
तीसरे दौर की शुरुआत चुनाव प्रचार से होती है। इसमें अलग-अलग पार्टी के उम्मीदवार मतदाताओं का समर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। इसी दौरान उम्मीदवारों के बीच टेलीविजन पर इस मामले से जुड़े मुद्दों पर बहस भी होती है। आखिरी हफ्ते में, उम्मीदवार अपनी पूरी ताकत ‘स्विंग स्टे्टस’ को लुभाने में झोंकते हैं। ‘स्विंग स्टे्टस’ वे राज्य होते हैं, जहां के मतदाता किसी भी पक्ष की ओर जा सकते हैं। चुनाव की अंतिम प्रक्रिया में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ राष्ट्रपति पद के लिए मतदान करता है। लेकिन इससे पहले राज्यों के मतदाता इलेक्टर चुनते हैं, जो राष्ट्रपति पद के किसी न किसी उम्मीदवार का समर्थक होता है। ये इलेक्टर एक ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ बनाते हैं, जिसमें कुल 538 सदस्य होते हैं। ‘इलेक्टर’ चुनने के साथ ही आम जनता के लिए चुनाव खत्म हो जाता है। अंत में ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ के सदस्य मतदान के जरिए अमेरिका के राष्ट्रपति का चुनाव करते हैं। राष्ट्रपति बनने के लिए कम से कम 270 इलेक्टोरल मत जरुरी होते हैं।
हर राज्य का इलेक्टर चुनने का कोटा तय होता है। यह संख्या हर राज्य से अमेरिकी संसद के दोनों सदनों-हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव और सेनेट के सदस्यों की कुल संख्या के बराबर होती है। इसलिए हर राज्य के इलेक्टरों की संख्या में अंतर होता है। चुनाव के लिए भी दिन निश्चित होता है। ‘इलेक्टोरल कॉलेज’ राष्ट्रपति पद के लिए चुनावी साल के नवंबर महीने में पड़ने वाले पहले सोमवार के बाद पड़ने वाले पहले मंगलवार को मतदान करता है। अमेरिकी संविधान ने विभिन्न उम्मीदवारों के बीच टाई होने की स्थिति में राष्ट्रपति का फैसला करने के लिए संसद के निचले सदन ‘हाउस ऑफ रीप्रेजेंटेटिव्स’ द्वारा राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार पर अंतिम निर्णय लेने और ऊपरी सदन ‘सीनेट’ द्वारा उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के भाग्य पर फैसला लेने का अधिकार दिया गया।