गया है कि अब अंतरिक्ष कार्यक्रमों की कल्पना करना भी उसके लिए दूर की कौड़ी है। 

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