नई दिल्ली: भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात से ठीक पहले आज फेसबुक के सीईओ मार्क जुकेरबर्ग ने डिजिटल मीडिया के समर्थन में सोशल मीडिया पर अपनी प्रोफाइल फोटो बदल दी। फेसबुक पर अपनी पोस्ट में जुकेरबर्ग ने लिखा, “डिजिटल इंडिया, जो कि भारत सरकार की ग्रामीण समाज को इंटरनेट से जोड़ने का प्रयास है, के समर्थन में मैंने अपनी प्रोफाइल पिक्चर बदल दी है। मैं फेसबुक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से वार्तालाप करने का इंतज़ार कर रहा हूं। आप भी यहां पर fb.com/supportdigitalindia डिजिटल इंडिया का समर्थन करें।”
इससे पहले सिलिकोन वैली के प्रौद्योगिकी प्रमुखों के साथ मुलाकात में मोदी ने डिजिटल इंडिया का जिक्र करते हुए कहा, हम अपने नागरिकों को हर कार्यालय में जरूरत से ज्यादा कागजी दस्तावेजों के बोझ से मुक्त करना चाहते हैं। हम कागज रहित कामकाज चाहते हैं। हम हर नागरिक के लिए एक डिजिटल लॉकर बनायेंगे जिससे कि वे अपने व्यक्तिगत दस्तावेजों को सुरक्षित रख सकें और जिन्हें विभिन्न विभागों के साथ साझा भी किया जा सके।
उन्होंने कहा कि लेकिन इन सबके लिए हमें डिजिटल खाई को पाटना होगा और डिजिटल साक्षरता को उसी तरह आगे बढ़ाना होगा जिस तरह हम आम साक्षरता सुनिश्चित करने के लिए प्रयास कर रहे हैं। मोदी ने कहा, हम यह सुनिश्चित करेंगे कि प्रौद्योगिकी तक सबकी पहुंच बने, वह वहनीय हो और वह गुणवत्ता बढ़ाये।
उन्होंने कहा, हम चाहते हैं कि देश के सवा सौ करोड़ लोग एक दूसरे से डिजिटल माध्यम से जुड़े हों । पिछले वर्ष तक देश के पैमाने पर ब्रांडबैंड का उपयोग पहले ही 63 प्रतिशत तक पहुंच चुका है, हम इसे और विस्तार देना चाहते हैं।
प्रधानमंत्री ने कहा कि डिजिटल इंडिया के दृष्टिकोण को हासिल करने के लिए सरकार को भी कारपोरेट दुनिया की तरह सोचना शुरू करना होगा। उन्होंने मुख्य कार्यकारियों से कहा, बुनियादी ढांचे के सृजन से लेकर सेवाओं, उत्पादों के विनिर्माण से मानव संसाधन विकास, नागरिकों के लिए सुगमता को सरकार को समर्थन से डिजिटल साक्षरता बढ़ाने, डिजिटल इंडिया आपके लिए एक बड़ा अवसर है।
मेक इन इंडिया और डिजिटल इंडिया में योगदान का आह्वान करते हुए मोदी ने कहा कि गांवों और कस्बों में साझा सेवा केंद्र स्थापित किए जाएंगे और स्मार्ट शहरों के निर्माण के लिए सूचना प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा, हम अपने गांवों को स्मार्ट आर्थिक हब में बदलना चाहते हैं और अपने किसानों को बेहतर तरीके से बाजार से जोड़ना चाहते हैं, जिससे उन पर प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों का प्रभाव कम से कम किया जा सके।