पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई को लेकर इस वक्त हंगामा मचा हुआ है। सोमवार को खैबर पख्तूनख्वा समेत कई इलाकों में पुलिस और इमरान समर्थकों के बीच टकराव हुआ, गोलियां चलाई गईं और प्रदर्शनकारियों को पीटा गया। खैबर पख्तूनख्वा इस वक्त सिचुएशन काफी खराब है और प्रदर्शनकारियों को कंट्रोल करना पुलिस के लिए मुश्किल हो रहा है। कई इलाकों में शहबाज शरीफ की सरकार को सेना उतारनी पड़ी है।
पाकिस्तान में क्यों मचा है बवाल?
दरअसल, ये पूरा हंगामा पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा में गवर्नर रूल लागू करने के बाद शुरू हुआ। इमरान खान की रिहाई को लेकर चल रहे आंदोलन को रोकने के लिए, उनके समर्थकों के लॉन्ग मार्च को खत्म कराने के लिए, शहबाज सरकार ने अपनी ताकत का इस्तेमाल किया। खैबर पख्तूनख्वा की सरकार सस्पेंड कर दी गई है और चीफ मिनिस्टर सुहैल आफरीदी समेत कई मंत्रियों को प्रिवेंटिव कस्टडी में ले लिया गया है। इसके साथ ही इमरान खान के समर्थकों के लॉन्ग मार्च पर भी एक्शन हुआ है। इस्लामाबाद पहुंचने से पहले ही इमरान खान के समर्थकों को खदेड़ दिया गया। इसके बाद इमरान समर्थक और ज्यादा भड़क गए। वे खैबर पख्तूनख्वा में सड़कों पर उतर आए और पुलिस से भिड़ गए। इमरान के समर्थकों ने पथराव किया जिसके बाद पुलिस ने प्रदर्शकारियों पर फायरिंग की।
चारों तरफ से घिरा पाकिस्तान
पाकिस्तान अभी के समय चारों तरफ से घिरा हुआ है। एक तरफ अफगानिस्तान से टकराव, दूसरी तरफ ईरान की नाराजगी। इसके ऊपर से पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की भी बुरी हालत है। पाकिस्तान को दुनिया में कोई कर्ज देने को तैयार नहीं है। इसके बावजूद पाकिस्तान की सरकार और फौज की सारी ताकत इमरान खान के समर्थकों को रोकने में लगी है। पाकिस्तान की फौज को ना तो कोर्ट की परवाह है..ना ही पब्लिक सेंटिमेंट की। इसका खामियाजा शहबाज शरीफ और जनरल मुनीर दोनों को भुगतना पड़ सकता है।
आपातकाल के खिलाफ कोर्ट में याचिका
आपको बता दें कि रविवार को पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने खैबर पख्तूनख्वा में आपातकाल लागू करने का ऐलान किया था। उन्होंने प्रांत में बढ़ते आतंकवादी हमलों, संवैधानिक व्यवस्था के ठप पड़ने और कानून-व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति का हवाला देते हुए पाकिस्तानी संविधान के अनुच्छेद 232(1) और 234(1) के तहत आपातकाल लागू किया है। PTI के मुताबिक, राष्ट्रपति के इस फैसले के खिलाफ सोमवार को पेशावर हाई कोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता ने दलील दी है कि आपातकाल और राज्यपाल शासन लागू किया जाना अवैध, असंवैधानिक और दुर्भावनापूर्ण इरादों से प्रेरित है। याचिका में कहा गया है कि ये उपाय मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने के साथ ही लोकतांत्रिक जनादेश को दरकिनार करता है।
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