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सामूहिक कब्र की खुदाई चाहता है श्रीलंका का ये सियासी दल, जानें राष्ट्रपति दिसानायके को क्यों लिखा पत्र

 Edited By: Amit Mishra
 Published : Jul 11, 2025 06:46 pm IST,  Updated : Jul 11, 2025 06:46 pm IST

श्रीलंका की प्रमुख तमिल पार्टी ने राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके को पत्र लिखा है। पार्टी ने अपने पत्र में राष्ट्रपति से मांग की है कि सामूहिक कब्र स्थल की खुदाई हो जिससे सच को सामने लाया जा सके।

श्रीलंका सामूहिक कब्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)- India TV Hindi
श्रीलंका सामूहिक कब्र (प्रतीकात्मक तस्वीर) Image Source : AP

कोलंबो: श्रीलंका की प्रमुख तमिल पार्टी ने शुक्रवार को दिसानायके सरकार से अपील की है कि वह 2009 में समाप्त हुए खूनी संघर्ष से जुड़े एक संभावित सामूहिक कब्र स्थल की खुदाई में 'सच को सामने लाने' के लिए निर्णायक कदम उठाए। इलंकाई तमिल अरासु कच्ची (आईटीएके) ने राष्ट्रपति अनुरा कुमार दिसानायके को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘हम आग्रह करते हैं कि सच को उजागर करने के लिए त्वरित और निर्णायक कार्रवाई की जाए, फोरेंसिक प्रक्रियाएं अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप हों, और दोषियों को न्याय के कटघरे में लाया जाए।” 

पुनर्विकास कार्य के दौरान मिले के कंकाल

इस साल की शुरुआत में उत्तरी जाफना प्रायद्वीप के अरियालाई श्मशान घाट में चेम्मानी में पुनर्विकास कार्य के दौरान कंकाल के अवशेष मिले थे। इसके बाद, जाफना मजिस्ट्रेट की अदालत ने आधिकारिक तौर पर इसे सामूहिक कब्र घोषित कर दिया और अदालत की निगरानी में खुदाई का आदेश दिया गया। वर्ष 1998 में चेम्मानी में सामूहिक कब्र होने का संदेह था और 1999 में हुई खुदाई में 15 कंकाल मिले थे। 

'विशेषज्ञों की मदद से कराई जाए फोरेंसिक जांच'

आईटीएके ने कहा कि चेम्मानी और उत्तर व पूर्व में कई अन्य संदिग्ध सामूहिक कब्रें ‘युद्ध अपराधों और तमिल आबादी के खिलाफ नरसंहार अभियान का स्पष्ट प्रमाण हैं।’ पार्टी ने दावा किया कि नवीनतम खुदाई में शिशुओं सहित 40 से ज्यादा कंकाल पाए गए हैं। पार्टी ने राष्ट्रपति दिसानायके से आग्रह किया कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए दोनों खुदाई स्थलों की खोज से जुड़ी जानकारियों पर अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों की मदद से फोरेंसिक जांच कराई जाए। 

कितने लोगों की हुई मौत?

श्रीलंकाई सेना ने मई 2009 में ‘लिबरेशन टाइगर्स ऑफ तमिल ईलम’ (एलटीटीई) पर विजय की घोषणा की थी। करीब 27,000 सैनिकों ने तीन दशकों तक चले संघर्ष में अपनी जान गंवाई, जिनमें से केवल अंतिम चरण (जुलाई 2006 से शुरू) में ही 6,200 से अधिक सैनिक और 22,000 से ज्यादा एलटीटीई के लड़ाके मारे गए थे। (भाषा)

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