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गुजरात-असम में बाढ़ पर यूपी-राजस्थान सूखे, 'कैच द रेन' अभियान पर क्यों जोर दे रहे पीएम मोदी, अल नीनो का कितना असर?

 Written By: Shakti Singh
 Published : Jul 26, 2026 05:17 pm IST,  Updated : Jul 26, 2026 05:17 pm IST

इस साल पूरे देश में असामान्य बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में भयंकर बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने। वहीं, अन्य इलाके सूखे पड़े हुए हैं। ऐसे में पीएम मोदी ने मन की बात में कैच द रेन अभियान पर जोर दिया।

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सूरत में सड़कों पर भरा पानी Image Source : PTI

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार (26 जुलाई) को देशवासियों से मन की बात की। इस दौरान उन्होंने 'कैच द रेन' अभियान पर जोर दिया। इसमें शामिल होने वाले लोगों की सराहना की और सभी देशवासियों से बारिश के पानी के बचाने की अपील की। उन्होंने कहा कि आज बारिश की बचाई गई हर बूंद आने वाली पीढ़ियों के लिए सबसे बड़ी पूंजी है। 'कैच द रेन' का संदेश बहुत सरल है-जहां और जब भी बारिश हो, वहीं वर्षा जल का संरक्षण करें। भारत में अब तक कितनी बारिश हुई है, अल नीनो का अब तक कितना प्रभाव दिखा है, आने वाले समय में मौसम कैसा रह सकता है और पीएम मोदी कैच दे रेन अभियान पर इतना जोर क्यों दे रहे हैं? आइए जानते हैं...

अल नीनो क्या है

अल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्से में समुद्र की सतह के असामान्य रूप से गर्म होने की स्थिति है। यह हर तीन से सात साल में एक बार बनती है और दुनिया भर के मौसम चक्र को प्रभावित करती है। भारत के लिए यह खासतौर पर अहम है, क्योंकि अल नीनो वाले सालों में मानसूनी हवाएं कमजोर पड़ने और बारिश सामान्य से कम रहने की आशंका बढ़ जाती है। हालांकि यह कोई तय नियम नहीं है, क्योंकि 1997-98 जैसे मजबूत अल नीनो साल में भी हिंद महासागर की अनुकूल स्थिति के चलते भारत में सामान्य से ज्यादा बारिश हुई थी।

2026 का मानसून अब तक कैसा रहा

जून 2026 में देश ने बीते कई दशकों की सबसे कमजोर बारिश में से एक दर्ज की। जून में करीब 40 प्रतिशत कम बारिश हुई है, जो 1901 के बाद जून महीने की पांचवीं सबसे कम बारिश है। जुलाई की शुरुआत में हालात में तेज सुधार आया और 7 जुलाई तक राष्ट्रीय स्तर पर कमी घटकर 12 प्रतिशत रह गई। 9 जुलाई तक यह 14 प्रतिशत पर पहुंची। जुलाई के मध्य में मानसूनी हवाएं दोबारा कमजोर पड़ गईं और कमी फिर बढ़कर 15 जुलाई तक 23 प्रतिशत तक जा पहुंची। पिछले कुछ दिनों में मानसून के दोबारा सक्रिय होने से 22 जुलाई तक यह आंकड़ा घटकर 19 प्रतिशत पर आया। ताजा आंकड़ों में यह कमी करीब 16 प्रतिशत के आसपास बताई जा रही है।

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Image Source : PTIअसम में बाढ़ के कारण बेघर हुए लोग

किन इलाकों में कम बारिश हुई

सबसे ज्यादा चिंता उत्तर-पश्चिम और पश्चिम भारत को लेकर है। राजस्थान और यूपी में मानसून लगातार कमजोर बना हुआ है, जबकि पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में भी सामान्य से कम बारिश दर्ज हो रही है। मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र के कुछ क्षेत्रों में भी बारिश की कमी की स्थिति बनी हुई है। मौसम विभाग ने जुलाई के अपने मासिक पूर्वानुमान में ही आगाह किया था कि महीने भर की औसत बारिश देश भर में दीर्घकालिक औसत के 94 प्रतिशत से कम रह सकती है।

किन इलाकों में ज्यादा बारिश हुई

पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में भारी बारिश के चलते लोगों को परेशानी हो रही है। बिहार, पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों में मानसून ज्यादा सक्रिय रहा और यहां सामान्य या सामान्य से अधिक बारिश दर्ज हुई। हाल के दिनों में ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, विदर्भ और कोंकण-गोवा क्षेत्र में भी मध्यम से भारी बारिश देखी गई। जुलाई के आखिरी हफ्ते में एक-दो दिन तो कुछ हिस्सों में सामान्य से करीब 170-180 प्रतिशत ज्यादा बारिश दर्ज हुई, जिससे मानसून सीजन की समग्र कमी को कम करने में मदद मिली।

