1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. पाकिस्तान सरकार ने इमरान के समर्थकों पर आर्मी कोर्ट में केस चलाने को दी मंजूरी, जानें सैन्य अदालत के फैसले की बारीकी

पाकिस्तान सरकार ने इमरान के समर्थकों पर आर्मी कोर्ट में केस चलाने को दी मंजूरी, जानें सैन्य अदालत के फैसले की बारीकी

 Edited By: Dharmendra Kumar Mishra
 Published : May 20, 2023 01:31 pm IST,  Updated : May 20, 2023 01:36 pm IST

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार की कैबिनेट के एक फैसले ने इमरान खान को तगड़ा झटका दिया है। इसके तहत सैन्य प्रतिष्ठानों पर तोड़फोड़ और हिंसा करने वाले नागरिकों पर सरकार ने सैन्य अदालत में मुकदमा चलाने को मंजूरी दे दी है।

शहबाज शरीफ (बाएं) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री- India TV Hindi
शहबाज शरीफ (बाएं) पाकिस्तान के प्रधानमंत्री Image Source : AP

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ सरकार की कैबिनेट के एक फैसले ने इमरान खान को तगड़ा झटका दिया है। इसके तहत सैन्य प्रतिष्ठानों पर तोड़फोड़ और हिंसा करने वाले नागरिकों पर सरकार ने सैन्य अदालत में मुकदमा चलाने को मंजूरी दे दी है। पाकिस्तान संघीय कैबिनेट ने राष्ट्रीय सुरक्षा समिति (एनएससी) में लिए गए फैसलों को मंजूरी दे दी है। इसके तहत नौ मई को सैन्य प्रतिष्ठानों में तोड़फोड़ करने वाले प्रदर्शनकारियों पर सेना राज अधिनियम के तहत मुकदमा चलाया जाएगा। पाकिस्तानी मीडिया की रिपोर्ट के अनुसार, प्रधान मंत्री हाउस में शाहबाज शरीफ की अध्यक्षता में हुई बैठक में एनएससी और कोर कमांडरों के सम्मेलन के कुछ ही दिनों बाद सैन्य अदालतों में नागरिकों पर मुकदमा चलाने की मंजूरी दी गई।

बता दें कि इस अदालत के फैसले को किसी कोर्ट में चुनौती नहीं दी जा सकती। पाकिस्तान में बीती 9 मई को अर्धसैनिक रेंजरों द्वारा पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के प्रमुख व पूर्व पीएम इमरान खान को इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के परिसर से गिरफ्तार कर लिया गया था। इसके बाद पाकिस्तान में जगह-जगह इमरान के समर्थकोंने व्यापक विरोध प्रदर्शन किया था। प्रदर्शनकारियों ने सार्वजनिक और सरकारी संपत्तियों में तोड़फोड़ की और यहां तक कि रावलपिंडी में जनरल मुख्यालय और लाहौर कोर कमांडर के आवास पर भी हमला कर दिया। दंगे के बाद पीटीआई नेताओं और कार्यकर्ताओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की गई, जो अब भी जारी है।

सैन्य अधिनियम के तहत चलेगा मुकदमा

एक प्रमुख कैबिनेट मंत्री ने गुमनामी का अनुरोध करते मीडिया को बताया कि कोई नई सैन्य अदालत स्थापित नहीं की जाएगी। अभियुक्तों को विशेष स्थायी अदालतों में पेश किया जाएगा, जो पहले से ही सैन्य अधिनियम के तहत काम कर रहे हैं। हालांकि, प्रसिद्ध वकील और सेना से संबंधित मामलों के विशेषज्ञ, कर्नल (सेवानिवृत्त) इनामुर रहीम ने कहा कि रक्षा मंत्रालय या सेनाध्यक्ष (सीओएएस) को विशेष स्थायी अदालतों की स्थापना या पुनरुद्धार के लिए औपचारिक रूप से एक अधिसूचना जारी करनी होगी। एक्सप्रेस ट्रिब्यून के मुताबिक रहीम ने कहा, संघीय सरकार ने पहले ही सेना प्रमुख को विशेष स्थायी अदालतें गठित करने के लिए किसी भी फॉर्मेशन कमांडर को वारंट जारी करने या यहां तक कि वारंट जारी करने का अधिकार दे दिया है। एक बार विशेष स्थायी अदालतें स्थापित हो जाने के बाद, उन्होंने कहा, वे पूरे साल एक शहर या विभिन्न शहरों में काम कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें

जापान में जलवा बिखेरता हिंदुस्तान, पीएम मोदी से आकर गले मिले बाइडन...तो चकराया चीन और सहमा पाकिस्तान

जापान में मोदी ने दिया इंटरव्यू, रूस-यूक्रेन युद्ध से लेकर दक्षिण-चीन सागर और ताइवान मसले पर की खुलकर बैटिंग

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश