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अंतरिक्ष छोड़िए, भारत अब चांद पर भेजेगा इंसान; ISRO चीफ ने बता दी पूरी टाइमलाइन

 Published : Oct 15, 2025 04:41 pm IST,  Updated : Oct 15, 2025 04:41 pm IST

ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने घोषणा की कि भारत 2040 तक चांद पर मानव भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ISRO चीफ के मुताबिक, 2027 में 'गगनयान' मिशन की शुरुआत होगी, और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तैयार हो जाएगा।

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ISRO दुनिया की अग्रणी अंतरिक्ष एजेंसी में से एक है। Image Source : PTI

रांची: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन यानी कि ISRO के अध्यक्ष वी. नारायणन ने बुधवार को ऐलान किया कि भारत 2040 तक अपने नागरिकों को चांद पर उतारने और उन्हें सुरक्षित वापस लाने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। इसके साथ ही, भारत की पहली मानव अंतरिक्ष उड़ान 'गगनयान' 2027 में लॉन्च होगी। नारायणन ने रांची में बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (BIT) मेसरा के 35वें दीक्षांत समारोह में यह बात कही।

गगनयान मिशन की तैयारियां जोरों पर

नारायणन ने बताया कि 'गगनयान' मिशन के लिए तैयारियां तेजी से चल रही हैं। इस मिशन से पहले तीन मिशन मानवरहित होंगे। पहला मिशन दिसंबर 2025 में होगा, जिसमें हाफ ह्यूमनॉयड रोबोट 'व्योममित्र' अंतरिक्ष में जाएगा। इसके बाद 2026 में दो और मानवरहित मिशन होंगे। नारायणन ने कहा, '2027 के पहले तिमाही में गगनयान के जरिए भारत का पहला मानव अंतरिक्ष मिशन पूरा होगा।'

'2035 तक होगा भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन'

ISRO प्रमुख ने बताया कि भारत 2035 तक अपना अंतरिक्ष स्टेशन 'भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन' (BAS) तैयार कर लेगा। इसके शुरुआती मॉड्यूल 2027 तक अंतरिक्ष में स्थापित हो सकते हैं। इसके अलावा, चंद्रयान-4, चंद्रयान-5, एक नया मंगल मिशन और एक खगोलीय वेधशाला मिशन 'एक्सओएम' जैसे बड़े प्रोजेक्ट भी पाइपलाइन में हैं। नारायणन ने कहा कि शुक्र ग्रह का अध्ययन करने के लिए 'वीनस ऑर्बिटर मिशन' को मंजूरी मिल चुकी है। साथ ही, सूरज का अध्ययन करने वाला 'आदित्य-एल1' मिशन अब तक 15 टेराबाइट से ज्यादा डेटा जमा कर चुका है, जो सूर्य की गतिविधियों और अंतरिक्ष मौसम को समझने में मदद कर रहा है।

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Image Source : PTIगगनयान मिशन के लिए तैयारियां जोरों पर हैं।

'आज 300 स्टार्टअप स्पेस पर काम कर रहे'

ISRO प्रमुख ने कहा कि भारत अंतरिक्ष क्षेत्र में आत्मनिर्भरता पर जोर दे रहा है, लेकिन जलवायु विज्ञान और अंतरिक्ष अनुसंधान जैसे वैश्विक मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए तैयार है। नारायणन ने बताया कि भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (IN-SPACE ने अंतरिक्ष क्षेत्र में निजी कंपनियों और स्टार्टअप्स को जोड़कर क्रांति ला दी है। कुछ साल पहले जहां एक-दो स्टार्टअप थे, वहीं आज 300 से ज्यादा स्टार्टअप सैटेलाइट बनाने, लॉन्च सेवाएं देने और अंतरिक्ष डेटा विश्लेषण में काम कर रहे हैं। ये स्टार्टअप कृषि, आपदा प्रबंधन, दूरसंचार, रेल और वाहन निगरानी, और मछली पालन जैसे क्षेत्रों में मदद कर रहे हैं।

लॉन्च क्षमता बढ़ाने की हो रही है तैयारी

चांद पर मानव मिशन जैसे बड़े लक्ष्यों के लिए भारत अपनी लॉन्च क्षमता को बढ़ा रहा है। नारायणन ने कहा, 'हम शुरू में 35 किलो वजन के उपग्रह लॉन्च करते थे, लेकिन अब हम 80,000 किलो तक की क्षमता विकसित कर रहे हैं।' इसके लिए श्रीहरिकोटा में तीसरा लॉन्च पैड बनाया जा रहा है, जिसकी लागत करीब 4000 करोड़ रुपये होगी। यह अगली पीढ़ी के लॉन्च वाहनों (NGLV) को भी सपोर्ट करेगा।

गर्व के साथ गिनाईं ISRO की उपलब्धियां

नारायणन ने गर्व के साथ बताया कि चंद्रयान-1 ने चांद पर पानी की खोज की थी, और चंद्रयान-3 ने चांद के दक्षिणी ध्रुव के पास पहली सॉफ्ट लैंडिंग की। भारत ने हाल ही में 'स्पाडेक्स' मिशन के साथ अंतरिक्ष में डॉकिंग और अनडॉकिंग की क्षमता हासिल की, जिसके साथ भारत यह उपलब्धि हासिल करने वाला चौथा देश बन गया। इसके अलावा, श्रीहरिकोटा से 100वां लॉन्च (जीएसएलवी F15/NVS-02 मिशन) भी पूरा हो चुका है।

AI और रोबोटिक्स के भविष्य पर भी बोले

नारायणन ने कहा कि AI, रोबोटिक्स और बिग डेटा अंतरिक्ष मिशनों का भविष्य हैं। उन्होंने कहा, 'जैसे 35 साल पहले कोई कंप्यूटर क्रांति की कल्पना नहीं कर सकता था, वैसे ही एआई और रोबोटिक्स अंतरिक्ष अन्वेषण का अगला दौर तय करेंगे।' इसरो प्रमुख ने बताया कि भारत के पास 8 प्रमुख परमाणु संयंत्रों में 23 परमाणु रिएक्टर हैं, जिनमें तारापुर और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र शामिल हैं। नारायणन ने कहा कि भारत आज दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अंतरिक्ष क्षेत्र में 9 क्षेत्रों में नंबर एक है।

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