इस्लामाबादः पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस महीने के अंत में चीन की आधिकारिक यात्रा पर जाएंगे, जहां वह एशियाई शिखर सहयोगय सम्मेलन (एससीओ) में शामिल होंगे। पाकिस्तान को उम्मीद है कि इस दौरान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के दूसरे चरण की औपचारिक शुरुआत हो सकती है। पाकिस्तान के योजना मंत्री अहसान इकबाल ने मंगलवार को एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान संवाददाताओं से यह दावा किया।
क्या है चीन की सीपीईसी योजना
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री शहबाज की आगामी बीजिंग यात्रा के दौरान CPEC के नए चरण की शुरुआत होगी, जिसमें दोनों देशों के बीच प्राथमिकताओं को स्पष्ट रूप से निर्धारित किया जाएगा और परिणामों पर सहमति बनाई जाएगी। बता दें कि सीपीईसी चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा है। यह पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को चीन के शिनजियांग प्रांत से जोड़ता है। इसके पहले चरण में बुनियादी ढांचे, ऊर्जा और परिवहन से जुड़े कई प्रोजेक्ट शामिल थे। अब दूसरे चरण में औद्योगिक विकास, कृषि सहयोग, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन जैसे क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
जिनपिंग से मिलेंगे शहबाज
जेसीसी (संयुक्त सहयोग समिति) की अगली बैठक अक्टूबर में होने की संभावना है, लेकिन इसके पहले प्रधानमंत्री शरीफ 31 अगस्त से 1 सितंबर के बीच बीजिंग में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे। इसी यात्रा के दौरान उनके चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से भी मुलाकात करने की संभावना है। यह दौरा पाकिस्तान के लिए राजनयिक और आर्थिक दोनों दृष्टियों से बेहद अहम माना जा रहा है।
भारत की आपत्ति
सीपीईसी को लेकर भारत हमेशा से अपनी आपत्ति जताता रहा है। भारत का मुख्य विरोध इस परियोजना के उस हिस्से को लेकर है, जो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) से होकर गुजरता है। भारत इस क्षेत्र को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है और किसी भी तीसरे पक्ष द्वारा यहां की गतिविधियों को अपनी संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का उल्लंघन मानता है।
यूएन ने भी भारत उठा चुका है मुद्दा
भारत ने पहले भी कई बार संयुक्त राष्ट्र और चीन के समक्ष इस मुद्दे को उठाया है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सीपीईसी जैसी परियोजनाएं भारत की सहमति के बिना भारत के दावे वाले क्षेत्र में संचालित नहीं की जानी चाहिए। भारत का यह भी मानना है कि इस गलियारे के माध्यम से पाकिस्तान और चीन रणनीतिक गठजोड़ को मज़बूती दे रहे हैं, जो भारत की सुरक्षा के लिए चिंता का विषय है। (AP)