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आंखों के लिए बड़ा खतरा पैदा कर रही है ड्राई आईज की समस्या, इससे कैसे बचें और क्या है आंखों के सूखने का इलाज

 Written By: Bharti Singh @bhartinisheeth
 Published : Jan 08, 2026 06:30 am IST,  Updated : Jan 08, 2026 06:30 am IST

Dry Eyes Treatment: लगातार कंप्यूटर पर काम करने और फोन देखने की वजह से ड्राई आईज की समस्या काफी बढ़ गई है। लंबे समय तक ड्राई आईज होने पर आंखों से जुड़ी बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। जानिए इससे बचने के तरीके और सही इलाज।

ड्राई आईज - India TV Hindi
ड्राई आईज Image Source : FREEPIK

आज के डिजिटल युग में आंखों की सेहत लगातार खतरे में है। मोबाइल, लैपटॉप और अन्य डिजिटल स्क्रीन पर बढ़ता समय, वायु प्रदूषण, एयर कंडीशनिंग, हार्मोनल बदलाव, तनाव और कुछ दवाओं का सेवन ड्राई आई की समस्या को बढ़ा रहे हैं। डाई आई डिज़ीज़ आज की सबसे आम आंखों की समस्याओं में से एक बन चुकी है। जो पहले हल्की जलन या असहजता मानी जाती थी लेकिन अब ये एक क्रॉनिक लाइफस्टाइल डिसऑर्डर का रूप ले चुकी है। जिससे न सिर्फ देखने में परेशानी होती है बल्कि आपकी लाइफ पर भी इसका असर होता है।

ड्राई आई के लक्षण

ड्राई आई की एक बड़ी वजह होती है मीबोमियन ग्लैंड्स की खराबी। ये ग्रंथियां आंसुओं की तैलीय परत बनाती हैं, जो आंखों को सूखने से बचाती है। जब ये ग्रंथियां बंद हो जाती हैं या सही तरीके से काम नहीं करतीं, तो आंसू जल्दी सूख जाते हैं। इससे आंखों में जलन, लालिमा, चुभन, रेत जैसा एहसास, धुंधला दिखना, आंखों की थकान और सिरदर्द जैसी समस्याएं होती हैं। आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स केवल थोड़ी देर की राहत देती हैं, लेकिन ग्रंथियों को दोबारा एक्टिव नहीं कर पातीं।

ड्राई आईज का इलाज

डॉक्टर पारुल सोनी (फाउंडर एंव डायरेक्टर, कम्प्लीट आई केयर) ने बताया कि ड्राई आई रोग की गंभीरता को समझते हुए, लुमेक्का IPL और फोर्मा-I जैसी अत्याधुनिक तकनीकों ने इसके इलाज के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। ट्रैडिशनल ट्रीटमेंट जहां सिर्फ लक्षणों से अस्थायी राहत देते हैं, वहीं ये नई तकनीकें समस्या की जड़ पर काम करती हैं, जिससे मरीजों को लंबे समय तक राहत मिलती है।

लुमेक्का IPL (इंटेंस पल्स्ड लाइट) तकनीक पलकों और आंखों के आसपास नियंत्रित प्रकाश ऊर्जा पहुंचाती है। इससे सूजन कम होती है, रक्त संचार बेहतर होता है और उन असामान्य रक्त वाहिकाओं पर असर पड़ता है जो क्रॉनिक ड्राई आई को बढ़ाती हैं। यह पलक किनारों पर मौजूद बैक्टीरिया और सूजन को भी कम करती है, जिससे मीबोमियन ग्रंथियों के लिए स्वस्थ वातावरण बनता है। यह तकनीक USFDA-अप्रूव्ड है और मध्यम से गंभीर ड्राई आई के मामलों में अत्यंत प्रभावी पाई गई है।

आंखों की नमी को कैसे बरकरार रखें?

वहीं फोर्मा-I तकनीक रेडियोफ्रीक्वेंसी बेस्ड कंट्रोल हीट थेरेपी का उपयोग करती है। यह पलकों को हल्की गर्माहट देती है, जिससे ग्रंथियों में जमी हुई गाढ़ी चिकनाई पिघलकर बाहर निकल पाती है। इससे आंसुओं की गुणवत्ता बेहतर होती है और आंखों में नमी लंबे समय तक बनी रहती है।

ड्राई आईज के लिए आई-स्पा 

इन दोनों तकनीकों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये नॉन-इनवेसिव, दर्दरहित और बिना किसी डाउनटाइम के की जाती हैं। ये ओपीडी प्रक्रियाएं हैं और मरीज तुरंत अपनी डेली लाइफस्टाइल में वापस लौट सकता है। कुछ सेशन्स के बाद ही ज्यादातर मरीजों को आंखों में आराम, आई ड्रॉप्स पर निर्भरता में कमी और दिखने में सहजता महसूस होने लगती है। ड्राई आई के लिए आई-स्पा कॉन्सेप्ट भी लोग अपना रहे हैं। इसमें पलकों की गहरी सफाई, जमा हुए बैक्टीरिया और गंदगी को हटाना और आंसू बनाए रखने वाली थेरेपी शामिल होती हैं। इससे आंखों के आसपास की त्वचा की सेहत सुधरती है, फाइन लाइन्स, डार्क सर्कल्स और अंडर-आई बैग्स में भी कमी आती है।

Disclaimer: (इस आर्टिकल में सुझाए गए टिप्स केवल आम जानकारी के लिए हैं। सेहत से जुड़े किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी भी तरह का बदलाव करने या किसी भी बीमारी से संबंधित कोई भी उपाय करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)

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