Thursday, January 08, 2026
Advertisement
  1. Hindi News
  2. गुजरात
  3. चांद पर बड़े मिशन की तैयारी! 2040 तक अंतरिक्ष यात्री भेजेगा भारत, क्या है फ्यूचर प्लान? जानें

चांद पर बड़े मिशन की तैयारी! 2040 तक अंतरिक्ष यात्री भेजेगा भारत, क्या है फ्यूचर प्लान? जानें

वर्ष 2024 तक भारत अंतरिक्ष में मानव मिशन भेजने की तैयारी में है। भारत दुनिया का इकलौता ऐसा देश है जिसने अंतरिक्ष तकनीक का विकास सैन्य शक्ति के बजाय सामाजिक लाभ (संचार, मौसम पूर्वानुमान और शिक्षा) के लिए किया।

Edited By: Niraj Kumar @nirajkavikumar1
Published : Jan 07, 2026 06:39 pm IST, Updated : Jan 07, 2026 06:39 pm IST
ISRO- India TV Hindi
Image Source : PTI/ X@ISRO इसरो चांद पर भेजेगा मानव मिशन

अहमदाबाद: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के पूर्व प्रमुख ए एस किरण कुमार ने भारत के भविष्य के अंतरिक्ष रोडमैप को लेकर बड़ी घोषणा की है। उन्होंने बताया कि भारत न केवल चंद्रमा पर मानव भेजने की तैयारी कर रहा है, बल्कि अंतरिक्ष में अपना स्थायी ठिकाना बनाने की दिशा में भी अग्रसर है। वर्तमान में भौतिक अनुसंधान प्रयोगशाला (पीआरएल) की प्रबंधन परिषद के अध्यक्ष कुमार एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी ऑफ इंडिया (एएसआई) के 5वें सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में बोल रहे थे। 

2040 तक कई मिशन चलाएगा भारत

उन्होंने कहा, ‘‘अब से लेकर 2040 तक अंतरिक्ष गतिविधियों में कई मिशन चलाए जाने वाले हैं। 2040 तक ISRO की योजना भारतीयों को चंद्रमा पर भेजने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने की है। भारत 2040 तक एक अंतरिक्ष स्टेशन बनाने की दिशा में भी काम कर रहा है।’’

पीआरएल परिसर में आयोजित कार्यक्रम के इतर मीडिया से बातचीत में ISRO के पूर्व प्रमुख ने देश के स्पेस रिसर्च के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में चंद्रयान से जुड़ा एक मिशन होगा और जापान के साथ लैंडर और रोवर पर काम चल रहा है। कुमार ने कहा, ‘‘हमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में कुछ विशिष्ट जानकारी खोजने का प्रयास करना चाहिए। यह तो आगे की गतिविधियों की बस, शुरुआत होगी।’’ 

भविष्य के बड़े लक्ष्य

  1. भारत की योजना साल 2040 तक अपने अंतरिक्ष यात्रियों को चंद्रमा की सतह पर उतारने और उन्हें सुरक्षित पृथ्वी पर वापस लाने की है।
  2. चंद्रमा मिशन के साथ-साथ भारत 2040 तक अपना स्वयं का अंतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है।
  3. निकट भविष्य में जापान के साथ मिलकर एक साझा मिशन शुरू किया जाएगा, जिसमें चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव (South Pole) की विशिष्ट जानकारी जुटाने के लिए उन्नत लैंडर और रोवर भेजे जाएंगे।

सामाजिक लाभ हासिल करना मुख्य उद्देश्य

किरण कुमार ने कहा कि शैक्षणिक संस्थानों, इंजीनियरिंग संस्थानों और प्राइवेट कंपनियों के लिए भी भारत के स्पेस रिसर्च में योगदान देने के कई अवसर खुलेंगे। उद्घाटन सत्र के दौरान वैज्ञानिकों और छात्रों की मौजूदगी में अपने संबोधन में किरण कुमार ने कहा कि भारत एकमात्र ऐसा देश है जिसने स्पेस टेक्नोलॉजी का निर्माण मुख्य रूप से सामाजिक लाभ के लिए शुरू किया, न कि सैन्य उद्देश्यों के लिए। 

किरण कुमार ने  जब भारत को आजादी मिले मात्र 10 वर्ष ही हुए थे, तब अंतरिक्ष क्षेत्र में डॉ.विक्रम साराभाई ने अभूतपूर्व योगदान दिया। उन्होंने बताया कि साराभाई ने इस बात का पता लगाया कि स्पेस टेक्नोलॉजी किस प्रकार प्रसारण संचार और मौसम निगरानी में सुधार कर नागरिकों को सुविधाएं प्रदान कर सकती है। तीन दिवसीय सम्मेलन खगोल विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, ग्रहीय विज्ञान, वायुमंडलीय विज्ञान और क्वांटम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी सहित उभरते क्षेत्रों में प्रकाशिकी और उन्नत उपकरणों की महत्वपूर्ण भूमिका पर केंद्रित है। 

Google पर इंडिया टीवी को अपना पसंदीदा न्यूज सोर्स बनाने के लिए यहां
क्लिक करें

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। गुजरात से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें।

Advertisement
Advertisement
Advertisement