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वी नारायणन होंगे ISRO के नए प्रमुख, एस सोमनाथ की जगह लेंगे; जानिए उनके बारे में

 Reported By: T Raghavan Edited By: Malaika Imam
 Published : Jan 08, 2025 08:42 am IST,  Updated : Jan 08, 2025 08:56 am IST

वी नारायणन इसरो के नए प्रमुख नियुक्त किए गए हैं। वह डॉ. एस सोमनाथ की जगह लेंगे। वी नारायणन अंतरिक्ष विभाग के सचिव का भी कार्यभार संभालेंगे।

ISRO के नए प्रमुख नियुक्त हुए वी नारायणन- India TV Hindi
ISRO के नए प्रमुख नियुक्त हुए वी नारायणन

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के नए अध्यक्ष वी नारायणन होंगे। इसकी जानकारी मंगलवार को भारत सरकार ने दी। वी नारायणन ISRO के अध्यक्ष के रूप में डॉ. एस सोमनाथ की जगह लेंगे। वी नारायणन अंतरिक्ष विभाग के सचिव का भी कार्यभार संभालेंगे। कैबिनेट की नियुक्ति समिति के आदेश के अनुसार, वी नारायणन 14 जनवरी को वर्तमान ISRO प्रमुख एस सोमनाथ के स्थान पर पदभार ग्रहण करेंगे। वह अगले दो वर्षों तक या अगली सूचना तक इस पद की जिम्मेदारी संभालेंगे।

कौन हैं इसरो के नए प्रमुख?

वी नारायणन एक प्रतिष्ठित वैज्ञानिक हैं, जिनके पास रॉकेट और अंतरिक्ष यान प्रणोदन में लगभग चार दशकों का अनुभव है। वह एक रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट प्रोपल्शन विशेषज्ञ हैं। वी नारायणन 1984 में ISRO में शामिल हुए और लिक्विड प्रोपल्शन सिस्टम सेंटर (एलपीएससी) के निदेशक बनने से पहले विभिन्न पदों पर कार्य किया। प्रारंभिक चरण के दौरान, उन्होंने विक्रम साराभाई अंतरिक्ष केंद्र (VSSC) में साउंडिंग रॉकेट्स और संवर्धित उपग्रह प्रक्षेपण यान (ASLV) और ध्रुवीय उपग्रह प्रक्षेपण यान (PSLV) के ठोस प्रणोदन क्षेत्र में काम किया।

वी नारायणन ने एब्लेटिव नोजल सिस्टम, कंपोजिट मोटर केस और कंपोजिट इग्नाइटर केस की प्रक्रिया योजना, प्रक्रिया नियंत्रण और कार्यान्वयन में योगदान दिया। फिलहाल नारायणन एलपीएससी के निदेशक हैं, जो ISRO के प्रमुख केंद्रों में से एक है, जिसका मुख्यालय तिरुवनंतपुरम के वलियामला में है, जिसकी एक इकाई बेंगलुरु में है। नारायणन के पास 40 साल का अनुभव है। वे रॉकेट और स्पेसक्राफ्ट ऑपरेशन के एक्सपर्ट हैं।

14 जनवरी को रिटायर हो रहे एस सोमनाथ

ISRO के मौजूदा चेयरमैन एस. सोमनाथ ने 14 जनवरी 2022 को ISRO चेयरमैन का पद संभाला था। वे तीन साल के कार्यकाल के बाद रिटायर हो रहे हैं। उनके कार्यकाल में ISRO ने इतिहास रचा। ISRO ने न सिर्फ चांद के साउथ पोल पर चंद्रयान-3 की लैंडिंग कराई, बल्कि धरती से 15 लाख किमी ऊपर लैगरेंज पॉइंट पर सूर्य के अध्ययन के लिए आदित्य-L1 भी भेजा।

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