1. Hindi News
  2. विदेश
  3. एशिया
  4. पाकिस्तान की दमनकारी नीति, बलूचिस्तानियों की आवाज दबाने के लिए लाया नया कानून

पाकिस्तान की दमनकारी नीति, बलूचिस्तानियों की आवाज दबाने के लिए लाया नया कानून

 Edited By: India TV News Desk
 Published : Jun 08, 2025 04:44 pm IST,  Updated : Jun 08, 2025 04:44 pm IST

बलूचिस्तानियों पर जुर्म की हदें पार करने के लिए पाकिस्तान की सरकार एक और कानून लेकर आ गई है। इसे बलूच विधानसभा से पारित कराया गया है। इस कानून के तहत पाक अधिकारी अब बलूच लोगों को बिना किसी जुर्म 90 दिनों तक हिरासत में रख सकेंगे।

शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री। - India TV Hindi
शहबाज शरीफ, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री। Image Source : AP

क्वेटाः पाकिस्तान अपनी दमनकारी नीति से बलूचिस्तानियों की आवाज को दबाना चाहता है। लिहाजा बलूचिस्तान विधानसभा के जरिये 4 जून को काउंटर टेररिज्म के नाम पर (बलूचिस्तान संशोधन) अधिनियम 2025 पारित करवाया है, ताकि अपने अधिकार के लिए लड़ रहे बलूचिस्तानियों की आवाज को बंद किया जा सके। यह कानून वहां कार्यरत सुरक्षा बलों को अत्यधिक शक्तियां प्रदान करता है। इस कानून को लेकर मानवाधिकार संगठनों, कानूनी विशेषज्ञों और नागरिक समाज ने तीखी प्रतिक्रिया दी है और चेताया है कि यह कानून दमन और अशांति को और बढ़ा सकता है।

सिर्फ शक के आधार पर 90 दिनों की जेल

इस नए कानून के तहत, पाकिस्तानी सेना, आईएसआई और अन्य खुफिया एजेंसियों को किसी भी व्यक्ति को बिना किसी आरोप और बिना अदालत में पेश किए सिर्फ शक के आधार पर 90 दिनों तक हिरासत में रखने की अनुमति दी गई है। इस प्रक्रिया में न्यायिक निगरानी की आवश्यकता नहीं होगी।

पुलिस और खुफिया एजेंसी की बढ़ाई ताकत

नये कानून के तहत संयुक्त जांच दल (JIT)को भी बिना न्यायिक स्वीकृति के डिटेंशन ऑर्डर जारी करने, वैचारिक प्रोफाइलिंग करने और तलाशी व ज़ब्ती जैसी कार्रवाइयों की अनुमति दी गई है। संयुक्त जांच दल में पुलिस और खुफिया एजेंसियों के अधिकारी शामिल होंगे।  पहली बार सैन्य अधिकारियों को नागरिक निगरानी पैनलों में आधिकारिक भूमिका भी दी गई है।

यह कानून विवादास्पद क्यों है?

आलोचकों का कहना है कि यह कानून नागरिक पुलिस और सैन्य कार्रवाई के बीच की रेखा को धुंधला करता है और इससे जन निगरानी और राज्य प्रायोजित दमन को बढ़ावा मिलेगा। यह खासकर बलूच समुदाय को निशाना बनाकर लाया गया कानून है। 

मानवाधिकार संगठनों की प्रतिक्रिया

ह्यूमन राइट्स कमीशन ऑफ पाकिस्तान (HRCP), एमनेस्टी इंटरनेशनल, ह्यूमन राइट्स वॉच और कई स्थानीय संगठनों ने इस कानून को संवैधानिक अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया है। इस कानून को विशेष रूप से पाकिस्तान के संविधान के अनुच्छेद 10 और आईसीसीपीआर (International Covenant on Civil and Political Rights) के खिलाफ करार दिया गया है। संगठनों ने कहा कि इससे बलूचिस्तान में जबरन गायब किए जाने की दशकों से सामने आ रही घटनाओं को और बढ़ावा मिलेगा। सैकड़ों परिवार आज भी अपने लापता प्रियजनों की तलाश कर रहे हैं, जिनमें से कई 15-20 वर्षों से बिना जानकारी के लापता हैं, और आरोप है कि उन्हें राज्य बलों ने अगवा किया था।

बीवाईसी ने की सख्त आलोचना

बलूच यकजहती कमेटी (BYC) ने कानून की कड़ी आलोचना करते हुए इसे “नागरिक जीवन का सैन्यीकरण” बताया। कहा,“यह कानून व्यक्तिगत स्वतंत्रता, उचित प्रक्रिया और मनमानी गिरफ्तारी से सुरक्षा जैसे मौलिक अधिकारों का घोर उल्लंघन है।” BYC ने इस कानून की तुलना नाजी यातना शिविरों और चीन के उइगर मुसलमानों के बंदीकरण से की है।

सरकार की सफाई

पाकिस्तान सरकार ने इस कानून का बचाव करते हुए कहा है कि यह आतंकवाद विरोधी अभियानों को मजबूत करने के लिए आवश्यक है। प्रांतीय प्रवक्ता के अनुसार, “यह कानून केवल उन लोगों पर लागू होगा जो राज्य विरोधी गतिविधियों में शामिल हैं, कानून का पालन करने वाले नागरिकों को डरने की जरूरत नहीं है।” हालांकि, यह कानून बलूचिस्तान में पहले से मौजूद अलगाववाद, सैन्य कार्रवाई और राजनीतिक उपेक्षा की पृष्ठभूमि में आया है, जहां तनाव और असंतोष पहले से चरम पर हैं। (क्रेडिट-एनडीटीवी)

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। Asia से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश