चीन ने दुनिया का सबसे बड़ा हाइड्रो पावर प्रोजेक्ट बनाया है। यारलुंग त्सांग नदी पर बने इस बांध को मोटुओ या मेडोग मेगा डैम प्रोजेक्ट के नाम से जाना जाता है। दक्षिण-पश्चिम चीन के सिचुआन प्रांत में स्थित शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन की पहली जनरेटिंग यूनिट को शुक्रवार को पावर ग्रिड से जोड़ा गया। इसके साथ ही दुनिया के सबसे ऊंचे बांध पर बिजली उत्पादन शुरू हो गया है। इस हाइड्रोपावर स्टेशन की क्षमता 20 लाख किलोवॉट है। इसके पूरी तरह शुरू होने के बाद हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली बनेगी।
शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन का डैम 315 मीटर ऊंचा है। इसी के साथ यह दुनिया का सबसे ऊंचा डैम बन गया है।
दुनिया के सबसे ऊंचे डैम की खासियत क्या है?
- शुआंगजियांगकोउ हाइड्रोपावर स्टेशन 315 मीटर ऊंचा है। इसकी कुल क्षमता 20 लाख किलोवॉट है, इससे हर साल औसतन 7.7 अरब यूनिट बिजली बनेगी।
- यह प्रोजेक्ट बिजली बनाने के साथ यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में बाढ़ का खतरा कम करने में भी मदद करेगा।
- इसे बनाने में 4.6 करोड़ क्यूबिक मीटर से ज्यादा समान का इस्तेमाल हुआ है। यह मात्रा इतनी ज्यादा है कि इससे पूरी पृथ्वी की भूमध्य रेखा के चारों ओर करीब 1 मीटर ऊंची दीवार बनाई जा सकती है।
- इससे एनर्जी का उत्पादन बढ़ेगा। कोयला जैसे ईंधनों पर निर्भरता भी कम हो सकती है। यह हाइड्रोपावर स्टेशन सिर्फ बिजली बनाने के लिए नहीं है। यह यांग्त्जे नदी के ऊपरी हिस्से में पानी के बहाव को नियंत्रित करेगा।
- इससे बाढ़ का खतरा कम करने और पानी के बेहतर इस्तेमाल में भी मदद मिलेगी।
डैम बनाने में कितनी लागत आई?
जुलाई 2025 में इस मेगा डैम का निर्माण शुरू किया गया था। इसमें 168 अरब डॉलर की भारी लागत का अनुमान है। इसकी विशालता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सालाना बिजली उत्पादन क्षमता के साथ यह दुनिया की सभी जल-बिजली परियोजनाओं को पीछे छोड़ देगा।
भारत के लिए है वॉटर बम?
चीन के इस मेगा डैम ने भारत और बांग्लादेश में चिंता बढ़ा दी है। यहां के करोड़ों लोगों के लिए यह बहुत बड़े खतरे के रूप में देखा जा रहा है। भारत में तो इसे वॉटर बम भी कहा जा रहा है। विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि इस नए डैम से चीन को यारलुंग त्सांगपो नदी को नियंत्रित करने की ताकत मिल जाएगी।
यारलुंग त्सांगपो नदी भारत के अरुणाचल प्रदेश और असम राज्य के साथ बांग्लादेश में भी बहती है। इसे भारत में ब्रह्मपुत्र और बांग्लादेश में जमुना के नाम से जाना जाता है। यह डैम यारलुंग त्सांगपो नदी के उस इलाके में बनाया गया है जहां यह दुनिया की सबसे गहरी घाटी यारलुंग त्सांगपो ग्रैंड कैन्यन से होकर बहती है। यह घोड़े की नाल के आकार के ग्रेट बेंड के पास तेजी से नीचे गिरती है और आगे बढ़ते हुए भारत और बांग्लादेश में प्रवेश करती है।
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