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जमीं पर टैरिफ से टकराव और अंतरिक्ष में दोस्ती, चंद्रमा और मंगल मिशन पर भारत-अमेरिका साझेदारी के नए युग में

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Sep 18, 2025 08:47 am IST,  Updated : Sep 18, 2025 08:49 am IST

भारत और अमेरिका ने टैरिफ विवाद के बावजूद चंद्रमा और मंगल मिशन में दोस्ती का नया उदाहरण पेश किया है। आने वाले दिनों में दोनों देशों ने अंतरिक्ष में साझेदारी को मजबूत करने वाला कदम उठाया है।

मार्श (फाइल फोटो)-नासा- India TV Hindi
मार्श (फाइल फोटो)-नासा Image Source : AP

ह्यूस्टन: भारत और अमेरिका के बीच भले ही धरती पर टैरिफ को लेकर टकराव और तनाव की स्थिति चल रही हो, लेकिन मंगल और चंद्रमा पर दोनों देश नए साथी बनकर उभरे हैं। भारत ने एक विशेष कार्यक्रम के दौरान अंतरिक्ष क्षेत्र में अमेरिका के साथ साझेदारी के एक नए युग की शुरुआत का संकेत दिया। वॉशिंगटन डीसी में भारतीय दूतावास द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में अधिकारियों और अंतरिक्ष यात्रियों ने बताया कि दोनों देशों के बीच दशकों पुराना सहयोग अब चंद्रमा और मंगल अभियानों का मार्ग प्रशस्त कर रहा है।

भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग

इस कार्यक्रम का शीर्षक था, "भारत-अमेरिका अंतरिक्ष सहयोग: भविष्य की साझेदारी की सीमाएं" यह आयोजन सोमवार को इंडिया हाउस में हुआ और इसमें हाल की उपलब्धियों को रेखांकित किया गया, जिनमें NASA-ISRO का संयुक्त NISAR उपग्रह और Axiom मिशन-4 शामिल हैं, जिसमें भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) की यात्रा की।

संयुक्त राज्य अमेरिका में भारत के राजदूत विनय क्वात्रा ने इस साझेदारी को "वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रौद्योगिकी विकास और वाणिज्यिक सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक गतिशील मंच" बताया। उन्होंने कहा कि भारत का अंतरिक्ष कार्यक्रम अब कम लागत में अनुसंधान के क्षेत्र में वैश्विक नेतृत्वकर्ता बन चुका है, और अमेरिका के साथ संयुक्त प्रयास "मानव अंतरिक्ष उड़ान की सीमाओं को आने वाले दशकों में और आगे बढ़ा सकते हैं।"

भारत-अमेरिका की अंतरिक्ष में दोस्ती बनी आदर्श उदाहरण

NASA की पृथ्वी विज्ञान विभाग की निदेशक डॉ. करेन सेंट जर्मेन ने अपने संबोधन में NISAR मिशन को “अंतरराष्ट्रीय सहयोग का आदर्श उदाहरण” बताया और कहा कि "विभिन्न विशेषज्ञताओं के सम्मिलन से वैज्ञानिक प्रगति को गति मिलती है।" एक वर्चुअल पैनल डिस्कशन कार्यक्रम के मुख्य आकर्षणों में से एक था "मॉमेंट्स इन ऑर्बिट", जिसमें NASA के अंतरिक्ष यात्री सुनीता विलियम्स, निक हेग और बुच विलमोर ने शुभांशु शुक्ला के साथ भाग लिया। इस चर्चा में उन्होंने प्रशिक्षण, अंतरिक्ष स्टेशन पर जीवन और बदलते अंतरिक्ष अभियानों के बारे में अपने अनुभव साझा किए।

शुभांशु ने दिया संदेश

कार्यक्रम में शामिल भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला ने कहा, "मेरी यात्रा अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों की शक्ति और वैश्विक अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत की बढ़ती भूमिका का प्रमाण है।" भारतीय दूतावास की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, इस कार्यक्रम में सरकार, अंतरिक्ष एजेंसियों, उद्योग, अकादमिक संस्थानों और थिंक टैंकों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चाओं में यह स्पष्ट हुआ कि भारत-अमेरिका सहयोग अब केवल उपग्रह प्रक्षेपण और डेटा साझाकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह वाणिज्यिक अंतरिक्ष उद्यमों और मानव मिशनों के नए क्षितिज खोल रहा है।

भारत का अंतरिक्ष में परचम

विशेषज्ञों का कहना है कि इस गहराते सहयोग का रणनीतिक महत्व भी है खासकर जब दोनों देश चीन की अंतरिक्ष महत्वाकांक्षाओं का मुकाबला करने के प्रयास में लगे हैं, साथ ही निजी उद्योगों के लिए नए अवसर भी तलाश रहे हैं। भारत के लिए, विशेषज्ञों का मानना है कि यह साझेदारी भारत की तेजी से बढ़ती अंतरिक्ष क्षमताओं को अंतरराष्ट्रीय मान्यता दिला रही है। चंद्रयान की सफल लैंडिंग से लेकर आगामी गगनयान मिशन तक नई दिल्ली वैश्विक अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था में एक प्रमुख खिलाड़ी के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। (PTI)

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