कितने इलाके सूखे जैसी स्थिति में हैं

मौसम विभाग के अनुसार सूखा तभी घोषित किया जाता है, जब किसी इलाके की सीजन भर की बारिश दीर्घकालिक औसत के 75 प्रतिशत से भी नीचे चली जाए। अभी तक देश में औपचारिक सूखे की घोषणा नहीं हुई है, क्योंकि मौजूदा 16-19 प्रतिशत की कमी अब भी आईएमडी के सामान्य दायरे (19 प्रतिशत ऊपर-नीचे तक) के भीतर आती है। राजस्थान और पश्चिमी उत्तर प्रदेश जैसे इलाकों में मिट्टी की नमी तेजी से घट रही है और अगर बारिश के लंबे ब्रेक बने रहे, तो इन क्षेत्रों में सूखे जैसी स्थिति बनने का खतरा बना हुआ है।

आने वाले दिनों में कितनी बारिश की उम्मीद है

दक्षिण-पश्चिम राजस्थान के ऊपर बने कम दबाव के क्षेत्र की वजह से गुजरात में भारी से बेहद भारी बारिश की चेतावनी है। मौसम विभाग के मुताबिक अगले कुछ दिनों में उत्तर-पश्चिम, मध्य और उससे सटे उत्तरी प्रायद्वीपीय भारत तथा पूर्वी व पूर्वोत्तर भारत में मानसून के सक्रिय रहने और बड़े पैमाने पर बारिश होने की संभावना है। खासकर उत्तर भारत में 27 से 29 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियां तेज होने की उम्मीद जताई गई है। इससे मौजूदा सीजन की कुल कमी में और कमी आ सकती है, हालांकि इसका सटीक असर अगस्त की बारिश पर भी निर्भर करेगा।

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Image Source : PTIकश्मीर में भारी बारिश के बाद सलाल डैम के गेट खुले

किसानों और आम लोगों पर क्या असर होगा

खेती पर असर: जून की कमजोर बारिश ने पहले ही धान, दलहन और तिलहन जैसी खरीफ फसलों की बुआई में देरी कराई थी। जिन इलाकों में बारिश की कमी बनी हुई है, वहां किसानों को पानी बचाने वाली फसलों की तरफ जाने और सिंचाई पर निर्भरता बढ़ाने की सलाह दी गई है।

पानी और बिजली पर असर: बारिश कम रहने से जलाशयों के भरने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है, जिसका सीधा असर पीने के पानी की उपलब्धता और जलविद्युत उत्पादन पर पड़ सकता है।
गर्मी और उमस: मौसम विभाग ने जुलाई में ज्यादातर हिस्सों में सामान्य से ऊपर अधिकतम और न्यूनतम तापमान का भी अनुमान जताया है, यानी बारिश की कमी के साथ-साथ गर्मी और उमस दोनों बढ़ने की आशंका है, जो आम लोगों के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती है।
इलाकावार अंतर: चूंकि कमी और बढ़त दोनों जगह-जगह बंटी हुई हैं। इसलिए असर पूरे देश में एक जैसा नहीं होगा। पश्चिमी और उत्तर-पश्चिमी राज्यों में दिक्कतें ज्यादा दिख सकती हैं, जबकि पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर रहने की उम्मीद है।

अल नीनो का कितना असर

मौसम एजेंसियों के मुताबिक अल नीनो की स्थिति 2026 के वसंत (मार्च-मई) से बन चुकी है। यह और मजबूत होने की राह पर है। अनुमान है कि यह अगस्त-सितंबर 2026 तक प्रबल स्तर तक पहुंच सकता है और साल के अंत तक कम से कम नवंबर-दिसंबर 2026 तक बना रह सकता है। हिंद महासागर द्विध्रुव फिलहाल तटस्थ है, लेकिन अगस्त-सितंबर तक इसके सकारात्मक होने का अनुमान है, जो परंपरागत रूप से अल नीनो के नकारात्मक असर को कुछ हद तक संतुलित कर सकता है। यानी अल नीनो का असर तुरंत खत्म होने वाला नहीं है, लेकिन अगर हिंद महासागर द्विध्रुव अनुकूल दिशा में गया तो बाकी बचे मानसून सीजन (अगस्त-सितंबर) पर इसकी मार उतनी गहरी नहीं होगी, जितनी शुरुआती आशंका थी।

पानी बचाने पर क्यों जोर दे रहे पीएम मोदी

इस साल देश के अधिकतर हिस्सों में असामान्य बारिश हुई है। उत्तर पूर्वी राज्यों में लगतार बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। असम में बड़ी संख्या में लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। गुजरात और महाराष्ट्र के समुद्र से सटे इलाकों में जलभराव हुआ। जम्मू कश्मीर में भी बाढ़ की स्थिति बनी, लेकिन देश के अधिकतर हिस्सों में सूखे जैसे हालात हैं। बारिश नहीं हो रही है और तेज धूप का असर फसलों पर पड़ रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में पानी की कमी झेलनी पड़ सकती है। इसी से बचने के लिए पीएम मोदी बारिश का पानी बचाने पर जोर दे रहे हैं।

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