ISRO ने साल 2026 के लिए अपने पहले लॉन्च की घोषणा कर दी है। इसरो ने बताया है कि वह आगामी 12 जनवरी की तारीख को अंतरिक्ष के लिए सैटेलाइट लॉन्च करेगा।
ISRO अध्यक्ष वी. नारायणन ने घोषणा की कि भारत 2040 तक चांद पर मानव भेजने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। ISRO चीफ के मुताबिक, 2027 में 'गगनयान' मिशन की शुरुआत होगी, और 2035 तक भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन तैयार हो जाएगा।
ISRO की रॉकेट लॉन्चिंग श्रीहरिकोटा और बालासोर से इसलिए होती है क्योंकि ये स्थान भूमध्य रेखा के पास, समुद्र किनारे और पूर्व दिशा में हैं, जिससे लॉन्चिंग सुरक्षित और प्रभावी होती है। श्रीहरिकोटा बड़े मिशनों, जबकि बालासोर छोटे रॉकेट्स की लॉन्चिंग के लिए सही है।
NASA और ISRO के सहयोग से बना निसार सैटेलाइट आज लॉन्च होगा। यह दुनिया का पहला डबल रडार वाला पृथ्वी अवलोकन मिशन है, जो भूकंप, बाढ़, फसल और जलवायु परिवर्तन की निगरानी कर वैश्विक आपदा प्रबंधन में क्रांति ला सकता है।
बारिश और मानसून के मौसम में देश के अलग अलग हिस्सों से बिजली गिरने की खबरें सामने आती है। इसमें बहुत अधिक जान-माल की भी हानि होती है। लेकिन अब इसके नुकसान से बचा जा सकता है। ISRO ने एक ऐसी तकनीक तैयार कर ली है जिससे 2.5 घंटे पहले ही बिजली गिरने का अलर्ट मिल जाएगा।
इसरो ने हाल ही में अपना 100वां मिशन लॉन्च किया था, लेकिन इस मिशन में अब इसरो को बड़ी दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। इसरो को NVS-02 सैटेलाइट को मनचाहे ऑर्बिट में स्थापित करने के अपने मिशन में थ्रस्टर फेल होने की वजह से झटका लगा है।
इसरो आज सुबह अपने 100वें मिशन को लॉन्च कर दिया है। इसरो ने मिशन NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट का प्रक्षेपण किया, जो जीएसएलवी-एफ15 रॉकेट के जरिए श्रीहरिकोटा, आंध्र प्रदेश से भेजा गया।
इसरो ने स्पेडेक्स मिशन के तहत अंतरिक्ष में दो सेटेलाइट्स की डॉकिंग का चौथा प्रयास किया। इसरो सूत्रों के मुताबिक, वैज्ञानिकों को इस प्रयास में कामयाबी मिल गई है।
इसरो का SpaDeX प्रोजेक्ट अपने लक्ष्य के करीब पहुंचने के बाद भी मिशन को पूरा नहीं कर पाया। आज ये तीसरी कोशिश थी। इससे पहले भी डॉकिंग प्रोसेस को दो बार टालना पड़ा था।
इसरो ने SpaDeX मिशन को लेकर बताया कि दोनों सेटेलाइट्स के बीच की दूरी को 15 मीटर तक और आगे 3 मीटर तक पहुंचाने का ट्रायल अटेम्प्ट सफल रहा है।
इसरो के नए चीफ अब वी. नारायण को बना दिया गया है। एस सोमनाथ अब रिटायर हो रहे हैं। ऐसे में आइए इसरो के नए चीफ वी. नारायण के बारे में जानते हैं...
वी नारायणन इसरो के नए प्रमुख नियुक्त किए गए हैं। वह डॉ. एस सोमनाथ की जगह लेंगे। वी नारायणन अंतरिक्ष विभाग के सचिव का भी कार्यभार संभालेंगे।
ISRO ने अंतरिक्ष में लोबिया के बीजों को अंकुरित करने में सफलता हासिल की है। इस प्रयोग से वैज्ञानिकों को कम गुरुत्वाकर्षण में पौधों की वृद्धि समझने में मदद मिलेगी, जो लंबे स्पेस मिशनों में सहायक होगा।
श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से इस महीने के अंत में लॉन्च होने वाले अपने अंतरिक्ष अभियान के जरिए इसरो एक और इतिहास रचने की तैयारी में है।
PROBA-3 दुनिया का पहला प्रेसिशन फॉर्मेशन फ्लाइंग सैटेलाइट है यानी यहां एक नहीं दो सैटेलाइट लॉन्च हुए हैं। ये सैटेलाइट सूर्य के बाहरी वातावरण के अध्ययन के लिए छोटी से छोटी जानकारी पृथ्वी पर भेजेंगे।
इसरो आज ROBA-3 मिशन लॉन्च करने वाला था, जो तकनीकी खराबी के कारण स्थगित कर दिया गया है। यह मिशन यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी का है, जो सूर्य के कोरोना का अध्ययन करेगा।
ISRO कल PROBA-3 मिशन लॉन्च करेगा। यह यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी (ESA) का मिशन है। PROBA-3 मिशन सूर्य के कोरोना का अध्ययन करेगा।
पूरा ब्रह्मांड कई रहस्य अपने भीतर छिपाए हुए है। ऐसे ही चंद्रमा के बारे में इसरो ने वो खुलासा किया है जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। चांद पर पानी का अथाह भंडार है जो छिपा हुआ है। जानिए इस रहस्य को-
जीएसएलवी रॉकेट की आखिरी उड़ान 29 मई, 2023 को थी और रॉकेट का कोडनेम 'जीएसएलवी-एफ12' रखा गया था। तार्किक रूप से, अगले जीएसएलवी रॉकेट का क्रमांकन 'जीएसएलवी-एफ13' होना चाहिए था लेकिन ऐसा नहीं हुआ।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) इतिहास रच दिया है। सूर्य मिशन पर भेजा गया आदित्य एल1 आज अपनी मंजिल एल1 पॉइंट पर पहुंच गया है। यहां अब यह लगभग 5 साल तक रहेगा।
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