Wednesday, June 19, 2024
Advertisement

चांद ने छिपा रखा है अथाह पानी, इसरो ने बताई वो बात..जिसे जानकर हो जाएंगे हैरान

पूरा ब्रह्मांड कई रहस्य अपने भीतर छिपाए हुए है। ऐसे ही चंद्रमा के बारे में इसरो ने वो खुलासा किया है जिसे जानकर आप भी हैरान हो जाएंगे। चांद पर पानी का अथाह भंडार है जो छिपा हुआ है। जानिए इस रहस्य को-

Edited By: Kajal Kumari @lallkajal
Published on: May 01, 2024 19:12 IST
moon secrets- India TV Hindi
Image Source : NASA चांद का रहस्य खुला

इसरो ने चांद के रहस्यों को लेकर बड़ा खुलासा किया है। इसरो के अंतरिक्ष अनुप्रयोग केंद्र (एसएसी) के वैज्ञानिकों ने हालिया अध्ययन में चंद्रमा के ध्रुवीय गड्ढों में पानी की बर्फ की बढ़ती संभावना के सबूत मिलने का खुलासा किया है।  इंटरनेशनल सोसाइटी फॉर फोटोग्रामेट्री एंड रिमोट सेंसिंग जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि पहले कुछ मीटर में चांद के उपसतह बर्फ की मात्रा उत्तरी और दक्षिणी दोनों ध्रुवीय क्षेत्रों में सतह पर मौजूद बर्फ की मात्रा से लगभग 5 से 8 गुना अधिक है।  इस खोज का भविष्य के चंद्र अभियानों और चंद्रमा पर दीर्घकालिक मानव उपस्थिति के लिए महत्वपूर्ण प्रभाव है।

चांद की उपसतह पर बर्फ की खोज भविष्य के चांद पर पानी की खोज के लिए एक गेम-चेंजर साबित हो सकता है। इस बर्फ का नमूना लेने या खुदाई करने के लिए चंद्रमा पर ड्रिलिंग भविष्य के मिशनों का समर्थन करने और चंद्रमा की सतह पर जीवन की संभावना को स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण होगी। इसके अलावा, अध्ययन से यह भी पता चलता है कि उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में पानी की बर्फ की मात्रा दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र की तुलना में दोगुनी है।

चंद्रमा पर पानी ज्वालामुखी के फटने से आया होगा

चंद्रमा का यह अध्ययन इस परिकल्पना की पुष्टि करता है कि चंद्रमा के ध्रुवों में जल बर्फ का प्राथमिक स्रोत 3.8 से 3.2 अरब वर्ष पहले इम्ब्रियन काल में ज्वालामुखी के दौरान निकला था। तीव्र ज्वालामुखी के प्रभाव से घाटियों और मारिया (प्राचीन ज्वालामुखी विस्फोटों से बने अंधेरे, सपाट मैदान) का निर्माण हो गया था। नतीजे से यह भी निष्कर्ष निकलता है कि पानी की बर्फ ज्वालामुखी के प्रभाव के कारण हुआ होगा। 

अनुसंधान टीम ने चंद्रमा पर पानी की बर्फ की उत्पत्ति और वितरण को समझने के लिए नासा के चंद्र टोही ऑर्बिटर (एलआरओ) पर रडार, लेजर, ऑप्टिकल, न्यूट्रॉन स्पेक्ट्रोमीटर, अल्ट्रा-वायलेट स्पेक्ट्रोमीटर और थर्मल रेडियोमीटर सहित सात उपकरणों का उपयोग किया।

बेहद महत्वपूर्ण है चांद पर पानी का मिलना

चंद्रमा के ध्रुवों में पानी की बर्फ की यह घटना बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे चंद्रमा पर भविष्य में जीवन की संभावना के साथ-साथ इसरो की भविष्य की खोज और लक्षण वर्णन के उद्देश्य से मिशनों के लिए भविष्य के लैंडिंग और नमूना स्थलों का चयन करने में अनिश्चितताओं को रोकने के लिए महत्वपूर्ण है। इस अध्ययन के निष्कर्ष, इसरो के पिछले अध्ययन पर आधारित हैं, जिसमें चंद्रयान -2 ने ध्रुवीय क्रेटर में पानी की बर्फ की उपस्थिति की संभावना की ओर इशारा किया था। .

Latest World News

India TV पर हिंदी में ब्रेकिंग न्यूज़ Hindi News देश-विदेश की ताजा खबर, लाइव न्यूज अपडेट और स्‍पेशल स्‍टोरी पढ़ें और अपने आप को रखें अप-टू-डेट। Around the world News in Hindi के लिए क्लिक करें विदेश सेक्‍शन

Advertisement
Advertisement
Advertisement