वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, जनवरी में अमेरिका से भारत का आयात 23.71 प्रतिशत बढ़कर 4.5 अरब डॉलर हो गया।
मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि हाल की खरीदारी को वैश्विक वृहद चिंताओं में कमी, खासकर अमेरिका के नरम महंगाई आंकड़ों से समर्थन मिला है। इससे, एफपीआई की भारत समेत उभरते बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता बेहतर हुई है।
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ते व्यापारिक रिश्तों के बीच ऊर्जा सौदों को लेकर एक अहम संदेश सामने आया है। देश की सबसे बड़ी गैस आयातक कंपनी पेट्रोनेट LNG के सीईओ अक्षय कुमार सिंह ने साफ कहा है कि भारत अमेरिका से LNG तभी खरीदेगा, जब वह उचित कीमत पर उपलब्ध होगी।
चाहे FIR कर दो..चाहे मुकदमा दर्ज कर दो..चाहे प्रिविलेज मोशन ले आओ...मैं मोदी से नहीं डरने वाला..एक इंच पीछे नहीं हटने वाला...ये शब्द राहुल गांधी के हैं।
केंद्रीय मंत्री और भारतीय जनता पार्टी के नेता गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी पर बड़ा हमला बोला है। गिरिराज सिंह ने राहुल गांधी को झूठा बताया है और कहा है कि वह भारत में गृह युद्ध शुरू करना चाहते हैं।
पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच फ्रेमवर्क एग्रीमेंट तैयार किया जा रहा है। एक बार अंतरिम समझौता अंतिम रूप ले लेगा, सबकुछ सामने होगा। अमेरिका के साथ डील में भारत और भारतीय किसानों के हितों का ध्यान रखा गया है।
अमेरिका ने भारत के साथ हुई ट्रेड डील पर अपनी फैक्टशीट में बदलाव किया है, जिसमें दालों का जिक्र हटा दिया गया है।
भारत-अमेरिका के बीच ट्रेड डील फाइनल होते ही पाकिस्तान और अमेरिका के रिश्तों में दरार आनी शुरू हो गई है। पाक रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने अमेरिका पर बड़ा आरोप लगाते हुए कहा है कि उसने पाकिस्तान को टॉयलेट पेपर की तरह यूज करके फेंद दिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और डोनाल्ड ट्रंप के बीच फोन पर हुई बातचीत के बाद भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते की घोषणा हुई थी।
भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में हुई ट्रेड डील ने वैश्विक राजनीति और ऊर्जा बाजार में हलचल मचा दी है। जहां एक तरफ अमेरिका ने भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ को हटाने का ऐलान किया, वहीं व्हाइट हाउस के एक आदेश ने नई बहस को जन्म दे दिया।
भारत और अमेरिका के बीच हुई नई ट्रेड डील को भारत की अर्थव्यवस्था और निर्यात सेक्टर के लिए एक बड़ा गेमचेंजर माना जा रहा है। जिस समझौते पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साइन किए हैं, उस पर केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में विस्तार से जानकारी दी।
मंत्री ने कहा कि इस डील में मॉडिफाइड सीड्स, डेरी, मीट, सोयाबीन, मक्का, चावल, गेंहू, मिलेट्स, केला, स्ट्रॉबेरी, चेरी साइट्रस फ्रूट, मूंग, काबुली चना, ऑयल सीड्स, ग्राउंड नट्स, एथनॉल और टोबैको पर अमेरिका को कोई रियायत नहीं दी गई है।
अमेरिका ने पिछले साल अगस्त में, रूस से तेल की खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत जवाबी टैरिफ के साथ 25 प्रतिशत का अतिरिक्त टैरिफ लगाया था। अमेरिका, भारत का सबसे बड़ा निर्यात गंतव्य है, इसलिए भारतीय निर्यातकों को 50 प्रतिशत के इस टैरिफ से भारी नुकसान हो रहा था।
ट्रंप ने अपने आदेश में आगे कहा कि भारत ने ये स्पष्ट किया है कि वो अमेरिका से ऊर्जा उत्पाद खरीदेगा और हाल में अगले 10 सालों में रक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए अमेरिका के साथ एक रूपरेखा पर सहमति व्यक्त की है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का आभार जताया है। उन्होंने इस डील पर सहमति को दोनों देशों के लिए ग्रेड न्यूज बताया और कहा कि यह विश्वास और गतिशीलता का प्रतीक है।
इस रूपरेखा के तहत, अमेरिका भारतीय वस्तुओं पर जवाबी शुल्क घटाकर 18 प्रतिशत कर देगा। इससे अमेरिका में वस्त्र, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक एवं रबड़ उत्पाद, जैविक रसायन, हस्तशिल्प उत्पाद और चुनिंदा मशीनरी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में काफी अवसर प्राप्त होंगे।
भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर आज एक संयुक्त बयान जारी किया गया। बयान में इस डील को लेकर जानकारी दी गई है। इस बयान के मुताबिक यह ट्रेड डील दोनों देशों के बीच साझेदारी में मील का पत्थर साबित होगा
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में कई बार बड़ी बातों से ज्यादा असर एक छोटे से आंकड़े का होता है। भारत-अमेरिका ट्रेड डील में भी कुछ ऐसा ही हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जैसे ही यह ऐलान किया कि भारतीय उत्पादों पर टैरिफ घटाकर 18 प्रतिशत किया जाएगा, साउथ एशिया की राजनीति में हलचल मच गई।
राज्यसभा में जैसे ही पीएम मोदी ने बोलना शुरू किया, विपक्ष ने हंगामा शुरू कर दिया। विपक्ष पर चुटकी लेते हुए पीएम ने कहा, ''जो लोग थक गए, जो लोग चले गए लेकिन कभी ना कभी उनको जवाब देना पड़ेगा कि देश की कैसी हालत बना दी थी कि दुनिया का कोई देश आपसे डील नहीं करना चाहता था।''
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा गलियारा वार्ता बृहस्पतिवार को ह्यूस्टन में आयोजित की गई। इसमें दोनों पक्षों के अधिकारी और कई अमेरिकी ऊर्जा कंपनियां शामिल हुईं।
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