इसरो के वैज्ञानिक डॉक्टर एस. वेंकटेश्वर शर्मा PSLV-C62 की विफलता, EOS-N1 अन्वेषा उपग्रह के रणनीतिक महत्व और 2035 तक भारत अंतरिक्ष स्टेशन के लिए भारत की योजनाओं पर चर्चा की है।
ISRO द्वारा सोमवार को लॉन्च किए गए मिशन में तकनीकी गड़बड़ी की बात सामने आई है। जानकारी के मुताबिक, लॉन्चिंग के बाद थर्ड फेज के आखिरी में आई तकनीकी खामी के बाद यान तय रास्ते से भटक गया।
नए साल में भारत के ISRO ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में बड़ी छलांग लगाई। इसरो ने PSLV C-62 मिशन के तहत भारत के सैटेलाइट EOS-N1 को अंतरिक्ष में लॉन्च किया है। ये लॉन्चिंग सुबह करीब 10 बजकर 17 मिनट पर श्री हरिकोटा से की गई। हालांकि, इस मिशन में तकनीकी गड़बड़ी सामने आई।
ISRO नए साल 2026 के लिए अपना पहला लॉन्च सोमवार को करने जा रहा है। इस लॉन्च में गुजरात के अहमदाबाद के छात्रों द्वारा बनाया गया SanskarSat-1 सैटेलाइट भी शामिल होगा। आइए जानते हैं इस सैटेलाइट के बारे में विस्तार से।
ISRO ने साल 2026 के लिए अपने पहले लॉन्च की घोषणा कर दी है। इसरो ने बताया है कि वह आगामी 12 जनवरी की तारीख को अंतरिक्ष के लिए सैटेलाइट लॉन्च करेगा।
वर्ष 2024 तक भारत अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की तैयारी में है। भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसने अंतरिक्ष तकनीक का विकास सैन्य शक्ति के बजाय सामाजिक लाभ (संचार, मौसम पूर्वानुमान और शिक्षा) के लिए किया।
इसरो ने इस कम्यूनिकेशन सैटेलाइट को निर्धारित लॉन्चिंग टाइम से करीब डेढ़ मिनट की देरी से लॉन्च किया। अगर 90 सेकेंड की देरी नहीं होती तो इस मिशन में बड़ी बाधा आ सकती थी।
इसरो के मुताबिक 6100 किलोग्राम वजनी यह सैटेलाइट एलवीएम-3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी के लो-ऑर्बिट (LEO) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी पेलोड होगा।
इसरो ने बताया कि 6,100 किलोग्राम वजनी यह कम्यूनिकेशन सैटेलाइट एलवीएम3 के प्रक्षेपण इतिहास में पृथ्वी की निम्न कक्षा (एलईओ) में स्थापित किया जाने वाला अब तक सबसे भारी सैटेलाइट है।
ISRO ने गगनयान मिशन की तैयारी में बड़ी छलांग लगा दी है। उसने ड्रोग पैराशूट के अहम क्वालिफिकेशन टेस्ट को पूरा कर लिया है। यह सफलता देश के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन को भरोसेमंद और सुरक्षित बनाने की दिशा में निर्णायक कदम है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि आज का ये आयोजन साइंस से जुड़ा है लेकिन मैं सबसे पहले क्रिकेट में भारत की शानदार जीत की बात करूंगा।
ISRO ने भारतीय नौसेना के GSAT 7R (CMS-03) कम्युनिकेशन सैटेलाइट को लॉन्च कर दिया है। यह भारतीय नौसेना का अब तक का सबसे उन्नत संचार सैटेलाइट होगा। यह सैटेलाइट नौसेना की अंतरिक्ष-आधारित संचार और समुद्री क्षेत्र जागरूकता क्षमताओं को मज़बूत करेगा।
अंतरिक्ष एजेंसी ने बताया कि लगभग 4,410 किलोग्राम वज़नी यह उपग्रह भारतीय धरती से भू-समकालिक स्थानांतरण कक्षा (जीटीओ) में प्रक्षेपित होने वाला सबसे भारी उपग्रह होगा।
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने घोषणा की कि भारत 2040 तक चांद पर मानव भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ISRO चीफ के मुताबिक, 2027 में 'गगनयान' मिशन की शुरुआत होगी, और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तैयार हो जाएगा।
आपको बता दें कि महाराष्ट्र सरकार हर साल 51 छात्रों को विद्यार्थी विज्ञान वारी योजना के तहत नासा भेजने की योजना बना रही है। आइए आपको इस योजना के बारे में विस्तार से बताते हैं।
भारत और अमेरिका ने टैरिफ विवाद के बावजूद चंद्रमा और मंगल मिशन में दोस्ती का नया उदाहरण पेश किया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों ने अंतरिक्ष में साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम उठाया है।
ISRO के सेमीकंडक्टर लैब में बनाया गया विक्रम चिप का पूरा निर्माण भारत में ही हुआ है। ये चिप स्पेस लॉन्च व्हीकल्स की एक्सट्रीम कंडीशन्स में इस्तेमाल करने के लिए पूरी तरह से योग्य है।
चंद्रयान-5 मिशन में एक अधिक परिष्कृत लैंडर और रोवर भेजा जा सकता है, जो पहले से ज्यादा उन्नत उपकरणों से लैस होंगे और चंद्रमा पर अधिक समय तक कार्य करने में सक्षम होंगे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रयान-5 को एक सैंपल रिटर्न मिशन के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।
भारत और रूस के बीच अंतरिक्ष क्षेत्र में चल रहा सहयोग न केवल दोनों देशों की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ा रहा है, बल्कि भविष्य में मानवता के लिए नए आयाम खोलने की दिशा में भी एक मजबूत कदम है। अब दोनों देश मिलकर अंतरिक्ष के क्षेत्र में नई सफलताओं और उपलब्धियों की ओर बढ़ रहे हैं।
देश में आज राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है। इस बार दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मनाया जा रहा है। आइये जानते हैं कि राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस क्यों मनाते हैं और इसे मनाने का उद्देश्य क्या है?
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