Thursday, February 05, 2026
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सूर्य के रौद्र रूप से खतरे में भारत, ISRO ने भीषण रेडियो ब्लैकआउट की चेतावनी जारी की, जानें क्या है वजह

सूर्य में बड़ी हलचल हो रही है, लगातार 27 सौर तूफान आए हैं, जिसने नासा से लेकर इसरो तक की चिंता बढ़ा दी है। इसरो ने भीषण ब्लैकआउट की चेतनावनी जारी की है। जानिए क्या होते हैं सोलर फ्लेयर्स?

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published : Feb 05, 2026 02:31 pm IST, Updated : Feb 05, 2026 02:50 pm IST
सूर्य में हलचल से बढ़ी चिंता- India TV Hindi
Image Source : NASA सूर्य में हलचल से बढ़ी चिंता

सूर्य के अंदर अभी तेज हलचल मची है, जिसने वैज्ञानिकों को चिंतित कर दिया है। इसकी वजह है सौर तूफान, जिसके कारण लगातार सोलर फ्लेयर्स रिलीज हो रहे हैं, जो धरती तक पहुंच रहे हैं। एक फरवरी से सूर्य लगातार पावरफुल सोलर फ्लेयर्स छोड़ रहा है। इसरो से लेकर नासा ने इसे लेकर चेतावनी जारी की है और कहा है कि भारत सहित दुनिया भर में रेडियो ब्लैकआउट या पावरग्रिड फेल होने की संभावना है।सोलर फ्लेयर्स सूर्य के अंदर होने वाले विस्फोटों की वजह से होते हैं और ये सोलर फ्लेयर्स चुंबकीय गुणों से भरे होते हैं, इन्हें सौर तूफान भी कहा जाता है।

सौर तूफान

Image Source : NASA
सौर तूफान

 

क्या होता है सौर तूफान

वैज्ञानिकों का मानना है कि 5 फरवरी को धरती पर भू-चुंबकीय गतिविधि बढ़ सकती है और इसके कारण सामान्य इलाकों में भी नॉर्दर्न लाइट्स यानी ऑरोरा दिखाई दे सकते हैं। सूर्य पर आने वाले सौर तूफान जब पृथ्वी के वातावरण में टकराते हैं तो हलचल पैदा करते हैं। इस तरह के सोलर फ्लेयर्स से इलेक्ट्रोमैग्नेटिक रेडिएशन की बहुत ज्यादा मात्रा निकलती है, जो लगभग तुरंत पृथ्वी तक पहुंच जाती है। इसकी वजह से भारत की इसरो सहित दुनिया भर की अंतरिक्ष एजेंसियों ने चेतावनी जारी की है।

इसरो ने जारी किया है अलर्ट

इसरो संभावित रेडियो ब्लैकआउट की स्थिति पर कड़ी नजर रख रहा है। बता दें कि तीव्र सौर तूफान, जब पृथ्वी की ओर बढ़ते हैं, तो उपग्रहों को नुकसान पहुंचाते हैं, टेलीविजन संकेतों को बाधित करते हैं और रडार तथा बिजली ग्रिड को प्रभावित करते हैं। नासा के स्पेस अलर्ट ने पुष्टि की है कि तेज फ्लेयर्स एक फरवरी को शुरू हुए थे। नासा ने अपने लेटेस्ट अलर्ट में कहा कि सूरज ने एक तेज फ्लेयर छोड़ा है, जो 4 फरवरी को सुबह 7.13 बजे (अमेरिकी समयानुसार) अपने चरम पर था।

इसरो के अधिकारियों ने पुष्टि की है कि 50 से अधिक कार्यरत भारतीय उपग्रहों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है क्योंकि सौर गतिविधि में वृद्धि से संचार, नेविगेशन और उपग्रह पेलोड में व्यवधान उत्पन्न होने का खतरा है। इसरो ने बताया है कि, "रेडियो ब्लैकआउट की प्रबल संभावना है। इसरो के सभी उपग्रहों की बहुत बारीकी से निगरानी की जा रही है। इससे संचार बाधित होने की किसी भी स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जाएगी।"

सूर्य ने क्यों धरा है रौद्र रूप

सूर्य में वर्तमान अशांति की शुरुआत चुंबकीय रूप से जटिल सूर्य धब्बों के समूह, जिसे सक्रिय क्षेत्र 14366 के नाम से जाना जाता है, के अचानक तीव्र होने से हुई। पिछले कुछ दिनों में, इस क्षेत्र में बार-बार विस्फोट हुए, जिससे चार अत्यंत शक्तिशाली सोलर फ्लेयर्स उत्पन्न हुईं, जिनमें एक X8.1 श्रेणी की ज्वाला भी शामिल है - जो 2026 की अब तक की सबसे शक्तिशाली ज्वाला है। उन्होंने बताया कि ग्राउंड स्टेशनों ने मिशन कंट्रोल सेंटरों को पहले ही अलर्ट जारी कर दिए गए हैं और किसी भी गड़बड़ी की स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए आकस्मिक योजनाएं तैयार हैं।

सौर तूफान का अलर्ट जारी

Image Source : NASA
सौर तूफान का अलर्ट जारी

भारत के आदित्य-एल1 है पूरी तरह एक्टिव

भारत की पहली समर्पित सौर वेधशाला, आदित्य-एल1, अब इस सक्रिय तूफान की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। पृथ्वी से लगभग 15 लाख किलोमीटर दूर, पृथ्वी-सूर्य एल1 लैग्रेंज बिंदु पर स्थित, आदित्य-एल1 भारत को सौर विस्फोटों के प्रभावों के हमारे ग्रह तक पहुंचने से पहले ही उनका प्रत्यक्ष अवलोकन प्रदान करता है। आदित्य-एल1 से प्राप्त डेटा वैज्ञानिकों को सौर विकिरण, चुंबकीय क्षेत्र और ऊर्जावान कणों को वास्तविक समय में मापने में मदद कर रहा है, जिससे इसरो को समय रहते चेतावनी जारी करने और महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अवसंरचना की सुरक्षा करने में सहायता मिल रही है।

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