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भारतीय दोस्त के लिए अमेरिकी शख्स ने बुलंद की आवाज, धड़ल्ले से किया H-1B वीजा नीति का विरोध

 Published : Sep 04, 2025 07:21 pm IST,  Updated : Sep 04, 2025 07:21 pm IST

अमेरिकी सरकार की नई पॉलिसी के चलते H-1B वीजा धारकों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इसी क्रम में कुछ ऐसा हुआ है जिसकी चर्चा पूरे अमेरिका में हो रही है। चलिए जानते हैं कि पूरा मामला क्या है।

America H-1B VISA Policy- India TV Hindi
America H-1B VISA Policy Image Source : AP

America H-1B Visa Policy: अमेरिका में H-1B वीजा को लेकर अब अमेरिकी लोगों का ही विरोध देखने को मिल रहा है। एक अमेरिकी व्यक्ति ने H-1B वीजा नीति की आलोचना की है। वीजा नीति के तहत वीजा धारकों को अमेरिका में बने रहने के लिए वीजा समाप्ति के 60 दिनों के भीतर रोजगार ढूंढना अनिवार्य है। H-1B वीजा नीति की आलोचना करने वाले शख्स का नाम नाथन प्लैटर है। नाथन प्लैटर ने अपनी एक दोस्त का उदाहरण दिया, जिसे निर्धारित 2 महीनों के भीतर नई नौकरी ना मिलने के कारण अमेरिका छोड़ने पर मजबूर होना पड़ा।

प्लैटर ने नहीं बताया दोस्त का नाम

मिनियापोलिस में डेटा साइंटिस्ट के तौर पर काम करने वाले प्लैटर ने बताया कि उनकी दोस्त को अमेरिका में 8 साल बिताने के बाद भारत लौटने पर मजबूर होना पड़ा। उनकी दोस्त एक महिला हैं जिसका नाम उन्होंने अपने पोस्ट में नहीं लिखा है। नाथन प्लैटर ने बताया कि उनकी दोस्त ने अमेरिका से स्नातक और स्नातकोत्तर की डिग्री हासिल की थी और 2 साल तक यहीं इसी देश में काम किया था। उन्होंने बताया कि हाल ही में, नौकरी छूटने के बाद, उसने नए जॉब की तलाश शुरू की थी। महिला H-1B वीजा पर अमेरिका में थी, जो विदेशी कर्मचारियों को देश में कानूनी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देता है।

दोस्त ने H-1B नीति की आलोचना की

नाथन प्लैटर ने सोशल मीडिया मंच LinkedIn पर उस H-1B नीति की आलोचना की है जिसके कारण उनकी दोस्त को स्थानांतरित होना पड़ा। उन्होंने बताया कि उसने अमेरिका में काम करके और टैक्स देकर अपनी जिंदगी बनाई थी। प्लैटर ने कहा, "हमने उसे यहां पढ़ने दिया। यहां काम करने दिया। यहां टैक्स भरने दिया और अब हम उसे बाहर निकाल रहे हैं? मेरी दोस्त अमेरिका में 8 साल (4 स्नातक + 2 स्नातकोत्तर + 2 नौकरी) बिताने के बाद भारत वापस जा रही है क्योंकि उसे H-1B वीजा धारकों के लिए निर्धारित 60 दिन की छूट अवधि में नई नौकरी नहीं मिल पाई।" 

'यह नीति हास्यास्पद है'

प्लैटर ने कहा कि उनकी दोस्त ने 14 घंटे काम किया और अपनी टीम को आगे बढ़ाया। इसके बावजूद, उसे ऑस्टिन, टेक्सास में अपना जीवन छोड़कर अपने देश लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। उन्होंने कहा, "उसे ऑस्टिन में अपनी जिंदगी को उखाड़ फेंकना होगा, अपने समुदाय को अलविदा कहना होगा, यह नीति हास्यास्पद है।"

प्लैटर ने की कही बदलाव की बात

प्लैटर ने कहा कि अमेरिका अपनी 60 दिवसीय ग्रेस पीरियड नीति के जरिए प्रतिभाशाली लोगों को प्रशिक्षित और शिक्षित कर रहा है और उन्हें वैश्विक प्रतिस्पर्धियों को सौंप रहा है। उन्होंने H-1B प्रणाली में बदलाव का आह्वान करते हुए कहा, "हमें अंतरराष्ट्रीय प्रतिभाओं को बनाए रखने के बेहतर तरीकों की जरूरत है।"

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