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जापान होगा भारत के Chandrayaan-5 मिशन का साथी, पीएम मोदी ने की घोषणा

 Written By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : Aug 29, 2025 08:47 pm IST,  Updated : Aug 29, 2025 08:47 pm IST

चंद्रयान-5 मिशन में एक अधिक परिष्कृत लैंडर और रोवर भेजा जा सकता है, जो पहले से ज्यादा उन्नत उपकरणों से लैस होंगे और चंद्रमा पर अधिक समय तक कार्य करने में सक्षम होंगे। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, चंद्रयान-5 को एक सैंपल रिटर्न मिशन के रूप में भी विकसित किया जा सकता है।

नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री। - India TV Hindi
नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री। Image Source : PTI

टोक्यो: भारत के चंद्रयान-5 मिशन में अब जापान भी सहयोगी होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को टोक्यो से यह घोषणा की है। बता दें कि भारत और जापान ने शुक्रवार को चंद्रयान-5 मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर किया। यह मिशन दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) और जापान एयरोस्पेस एक्सप्लोरेशन एजेंसी (JAXA) द्वारा चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में संयुक्त अन्वेषण के उद्देश्य से संचालित किया जाएगा।

भारत ने किया समझौते पर हस्ताक्षर

जापान के साथ चंद्रयान-5 मिशन के लिए भारत ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किया। यह समझौता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की जापान यात्रा के दौरान संपन्न हुआ। मिशन का उद्देश्य चंद्रमा के स्थायी रूप से छायांकित क्षेत्रों (PSR) के आसपास जल और अन्य अस्थायी पदार्थों की खोज करना है, जो चंद्रमा पर जीवन और भविष्य के मानव मिशनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

चंद्रयान-5 मिशन की प्रमुख विशेषताएं

प्रक्षेपण: इस मिशन को JAXA के H3-24L प्रक्षेपण यान के माध्यम से लॉन्च किया जाएगा।

भारतीय लैंडर: इसरो इस मिशन के लिए एक चंद्र लैंडर विकसित करेगा।

जापानी रोवर: लैंडर के साथ जापान द्वारा निर्मित चंद्र रोवर भेजा जाएगा।

वैज्ञानिक उपकरण: ISRO कुछ विशिष्ट वैज्ञानिक उपकरण भी विकसित करेगा, जो वाष्पशील तत्वों के स्थानीय विश्लेषण के लिए इस्तेमाल किए जाएंगे।

अंतरिक्ष में भारत-जापान सहयोग

प्रधानमंत्री मोदी ने जापान के प्रमुख समाचार पत्र 'योमिउरी शिंबुन' को दिए एक साक्षात्कार में कहा, “मुझे खुशी है कि भारत और जापान ‘चंद्रयान’ श्रृंखला के अगले संस्करण, यानी लूपेक्स मिशन (Lunar Polar Exploration) के लिए एक साथ काम कर रहे हैं। यह साझेदारी चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव की हमारी समझ को और गहरा करेगी।” मोदी ने आगे कहा कि उन्हें विश्वास है कि दोनों देशों की वैज्ञानिक टीमें अंतरिक्ष विज्ञान की सीमाओं को आगे बढ़ाने के लिए मिलकर कार्य करेंगी। 

जापान के सहयोग से होगा क्षितिज का विस्तार

पीएम मोदी ने कहा, “हमारी यह साझेदारी न केवल हमारे क्षितिज का विस्तार करेगी, बल्कि धरती पर जीवन को भी बेहतर बनाएगी।” प्रधानमंत्री ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि यह हमारे वैज्ञानिकों के दृढ़ संकल्प, कड़ी मेहनत और नवाचार की कहानी है। उन्होंने याद दिलाया कि चंद्रयान-3 की ऐतिहासिक चंद्र लैंडिंग से लेकर अंतरग्रहीय अभियानों तक भारत ने साबित किया है कि अंतरिक्ष अंतिम सीमा नहीं, बल्कि अगली सीमा है।

अंतरिक्ष विज्ञान का व्यापक प्रभाव

पीएम मोदी ने कहा, “अंतरिक्ष विज्ञान का प्रभाव सिर्फ विज्ञान तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे दैनिक जीवन के कई पहलुओं जैसे कृषि, आपदा प्रबंधन, संचार और तकनीकी विकास से गहराई से जुड़ा हुआ है।”

चंद्रयान-5 मिशन क्या है?

चंद्रयान-5 भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) का एक प्रस्तावित चंद्र मिशन है, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर एक बार फिर सॉफ्ट लैंडिंग करना और वहां वैज्ञानिक अध्ययन करना है। यह मिशन चंद्रयान-3 की सफलता के बाद भारत के चंद्र अन्वेषण कार्यक्रम का अगला कदम माना जा रहा है। इसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की सतह, मिट्टी, खनिज और तापीय गुणों का और भी उन्नत वैज्ञानिक अध्ययन करना है। (भाषा)

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