1. Hindi News
  2. विदेश
  3. अमेरिका
  4. 'मुंबई आतंकी हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए'

'मुंबई आतंकी हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए'

 Written By: Bhasha
 Published : Nov 26, 2015 01:41 pm IST,  Updated : Nov 26, 2015 01:42 pm IST

संयुक्त राष्ट्र: भारत में मुंबई हमलों की सातवीं बरसी मनाए जाने के बीच संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की-मून ने कहा है कि सभी आतंकी हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए

‘26/11 के...- India TV Hindi
‘26/11 के षड्यंत्रकारियों को कठघरे में लाया जाना चाहिए’

संयुक्त राष्ट्र: भारत में मुंबई हमलों की सातवीं बरसी मनाए जाने के बीच संयुक्त राष्ट्र प्रमुख बान की-मून ने कहा है कि सभी आतंकी हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए और रेखांकित किया कि भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों से आतंकवाद के खतरे से निपटा जा सकता है। बान ने यह बात एक सवाल के जवाब में कही । उनसे पूछा गया कि क्या पाकिस्तान को उसकी धरती से संचालित हो रहे आतंकी संगठनों पर रोक लगाने और मुंबई हमलों के षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाने के लिए अधिक कदम उठाने की आवश्यकता है ।

महासचिव ने कहा, संबंधित देशों में कानून प्रवर्तन पर राय जाहिर किए बिना मैं फिर कहना चाहता हूं कि आतंकी हमलों के सभी षड्यंत्रकारियों को न्याय के कठघरे में लाया जाना चाहिए । उन्होंने उल्लेख किया कि भारत तथा पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंधों से आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच अधिक सकारात्मक माहौल उत्पन्न हो सकता है । बान ने पीटीआई-भाषा से कहा, मेरा मानना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच बेहतर संबंध दोनों देशों के लिए आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए अधिक सकारात्मक माहौल उत्पन्न कर सकते हैं । अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए आतंकवाद के एक बड़ा खतरा बन चुकने का जिक्र करते हुए अन्होंने कहा कि बुराई हर रोज बहुत बड़ा नुकसान कर रही है और हाल में लेबनान तथा पेरिस जैसी जगहों पर भीषण हमले इसके गवाह हैं ।

बान ने कहा, सदस्य देशों को इस बुराई पर रोक लगाने और उखाड़ फेंकने की दिशा में मिलकर काम करना चाहिए । मुंबई हमलों के साजिशकर्ताओं को अभी न्याय का सामना करना है और मामला पाकिस्तान की एक अदालत में घिसट रहा है । महासचिव ने कहा, मैं समझता हूं कि जकी उर रहमान को रिहा करना पाकिस्तान की एक अदालत का फैसला था और भारत ने इस मामले की रिपोर्ट सुरक्षा परिषद की 1267 प्रतिबंध समिति से की है । आतंकी संगठन लश्कर ए तैयबा के सरगना 55 वर्षीय लखवी को मुंबई हमलों के महीनों बाद 2009 में पाकिस्तान में गिरफ्तार किया गया था । छब्बीस नवंबर 2008 को मुंबई में कई जगहों पर आतंकी हमले हुए थे और 10 बंदूकधारियों ने 166 लोगों को मार डाला था ।

लश्कर ए तैयबा के संस्थापक एवं जमात उद दावा के सरगना हाफिज सईद का करीबी रिश्तेदार लखवी पाकिस्तान के एक हाईकोर्ट द्वारा सुरक्षा अधिनियम के तहत उसकी हिरासत निलंबित कर दिए जाने के एक दिन बाद अप्रैल में जेल से रिहा हो गया था । वह करीब छह साल तक हिरासत में रहा । भारत ने जेल से उसकी रिहाई पर कड़ी आपत्ति जताई थी । संयुक्त राष्ट्र में भारत के राजदूत अशोक मुखर्जी ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध समिति के अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा था कि यह अलकायदा और संबंद्ध व्यक्तियों तथा समूहों से संबंधित समिति के प्रावधानों का उल्लंघन है । नयी दिल्ली ने यह भी रेखांकित किया था कि लखवी न तो कभी धन ले सकता है और न ही धन दे सकता है क्योंकि उसकी सभी संपत्तियां और वित्तीय संसाधन जब्त किए जाने हैं ।

Advertisement

India TV हिंदी न्यूज़ के साथ रहें हर दिन अपडेट, पाएं देश और दुनिया की हर बड़ी खबर। US से जुड़ी लेटेस्ट खबरों के लिए अभी विज़िट करें विदेश