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'होर्मुज में नाकेबंदी का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं', जयशंकर से बोले रुबियो; भारत ने भी खूब सुनाया

 Edited By: Vineet Kumar Singh
 Published : Jun 13, 2026 08:52 pm IST,  Updated : Jun 13, 2026 09:01 pm IST

अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एस. जयशंकर से कहा कि होर्मुज क्षेत्र में नाकेबंदी उल्लंघन और ईरानी तेल की तस्करी बर्दाश्त नहीं होगी। वहीं, भारत ने भी ओमान के पास अमेरिकी हमलों में 3 भारतीय नाविकों की मौत पर कड़ा विरोध जताया और जवाबदेही मांगी।

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो और एस. जयशंकर। Image Source : AP/PTI

वॉशिंगटन/नई दिल्ली: अमेरिका ने ईरान से जुड़े तेल परिवहन और 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में कथित नाकेबंदी उल्लंघन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा है कि अमेरिकी नाकेबंदी के उल्लंघन और ईरानी तेल के अवैध परिवहन को किसी भी हालत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। बता दें कि इससे पहले विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने रुबियो से बातचीत की थी और  ओमान तट के पास अमेरिकी हमलों में भारतीय नागरिकों की मौत पर कड़ा विरोध जताया था।

क्या कहा मार्को रुबियो ने?

अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता टॉमी पिगॉट ने बयान जारी कर कहा कि विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने इस मुद्दे पर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से बातचीत में यह स्पष्ट किया कि सभी वाणिज्यिक जहाजों को अमेरिकी सेना के आदेशों का तुरंत पालन करना होगा, ताकि 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' में शांति और सुरक्षा बनाए रखी जा सके। रूबियो ने यह भी कहा कि अमेरिकी नाकेबंदी के उल्लंघन और ईरानी तेल की अवैध ढुलाई को किसी भी रूप में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

भारत ने जताई कड़ी आपत्ति

बता दें कि इस पूरे मामले में भारत ने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शुक्रवार को अमेरिकी विदेश मंत्री से बातचीत की और ओमान तट के पास अमेरिकी हमलों में भारतीय नागरिकों की मौत पर मजबूती से अपना विरोध दर्ज कराया। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर लिखा कि उन्होंने अमेरिकी कार्रवाई पर भारत की मजबूत आपत्ति दोहराई है। उन्होंने कहा, 'व्यावसायिक जहाजों पर इस तरह की जानलेवा कार्रवाई उचित नहीं है। मैंने अमेरिकी विदेश मंत्री को भारत का मजबूत विरोध दोहराया है।'

मारे गए थे 3 भारतीय नाविक

इस सप्ताह ओमान के पास 3 जहाजों पर हमले हुए, जिनमें भारतीय चालक दल मौजूद था। इनमें से एक हमले में 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई।

  1. पहला जहाज ‘मारिवेक्स’ पलाऊ का ध्वज लेकर चल रहा था, जिसमें 24 भारतीय नाविक सवार थे। इसे 8 जून को अमेरिकी बलों ने निष्क्रिय कर दिया, हालांकि सभी को सुरक्षित बचा लिया गया।
  2. 10 जून को ‘सेटेबेलो’ नाम के दूसरे पलाऊ-ध्वज वाले टैंकर पर हमला हुआ, जिसमें 24 में से 3 भारतीय नाविकों की मौत हो गई।
  3. तीसरा जहाज गिनी-बिसाऊ ध्वज वाला ‘जालवीर’ था जिस पर गुरुवार को हमला हुआ। इस जहाज पर 20 भारतीय सवार थे।

भारत ने लिया था कड़ा एक्शन

इन घटनाओं के बाद भारत ने कड़ा कदम उठाते हुए अमेरिकी दूतावास के कार्यवाहक प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया। उन्हें स्पष्ट रूप से बताया गया कि भारतीय नाविकों को लेकर अमेरिकी सैन्य हमले अस्वीकार्य हैं। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को दोबारा उन्हें तलब कर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। मंत्रालय ने कहा कि अमेरिकी नेवी द्वारा नागरिक जहाजों पर घातक बल प्रयोग को लेकर भारत गंभीर चिंता व्यक्त करता है।

भारत-अमेरिका में बढ़ेगा तनाव?

भारत ने पहली बार सार्वजनिक रूप से यह स्वीकार किया है कि ओमान के पास तीन जहाजों पर अमेरिकी नौसेना की कार्रवाई हुई, जिनमें भारतीय चालक दल मौजूद था और तीन नागरिकों की मौत हुई है। इस पूरे घटनाक्रम ने भारत और अमेरिका के बीच कूटनीतिक तनाव बढ़ा दिया है। एक तरफ अमेरिका ईरान से जुड़े तेल परिवहन पर सख्ती की बात कर रहा है, वहीं भारत अपने नागरिकों की मौत को लेकर कड़ा विरोध जता रहा है और जवाबदेही की मांग कर रहा है।

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