India Seafarers Safety: ईरान-अमेरिका जंग से खाड़ी के इलाके में बढ़ती टेंशन के बीच भारत ने अपने समुद्री कर्मियों की सिक्योरिटी को लेकर कूटनीतिक और समुद्री स्तर पर कोशिशें तेज कर दी हैं। दरअसल, Strait Of Hormuz में काम कर रहे भारतीय नाविक लगातार अमेरिका-ईरान के बीच जारी युद्ध की कार्रवाइयों की चपेट में आ रहे हैं, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है। अब खाड़ी और अरब सागर से गुजरने वाले व्यापारी जहाजों पर मौजूद भारतीय नागरिकों की सिक्योरिटी भारत की प्रॉयरिटी में शामिल हो गई है।
विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी प्रतिनिधि को किया तलब
भारतीय विदेश मंत्रालय ने आज (शुक्रवार को) इस हफ्ते दूसरी बार अमेरिकी दूतावास में उप मिशन प्रमुख जेसन मीक्स को तलब किया। यह स्टेप उस रिपोर्ट के बाद लिया गया, जिसमें ओमान तट के करीब 20 भारतीय चालकों वाले एक व्यापारी जहाज पर अटैक की बात सामने आई। इसने भारत की सरकार की टेंशन को और भी बढ़ा दिया है।
बार-बार अटैक से बढ़ी भारत की चिंता
जानकारी के मुताबिक, विदेश मंत्रालय में अमेरिकी मामलों के एडिशनल सेक्रेटरी ने जेसन मीक्स से मुलाकात कर अंतरराष्ट्रीय समुद्री रास्तों में बिगड़ती सुरक्षा स्थिति पर हमारे देश की गंभीर चिंता को व्यक्त किया। भारत ने साफ किया कि मिलिट्री एक्शन के दौरान नागरिक व्यापारी जहाजों को नुकसान रोकना बहुत जरूरी है।
समुद्री कर्मियों में लगभग 10 फीसदी भारतीय
गौरतलब है कि खाड़ी के इलाके में ईरान-अमेरिका संघर्ष की वजह से समुद्री व्यापार को पहले से बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। बढ़ती टेंशन के मद्देनजर कई शिपिंग कंपनियां अपने समुद्री मार्गों और सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा करने में लगी हुई हैं। जान लें कि दुनिया के कुल समुद्री कर्मियों में करीबन 10 फीसदी भारतीय हैं। हजारों भारतीय सेलर, कार्गो शिप, तेल टैंकरों और अन्य व्यापारी जहाजों पर तैनात हैं, जो नियमित तौर पर खाड़ी और अरब सागर के Strategic Maritime Routes से निकलते हैं।
नागरिकों और जहाजों की सुरक्षा की मांग तेज
MT Jalveer पर हाल ही में हुए कथित मिसाइल अटैक ने नागरिक और जहाजों की सिक्योरिटी को लेकर टेंशन और बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल के हमलों में कई भारतीय सेलर प्रभावित हुए हैं। इससे यह डिमांड भी तेज हो गई है कि मिलिट्री ऑपरेशन में और ज्यादा पारदर्शिता बरती जाए और व्यावसायिक समुद्री मार्गों की सिक्योरिटी पक्की की जाए।
समुद्री सुरक्षा तंत्र बनाने की मांग पर है जोर
ध्यान देने वाली बात है कि जहाजों पर बढ़ते खतरे के मद्देनजर भारत एक पारदर्शी Maritime De-confliction Mechanism बनाने की वकालत कर रहा है। इसके तहत सैन्य बलों और कमर्शियल शिपिंग कंपनियों के बीच बेहतर कोऑर्डिनेशन स्थापित हो सकेगा, जिससे संघर्ष के दौरान, इंटरनेशनल क्रू वाले जहाज अनजाने में टारगेट ना बनें।
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